Science News: NASA के वैज्ञानिक मंगल ग्रह को लेकर बहुत आशान्वित हैं। उनका मानना है कि आज से लाखों वर्ष पूर्व मंगल ग्रह पर पानी की नदियां बहा करती थीं। वहां पर संभवतया जीवन था, हालांकि अभी इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। फिर भी नासा द्वारा भेजे गए मार्स रोवर व सैटेलाइट्स के जरिए एकत्रित किए गए डेटा से बड़ी बात सामने निकल कर आई है।

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नए डेटा के अनुसार मंगल ग्रह पर आज से लगभग 400,000 साल पहले बर्फ जमी हुई थी। उस समय मंगल पर हिमयुग (Ice Age) चल रहा था। तब हवाएं उत्तर-पूर्व में बहा करती थी परन्तु अचानक ही वे उत्तर-पश्चिम दिशा में बहने लगी और इसके साथ ही हिमयुग समाप्त हो गया। यह रोमांचक अध्ययन 5 जुलाई, 2023 को नेचर नामक विज्ञान पत्रिका में प्रकाशित हुआ था। इस परियोजना पर काम करने वाले शोधकर्ता राष्ट्रीय खगोलीय वेधशालाएं, भूविज्ञान और भूभौतिकी संस्थान, और चीनी विज्ञान अकादमी के तिब्बती पठार अनुसंधान संस्थान से आए थे। उन्होंने ब्राउन यूनिवर्सिटी के सहकर्मियों के साथ मिलकर काम किया।

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यह खोज क्यों इतनी महत्वपूर्ण है?

मंगल ग्रह हमारे सौर मंडल का वह ग्रह है जो पृथ्वी से सबसे अधिक मिलता-जुलता है। इसलिए, मंगल की जलवायु का अध्ययन (Science News) करके, वैज्ञानिक हमारे अपने ग्रह और अन्य ग्रहों पर भी जलवायु के बारे में अधिक जान सकते हैं। अध्ययन का नेतृत्व करने वाले प्रोफेसर चुनलाई ली ने कहा, “मंगल ग्रह की जलवायु प्रक्रियाओं को समझने से हमारे सौर मंडल में पृथ्वी और अन्य ग्रहों के विकास और इतिहास को जान सकेंगे।”

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अतीत में, NASA के वैज्ञानिकों ने सोचा था कि समय के साथ मंगल ग्रह पर जलवायु बदल गई है, लेकिन उनके पास अपने विचारों का समर्थन करने के लिए अधिक सबूत नहीं थे। अब ज़ूरोंग रोवर ने इसे बदल दिया। इसने मंगल की सतह से सीधे तस्वीरें लेने और डेटा एकत्र करने के लिए विशेष कैमरों और उपकरणों का उपयोग किया। यह वास्तव में रोमांचक था क्योंकि इसने वैज्ञानिकों को ग्रह का करीब से अध्ययन करने की अनुमति दी।

शोध दल ने पाया कि मंगल की घूर्णन धुरी के कोण में बदलाव के कारण ग्रह अपने सबसे हालिया हिमयुग से बाहर आया। इस परिवर्तन ने दक्षिणी यूटोपियन मैदान पर टीलों के आकार, अभिविन्यास और संरचना को प्रभावित किया। ये टीले हिमयुग के दौरान बनी अर्धचंद्राकार संरचनाओं से लंबी, अंधेरी चोटियों में बदल गए।

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इस अध्ययन ने न केवल इस बात की पुष्टि की कि हिमयुग की समाप्ति के साथ हवा की दिशा बदल गई, बल्कि वैज्ञानिकों को मौसमी हवा में बदलाव की भविष्यवाणी करने के लिए अपने मॉडल को बेहतर बनाने में भी मदद मिली। रोवर द्वारा एकत्र किया गया डेटा (Science News) वैज्ञानिकों द्वारा पाए गए अन्य सुरागों से मेल खाता है, जैसे मंगल ग्रह पर विभिन्न अक्षांशों पर बर्फ और धूल की परतें।

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वैज्ञानिक इस खोज से वास्तव में उत्साहित हैं क्योंकि इससे उन्हें मंगल ग्रह की प्राचीन जलवायु को समझने में मदद मिलती है और यह आज ग्रह को कैसे प्रभावित करता है। वे पिछले दो अरब वर्षों के इतिहास के बारे में और अधिक जानने के लिए मंगल ग्रह की जलवायु और पर्यावरण का अध्ययन करना जारी रख रहे हैं।

अंत में, ज़ूरोंग रोवर के मंगल ग्रह के अन्वेषण ने हमें ग्रह के जलवायु इतिहास में अविश्वसनीय अंतर्दृष्टि प्रदान की है। हमने लगभग 400,000 साल पहले हुए एक प्रमुख जलवायु परिवर्तन के बारे में सीखा है, जो मंगल ग्रह पर अंतिम हिमयुग के अंत के साथ मेल खाता था। इस अध्ययन के माध्यम से, वैज्ञानिक मंगल ग्रह के रहस्यों और हमारे अपने ग्रह से इसके संबंध को जानने के करीब पहुंच रहे हैं।

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