Yamraj Temple, Mathura: देश में कई ऐसे मंदिर हैं, जो अपनी अनोखी मान्यता और रोचक इतिहास के लिए देशभर में प्रसिद्ध हैं। मंदिरों से लोगों की खास आस्था जुड़ी होती है, जिसके कारण हर समय मंदिरों में भक्तों की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिलती है। देशभर में भगवान विष्णु, शिव जी, माता दुर्गा, मां लक्ष्मी और हनुमान जी आदि के कई प्राचीन मंदिर हैं। लेकिन आज हम आपको मथुरा में मौजूद एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां मृत्यु के देवता और यमुना देवी की पूजा होती है। शादीशुदा जोड़ों के अलावा भाई-बहन के साथ में इस मंदिर में दर्शन करने का भी खास महत्व है। चलिए जानते हैं मृत्यु के देवता के इसी मंदिर से जुड़ी खास बातों के बारे में।
मथुरा में भी है यमराज का मंदिर
उत्तर प्रदेश के मथुरा शहर के बीच में विश्राम घाट है। जहां पर यमराज जी और उनकी बहन यमुना देवी का प्राचीन मंदिर स्थित है, जिसे यमुना धर्मराज मंदिर के नाम से जाना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण ने कंस का वध करने के बाद इसी घाट पर विश्राम किया था। इसलिए इसे विश्राम घाट कहा जाता है।
चार भुजा धारी प्रतिमा है स्थापित
धार्मिक मान्यता के अनुसार, यमुना धर्मराज मंदिर में देवी यमुना और यमराज जी की पूजा की जाती है। यहां पर यमुना जी की चार भुजा धारी प्रतिमा स्थापित है। देवी के एक हाथ में थाली और दूसरे में कमल का फूल है। तीसरे हाथ में मां भाई को टीका लगाए दिखाई गई हैं। जबकि चौथे हाथ से देवी भाई से वरदान ले रही हैं।
यमुना जी में स्नान करने का है खास महत्व
यमुना जी यमराज जी की बहन है और देवी यमुना कृष्ण जी की पटरानी भी हैं। माना जाता है कि यहां पर यदि भाई-बहन साथ में देवी यमुना और यमराज जी की पूजा करते हैं, तो उनके बीच प्रेम बढ़ता है। मंदिर में मौजूद यमुना जी में डुबकी लगाने से भाई-बहन के रिश्ते में चल रही परेशानियां खत्म होती हैं और उन्हें यमराज के प्रकोप से मुक्ति मिलती है। आम दिनों के अलावा भाई दूज के दिन मंदिर में लोगों की खास भीड़ देखने को मिलती है।
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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