शनि दोष को दूर भगाएंगे ये 7 ज्योतिष उपाय, शनिदेव भी रोक नहीं सकेंगे आपकी तरक्की

Shani Dosh Upay:वैदिक ज्योतिष में कुंडली में शनि दोष होना अच्छा नहीं माना गया है। जीवन में शनि बाधा होने तरक्की रुक सकती है। आइए जानते हैं, ज्योतिष शास्त्र में बताए गए किन उपायों से शनि दोष को समाप्त कर सकते हैं?

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Shani Dosh Upay: वैदिक ज्योतिष में शनि बेहद महत्वपूर्ण ग्रह माने गए हैं। शनिदेव की हर हलचल, गतिविधि और गोचर पर ज्योतिषाचार्यों की खास नजर रहती है। कुंडली में शनि दोष को जीवन की बहुत बड़ी बाधा बताया गया है। मान्यता है शनि चाहें तो रंक को भी राजा और धनवान को भिखारी बना सकते हैं। आइए जानते हैं, शनि ग्रह का जीवन में महत्व क्या है और ज्योतिष शास्त्र में बताए गए किन उपायों से शनि दोष को समाप्त कर सकते हैं?

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जीवन में शनि ग्रह का महत्व

वैदिक ज्योतिष में शनिदेव को बेहद महत्वपूर्ण कार्य और स्पष्ट अधिकार दिया गया है। सेवा से जुड़े जितने भी कार्य हैं, वे सभी शनिदेव के अधीन हैं। किसी गलती से जो असंतोष, दुख या क्लेश होता हैं, वह शनि का रुप है। आयु, मृत्यु, कष्ट, वृद्धावस्था, प्राकृतिक आपदा, बीमारी, निर्धनता, विकलांगता, अपमान, नौकर-चाकर, नौकरी, चोरी, लोभ-लालच, लोहा, काली वस्तुएं, वैराग्य, लोकतंत्र, डर, गंदे कपड़े, मृत्यु का कारण आदि के कारक ग्रह शनि ही हैं। किसी व्यक्ति की कुंडली में मजबूत और शुभ शनि जहां धन, यश, पद-प्रतिष्ठा, आध्यात्मिकता और मोक्ष प्रदान करते हैं, वहीं कमजोर और अशुभ शनि कष्ट, बीमारी, अनहोनी, दरिद्रता और अन्याय का कारण बन सकते हैं। इसलिए जीवन में शनि ग्रह का अत्यधिक महत्व है।

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शनि दोष दूर करने के उपाय

वैदिक ज्योतिष के मुताबिक जब कुंडली में शनि ग्रह कमजोर होते हैं, तब वे अपना श्रेष्ठ फल नहीं पाते हैं। इसे ज्योतिष शास्त्र में ‘शनि बाधा’ कहा गया है। शनि तब सबसे ज्यादा अशुभ होते हैं, जब वे नीच के होते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब शनि मेष राशि में होते हैं, तब नीच के माने जाते हैं। शनिदेव का सरसों तेल, तिल, उड़द, लोहा और काले-नीले रंगों वाली वस्तुएं बेहद प्रिय है। इसलिए इन वस्तुओं को उन्हें अर्पित करने और दान देने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं।

  • कुंडली के शनि दोष दूर करने के लिए शनिवार को तेल, लोहा, चमड़ा, जूते, नीला कंबल, कोयले और पुराने वस्त्र का दान करने से शीघ्र लाभ होता है।
  • शनिवार के दिन पानी में कोयला प्रवाहित करने के उपाय से विशेष लाभ होता है और शनिदेव शांत जाते हैं।
  • काले कुत्ते को तेल-रोटी खिलाने फायदा होता है। घर की आखिरी रोटी को तेल में चुपड़ कर कुत्ते को देने से भी विशेष लाभ होता है।
  • सुबह या शाम को काले रंग के कीड़े को भोजन से विशेष फायदा होता है। धन-दौलत पाने के लिए इस उपाय को विशेष प्रभावशाली माना गया है। इसके लिए बाजरा में तेल और शक्कर मिलाएं या आटा में शक्कर मिलाकर काले रंग कीड़े घर के पास रखकर हाथ जोड़ कर कहें कि जैसे आपका पेट भरा, वैसे मेरा भी पेट भरावें।
  • हर शनिवार भिखारियों को खिचड़ी और साग रोटी-साग और फल देने से भी जीवन की शनि बाधा समाप्त होती है। भिखारियों को खोटे सिक्के देने से लाभ होता है।
  • काली गाय को तेल चुपड़ी रोटी देने और बंदर को केला, गाजर, मूली, भीगे चने खिलाने से कुंडली में शनि मजबूत होते हैं।
  • मछलियों को आटे की गोली खिलाने और कबूतरों को दाना देने से भी शनि बाधा दूर होती है।

शनि का रत्न नीलम

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, जो जातक शनि बाधा से गंभीर रूप से पीड़ित हैं, उन्हें ऊपर बताए गए उपायों को करने के साथ शनि का रत्न भी धारण करना चाहिए। वैदिक ज्योतिष में नीलम को शनि का मुख्य रत्न बताया गया है। यह बेहद प्रभावशाली रत्न है, जिसे धारण करने से अवश्य लाभ होता है। कितने रत्ती का नीलम और इसे धारण करने की शास्त्रीय विधि जानने के लिए किसी योग्य और अनुभवी ज्योतिष या पंडित से परामर्श जरूर लेना चाहिए।

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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लेखक के बारे में

Shyamnandan

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श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
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