TrendingiranDonald Trump

---विज्ञापन---

Shabari Jayanti 2026 Date: भक्ति और प्रतीक्षा की अनूठी मिसाल है शबरी जयंती, जानें सही तारीख, महत्व और पूजन विधि

Shabari Jayanti 2026 Date: शबरी जयंती हर साल फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष सप्तमी को मनाई जाती है. यह माता शबरी की भक्ति और भगवान राम के प्रति प्रेम का प्रतीक है. आइए जानते हैं, 2026 में यह किस दिन है, इसका महत्व और पूजन विधि क्या है?

Shabari Jayanti 2026 Date: शबरी जयंती हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है. यह दिन माता शबरी की निस्वार्थ भक्ति और भगवान राम के प्रति उनके अटूट प्रेम को समर्पित है. माता शबरी ने दशकों तक भगवान राम के आने का इंतजार किया और अंत में उनका दर्शन प्राप्त किया. यही कारण है कि शबरी जयंती हर भक्त के लिए धैर्य और श्रद्धा की प्रेरणा का स्रोत है. आइए जानते हैं, इस साल शबरी जयंती कब है, इस दिन का क्या महत्व है और पूजन विधि क्या है?

भक्ति और प्रतीक्षा की मिसाल

माता शबरी ने जूठे बेर भी भगवान राम को स्वादिष्ट भोग देने के लिए चुने. यह दर्शाता है कि सच्ची भक्ति में अहंकार या स्वार्थ की कोई जगह नहीं होती. उनके जीवन से यही संदेश मिलता है कि ईश्वर की कृपा पाने के लिए केवल पवित्र मन और सच्चा विश्वास चाहिए.

---विज्ञापन---

इस साल की तिथि

साल 2026 में शबरी जयंती 8 फरवरी, रविवार को मनाई जाएगी. सप्तमी तिथि तड़के 02:54 बजे शुरू होकर अगले दिन सुबह 05:01 बजे समाप्त होगी. इसलिए पूरे उत्सव और पूजा की मुख्य तैयारियां 8 फरवरी को ही की जाएंगी. इस दिन भक्त माता शबरी और प्रभु राम की संयुक्त पूजा करेंगे.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें: Gemstone Wearing Rules: माणिक, हीरा, नीलम हो या पुखराज, रत्न पहनने के बाद भूल से भी न करें ये 5 काम, वरना…

पूजा के शुभ मुहूर्त

इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त 05:21 से 06:13 बजे तक विशेष फलदायी माना गया है. दोपहर का अभिजीत मुहूर्त 12:13 से 12:57 बजे तक है. वहीं, अमृत काल 14:26 से 15:10 बजे तक रहेगा. इन समयों में की गई पूजा और मंत्र जाप से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है.

पूजा विधि

शबरी जयंती पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए. घर के मंदिर में राम दरबार या माता शबरी की तस्वीर स्थापित करें. विशेष रूप से बेर का भोग लगाना चाहिए, क्योंकि यही माता शबरी की भक्ति का प्रतीक था. इसके साथ दीप, धूप और पुष्प अर्पित करें और रामायण के शबरी प्रसंग का पाठ करें. गरीबों और जरूरतमंदों को फल या अन्न दान करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है.

शबरी जयंती का संदेश

यह पर्व केवल धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि सामाजिक और आध्यात्मिक शिक्षा भी देता है. माता शबरी ने जाति और सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर प्रेम और सेवा का संदेश दिया. उनका जीवन हमें सिखाता है कि ईश्वर को केवल भाव और श्रद्धा की आवश्यकता होती है.

यह भी पढ़ें: Maha Shivaratri 2026 Date: शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में क्या अंतर है, जानें फरवरी में कब मनाए जाएंगे ये दोनों पर्व

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.


Topics:

---विज्ञापन---