Rath Yatra 2025: गुंडिचा मंदिर में महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा करेंगे आड़पा मंडप की रस्म, जानें क्यों है ये खास?

Rath Yatra 2025: रथयात्रा उत्सव का आज चौथा दिन है। महाप्रभु अब आड़पा मंडप की रस्में निभाएंगे। इन रस्मों के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्रा और बहन सुभद्रा को गुंडिचा मंदिर के अंदर ले जाया जाता है। आइए जानते हैं इस रस्म के बारे में विस्तार से।

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इस यात्रा की शुरुआत श्रीमंदिर के बड़ा दांड से होती है, जो सीधे श्री गुंडिचा मंदिर तक जाती है। गुंडिचा मंदिर भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर होता है। प्रभु अगले 7 दिनों तक यहां रुकते हैं। इस बीच आड़पा मंडप की रस्म निभाई जाती है। आइए जानते हैं इसके बारे में।

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क्या है आड़पा मंडप रस्म?

यह रस्म मौसी के घर जाने से पहले निभाई जाती है, जिसकी शुरुआत 29 जून को हो चुकी है। रविवार की शाम इसकी शुरुआत होती है। इस रस्म में प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को गुंडिचा मंदिर में ले जाया जाता है। इस अनुष्ठान को ‘अदापा मंडप बिजे’ के नाम से भी जाना जाता है। कथाओं के अनुसार, गुंडिचा मंदिर भगवान का जन्मस्थान होता है। इस साल यह रस्म सोमवार तक आगे बढ़ गई है क्योंकि रथों को दो दिनों तक खींचा गया था।

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विशेष मंडप में बैठते हैं महाप्रभु

इस रस्म के अनुसार, गुंडिचा मंदिर के गर्भगृह में एक विशेष मंच तैयार किया जाता है, जिसे आड़पा मंडप या जन्म बेदी कहा जाता है। देवी-देवताओं की मौसी के घर पर 7 दिनों तक रहने के लिए इस खास जगह को तैयार किया जाता है।

क्यों खास है यह रस्म?

आड़पा मंडप में इन भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहन के दर्शन करने से मोक्ष मिलता है और सौ जन्मों का पाप मिटता है। भगवान जगन्नाथ की हर दिन होने वाले अनुष्ठान जो श्रीमंदिर में होते हैं, वह सभी इस मंदिर में होते हैं जैसे की उनकी प्रति दिन 6 बार प्रसाद की रस्म और मंगल आरती। यहां भोग के लिए खासतौर पर आड़पा अबड़ा बनाया जाता है।

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कैसे होती है रस्में?

इस रस्म में सबसे पहले चक्रराज सुन्दर चक्र यानी सुदर्शन को मंदिर में ले जाया जाता है और उसी क्रम से तीनों भाई-बहन मंदिर में पाहंडी बिजे की धुनों के साथ ताहिया पर बिठाकर मंदिर के अंदर ले जाया जाता है। इस रस्म के बाद शाम को संध्या दर्शन होता है, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त मंदिर आते हैं। इस आरती में हिस्सा लेने से भी पुण्य मिलता है।

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कब समाप्त होगी रथयात्रा?

भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा 27 जून को शुरू हुई थी। 9 दिनों तक चलने वाले इस पर्व का आखिरी दिन 8 जुलाई को होगा। बाहुड़ा यात्रा 5 जुलाई को मनाई जाएगी, जिस दिन प्रभु मौसी का घर छोड़ वापस श्रीमंदिर की ओर बढ़ते हैं।

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लेखक के बारे में

Namrata Mohanty

Namrata Mohanty

नम्रता मोहंती (Namrata Mohanty) न्यूज24 में एक सक्रिय कंटेंट राइटर है. मैंने अपनी पत्रकारिता की शुरुआत जी न्यूज और एबीपी जैसे संस्थानों से इंटर्नशिप करते हुए की थी. आज मैं न्यूज24 के डिजीटल डेस्क पर कार्यरत हूं. मैंने यहां अपने कार्यकाल की शुरुआत अगस्त 2024 से की थी. बीते 1 साल में मैंने कई बीट्स पर काम किया है. हेल्थ बीट से शुरुआत करते हुए आज मैं यूटिलिटी और देश-विदेश की खबरों पर भी काम कर रही हूं. हेल्थ बीट से जुड़ी खबरों में मेरा विशेष ध्यान आयुर्वेद, घरेलू उपचार, लाइफस्टाइल हेल्थ टिप्स और आधुनिक चिकित्सा पर आधारित प्रामाणिक और विशेषज्ञ-प्रामाणित जानकारी लोगों तक साझा करना रहा है. रोजमर्रा की देश और दुनिया से जुड़ी खबरों पर भी सक्रिय रूप से काम कर रही हूं. यूटिलिटी में सब्सिडी, पेंशन और योजनाओं के बारे में बताना मेरी विशेषता है. पत्रकार और कंटेंट राइटर बनकर अपने शब्दों से लोगों को सही और सटीक जानकारी बताना है. मेरी स्कूल शिक्षा दिल्ली के जानकी देवी कन्या विद्याल्य से हुई है. इसके बाद मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई नोएडा के ISOMES मीडिया कॉलेज से की थी. आप मुझसे इन प्लेटफॉर्म्स पर जुड़ सकते हैं. @namrata0105_m Namrata Mohanty  @namratamohanty105 Namrata Mohanty
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