Pitrupaksh 2024: हिन्दू धर्म में पितृपक्ष का खास महत्व है। कहने को तो पितृपक्ष पितरों को समर्पित है लेकिन इसे भी देवपक्ष की तरह ही पवित्र माना गया है। अब सवाल ये उठता है की क्या देवताओं की तरह ही पितर भी मांस या मदिरा चढ़ाने से रुष्ट हो जाते हैं या फिर पितर शराब चढ़ाने से प्रसन्न हो जाते हैं। आइए जानते हैं कि हमारे धर्मग्रंथों में इसके बारे में क्या बताया गया है।
यहां पितरों को चढ़ाई जाती है शराब
बिहार के गया में हर वर्ष पितृपक्ष के दौरान मेला लगता है। इस मेले के दौरान देश भर के लोग अपने पितरों को मोक्ष प्रदान करने के उद्देश्य से यहां आते हैं और पितरों के नाम से श्राद्ध,तर्पण करते हैं। श्राद्ध,तर्पण करने के पश्चात् ये दान भी करते हैं। वैसे तो अधिकतर लोग अन्न,धन,गाय आदि दान करते है परन्तु कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो पितरों की मुक्ति के लिए शराब दान करते हैं। इन लोगों का मानना है की जीवित रहते हुए उनके पितरों को जो वस्तु सबसे अधिक प्रिय होती है वही वे दान करते हैं। ऐसे में जो पितर जीवित रहते अधिक मात्रा में शराब का सेवन करते हैं उनके परिवार के लोग गया में आकर शराब का दान करते हैं। लेकिन धर्मग्रंथों में शराब के दान को वर्जित बताया गया है।
धर्मग्रन्थ क्या कहता है ?
हिन्दू धर्मग्रंथों के अनुसार पितृपक्ष भी गणेश पूजा,नवरात्रि आदि की तरह ही पवित्र है। धर्मग्रंथों में पितरों को भी देव तुल्य ही माना गया है। गरुड़ पुराण कहता है की पितृपक्ष के दौरान मांस,मदिरा,प्याज,लहसुन इत्यादि जैसे तामसिक भोजन मनुष्यों को ग्रहण नहीं करना चाहिए। ऐसे में अगर कोई पितृपक्ष के दौरान अपने पूर्वजों को शराब या मांस चढ़ाता है तो पितर उससे नाखुश हो जाते हैं। पितर के नाखुश होने से घर में नकारात्मक शक्तियों का वास हो जाता है और घर से सुख समृद्धि भी दूर होने लगती है।
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गीता में भी भगवान श्री कृष्ण कहते हैं मनुष्य जैसा भोजन करता है उसका व्यवहार भी वैसा ही हो जाता है। श्री कृष्ण की मानें तो तामसिक भोजन करने से शरीर रोगी हो जाता है और मन भी दूषित हो जाता है।इसलिए अगर पितरों को तामसिक भोजन अर्पित किया जाये तो वह उन्हें मोक्ष प्रदान नहीं करता बल्कि कई कष्टों का कारण बन जाता है। मन के दूषित होने से बुद्धि भी भ्रष्ट हो जाती है। ऐसे में अगर किसी के पितर की बुद्धि नकारात्मक हो जाये तो वह अपने परिवारजनों को कष्ट ही पहुंचाते हैं।
ये चीजें अवश्य दान करें
पितृपक्ष में इन चीजों का दान करने से पितर जल्द ही प्रसन्न हो जाते हैं। पितृपक्ष के दौरान तिल के दान से संतान सुख की प्राप्ति होती है। अगर कोई दही का दान करता है तो उसके घर में हमेशा शांति बनी रहती है।इतना ही नहीं पितृपक्ष के दौरान गाय का घी दान करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है और पारिवारिक संकट भी दूर हो जाता है। साथ ही गुड़ के दान से पितरों के आत्मा को शांति मिलती है।
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