Janardan Mandir: पितृ पक्ष के दौरान पितरों को प्रसन्न करने के लिए श्राद्ध और पिंडदान करना बहुत ही जरूरी होता है. व्यक्ति की मृत्यु के बाद पिंडदान किया जाता है. हालांकि, देश में एक ऐसा अनोखा मंदिर है जहां लोग जीते जी अपना पिंडदान करते हैं. यह मंदिर बिहार के गया में है. यहां लोग अपना खुद का पिंडदान करते हैं. पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण मृत्यु के बाद परिवार के लोग करते हैं. ऐसे में खुद का पिंडदान करने को लेकर क्या मान्यता है आइये इसके बारे में जानते हैं.
जनार्दन मंदिर (गया, बिहार)
जनार्दन मंदिर बिहार के गया में स्थित है. यह मंदिर भस्मकूट पर्वत पर स्थित है. जनार्दन मंदिर भगवान विष्णु के जनार्दन स्वरूप को समर्पित है. यह मंदिर गया जंक्शन रेलवे स्टेशन से करीब 10 से 12 किलोमीटर की दूरी पर है. यहां जाने के लिए स्टेशन से बाहर निकलकर कैब, ऑटो या रिक्शा के जरिए आसानी से पहुंच सकते हैं. यह मंदिर गया जी में मौजूद मां मंगला गौरी मंदिर के पास है. यहां पर लोग जीवित रहते हुए खुद का पिंडदान करते हैं.
ये भी पढ़ें – बद्रीनाथ धाम यात्रा का पिछला रिकॉर्ड टूटा, 18 लाख 67 हजार भक्तों ने किए दर्शन
गया में पिंडदान का महत्व
पितरों को प्रसन्न करने के लिए उनका तर्पण करने के लिए गया प्रसिद्ध धार्मिक तीर्थ है. यहां पर लोग दूर-दूर से पितरों का तर्पण करने और श्राद्ध करने के लिए आते हैं. पूर्वजों की आत्मा की शांति और पितरों को मोक्ष दिलाने के लिए गया में पवित्र धार्मिक अनुष्ठान किए जात हैं. पूर्वजों का पिंडदान और श्राद्ध करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है. पितृ पक्ष के दौरान यहां पर खूब भीड़ लगती है. गया में सबसे अनोखी चीज है कि, यहां के जनार्दन मंदिर में अपना जीते जी पिंडदान करते हैं.
क्यों करते हैं खुद का पिंडदान?
हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, व्यक्ति की मृत्यु के बाद उनके परिवार के लोग दिवंगत आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए श्राद्ध और पिंडदान करते हैं. ऐसा माना जाता है कि, पिंडदान के बिना मृत व्यक्ति की आत्मा पृथ्वी लोक पर भटकती रहती है. जिन लोगों का कोई सगा संबंधी नहीं होता है. वह लोग गया में जनार्दन मंदिर में खुद का पिंडदान करते हैं.
लोग अपने जीवित रहते हुए यहां पिंडदान करते हैं. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यहां पर भगवान विष्णु जनार्दन रूप में विराजमान हैं. भगवान मनुष्य का पिंडदान स्वीकार करते हैं. इसके अलावा संन्यास लेने वाले लोग अपने संन्यासी जीवन की शुरुआत से पहले यहां पिंडदान करते हैं. यह मंदिर पिंडदान और आत्म श्राद्ध के लिए प्रसिद्ध है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
संबंधित खबरें
बैंक-बैलेंस बढ़ाने के लिए करें शंख वाला उपाय, यहां जानिए
2 hrs agoकरवा चौथ पर चांद की ही पूजा क्यों होती है, सूरज की क्यों नहीं? जानें
6 hrs agoसुखी जीवन के लिए राशि अनुसार करें ये उपाय, पंडित सुरेश पांडेय से जानिए
6 hrs agoगृह क्लेश को दूर करने के लिए उपाय, जीवन की मुश्किलें होंगी आसान
8 hrs agoआज से कार्तिक माह का शुभारंभ, यहां जानिए इस महीने का महत्व और नियम
11 hrs agoपैसों की किल्लत को दूर करेंगे ये खास उपाय, खुशियों से भरेगा जीवन
1 day agoइन उपायों से दूर होगी दरिद्रता, मां लक्ष्मी की कृपा से मिलेगी सुख-समृद्धि
1 day agoक्या करवा चौथ व्रत पर रहेगा पर भद्रा का साया? जानिए पूजा मुहूर्त
1 day agoघर की नकारात्मकता को दूर करेंगे ये वास्तु उपाय, जानें जरूरी टिप्स
1 day agoकब है देव उठनी एकादशी व्रत? इस दिन योग निद्रा से जागेंगे भगवान विष्णु
1 day agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines