देश का अनोखा मंदिर जहां जीते जी खुद का पिंडदान करते है लोग, जानिए क्या है धार्मिक मान्यता?

Pitru Paksha: देश में एक ऐसा अनोखा मंदिर है जहां लोग जीते जी अपना पिंडदान करते हैं. यह मंदिर बिहार के गया में है. आइये खुद का पिंडदान करने के पीछे की मान्यता के बारे में जानते हैं.

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जनार्दन मंदिर (गया, बिहार) CREDIT: AI/SOCIAL MEDIA

Janardan Mandir: पितृ पक्ष के दौरान पितरों को प्रसन्न करने के लिए श्राद्ध और पिंडदान करना बहुत ही जरूरी होता है. व्यक्ति की मृत्यु के बाद पिंडदान किया जाता है. हालांकि, देश में एक ऐसा अनोखा मंदिर है जहां लोग जीते जी अपना पिंडदान करते हैं. यह मंदिर बिहार के गया में है. यहां लोग अपना खुद का पिंडदान करते हैं. पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण मृत्यु के बाद परिवार के लोग करते हैं. ऐसे में खुद का पिंडदान करने को लेकर क्या मान्यता है आइये इसके बारे में जानते हैं.

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जनार्दन मंदिर (गया, बिहार)

जनार्दन मंदिर बिहार के गया में स्थित है. यह मंदिर भस्मकूट पर्वत पर स्थित है. जनार्दन मंदिर भगवान विष्णु के जनार्दन स्वरूप को समर्पित है. यह मंदिर गया जंक्शन रेलवे स्टेशन से करीब 10 से 12 किलोमीटर की दूरी पर है. यहां जाने के लिए स्टेशन से बाहर निकलकर कैब, ऑटो या रिक्शा के जरिए आसानी से पहुंच सकते हैं. यह मंदिर गया जी में मौजूद मां मंगला गौरी मंदिर के पास है. यहां पर लोग जीवित रहते हुए खुद का पिंडदान करते हैं.

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गया में पिंडदान का महत्व

पितरों को प्रसन्न करने के लिए उनका तर्पण करने के लिए गया प्रसिद्ध धार्मिक तीर्थ है. यहां पर लोग दूर-दूर से पितरों का तर्पण करने और श्राद्ध करने के लिए आते हैं. पूर्वजों की आत्मा की शांति और पितरों को मोक्ष दिलाने के लिए गया में पवित्र धार्मिक अनुष्ठान किए जात हैं. पूर्वजों का पिंडदान और श्राद्ध करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है. पितृ पक्ष के दौरान यहां पर खूब भीड़ लगती है. गया में सबसे अनोखी चीज है कि, यहां के जनार्दन मंदिर में अपना जीते जी पिंडदान करते हैं.

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क्यों करते हैं खुद का पिंडदान?

हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, व्यक्ति की मृत्यु के बाद उनके परिवार के लोग दिवंगत आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए श्राद्ध और पिंडदान करते हैं. ऐसा माना जाता है कि, पिंडदान के बिना मृत व्यक्ति की आत्मा पृथ्वी लोक पर भटकती रहती है. जिन लोगों का कोई सगा संबंधी नहीं होता है. वह लोग गया में जनार्दन मंदिर में खुद का पिंडदान करते हैं.

लोग अपने जीवित रहते हुए यहां पिंडदान करते हैं. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यहां पर भगवान विष्णु जनार्दन रूप में विराजमान हैं. भगवान मनुष्य का पिंडदान स्वीकार करते हैं. इसके अलावा संन्यास लेने वाले लोग अपने संन्यासी जीवन की शुरुआत से पहले यहां पिंडदान करते हैं. यह मंदिर पिंडदान और आत्म श्राद्ध के लिए प्रसिद्ध है.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Aman Maheshwari

Aman Maheshwari

अमन माहेश्वरी न्यूज 24 में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वह खबरों को समझकर पाठकों तक आसान शब्दों में पहुंचाने का काम बखूबी करते हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के डॉ भीमराव अंबेडकर कॉलेज से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन (BJMC) किया है. इसके बाद उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन (MJMC) किया. पढ़ाई पूरी करने के बाद डिजिटल मीडिया में अपने करियर की शुरुआत की. सबसे पहले जी मीडिया डीएनए हिंदी के साथ जुड़े. पिछले 5 साल से अमन डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं. डीएनए हिंदी में बतौर ट्रेनी जर्नलिस्ट ज्वाइन किया. इसके बाद सब एडिटर के पद पर काम किया. वर्तमान में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अमन ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण और प्रयागराज में महाकुंभ मेले के दौरान धार्मिक खबरों को बखूबी कवर किया. धर्म और ज्योतिष - अमन धर्म-ज्योतिष सेक्शन के लिए लिखने के दौरान अंक ज्योतिष, वास्तु, ग्रह गोचर, व्रत-त्योहार से जुड़े विषयों पर लेख तैयार करते हैं. देवी-देवता और उनसे जुड़ी पौराणिक कथाओं, मंदिर, तीर्थ, धार्मिक स्थल और धार्मिक परंपराएं से जुड़े लेख लिखते हैं. इसके साथ ही धार्मिक यात्राओं से जुड़े उपयोगी लेख अमन तैयार करते हैं. Email - aman@bagconvergence.in X Account - MrAman0501
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