Pitru Paksh 2024: हिन्दू धर्म में पितृपक्ष के दौरान लोग अपने पूर्वजों के नाम से श्राद्ध,तर्पण और दान पुण्य करते हैं। इस दौरान लोग मनुष्यों के साथ साथ पशु-पक्षियों और जानवरों को भी भोजन कराते हैं। ऐसा माना जाता है कि पितृपक्ष के दौरान पितर किसी न किसी रूप में धरतीलोक पर मौजूद होते हैं। ऐसे में अब यहां सवाल ये उठता है कि लोगों द्वारा पितरों को जो भोजन कराया जाता है वह उन तक पहुंचता भी है या नहीं। अगर पहुंचता है तो पितरों तक भोजन कौन पहुंचाता है ?आइये इस लेख के माध्यम से जानते हैं।
पितर कैसे भोजन ग्रहण करते हैं ?
आपने कई लोगों को पितृपक्ष या श्राद्धपक्ष के दौरान कौवों को भोजन कराते देखा होगा। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कर्मकांड के जानकारों का मानना है कि श्राद्ध के दिन या पितृपक्ष के दौरान पितर स्वंय कौवे के रूप में आपके द्वारा दिया गया भोजन ग्रहण करते हैं। पितृपक्ष के दौरान यदि अंगूठे के माध्यम से पितरों को जल या अन्न अर्पित किया जाता है तो पितर इसे सीधा ग्रहण कर लेते हैं।
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कौन हैं वो दो दिव्य पुरुष ?
श्राद्ध कर्म या पितृपक्ष के दौरान जब कोई पितर का नाम और गोत्र का उच्चारण कर अन्न-जल अर्पित करता है तो विश्वदेव और अग्निष्वात नाम के दो दिव्य पुरुष अदृश्य रूप में वहां आते हैं और अर्पित किया हुआ अन्न-जल सीधा पितर तक पहुंचा देते हैं। यदि पितर का जन्म किसी योनि में हो गया हो तो भी ये दोनों दिव्य पुरुष आपके द्वारा अर्पित किया हुआ अन्न-जल उन तक पहुंचा देते हैं। यदि आपके पितर दानव योनि में जन्म लेते हैं तो उन तक आपके द्वारा अर्पित किया हुआ अन्न-जल मांस रूप में,प्रेत योनि में जन्मे पितरों को भोजन रुधिर यानि खून के रूप में मिलता है। वहीं अगर किसी पितर का जन्म पशु के योनि में हो गया है तो उसे अन्न तृण यानि घास के रूप में प्राप्त होता है। जबकि देवयोनि में जन्मे पितरों को वह अन्न अमृत के रूप में प्राप्त होता है।
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अब आपके मन में सवाल उठ रहा होगा की हम पितर को जो भी अर्पित करते हैं वह तो जस का तस पड़ा रहता है। यदि पितर सच में ग्रहण करते तो अर्पित किया हुआ अन्न समाप्त हो जाना चाहिए था। तो आपको बता दूं कि पितरों का मनुष्य की तरह भौतिक शरीर नहीं होता। पितरों का शरीर सूक्ष्म शरीर कहलाता है। इसलिए पितर आपके द्वारा अर्पित किये हुए अन्न-जल का केवल सारतत्व यानि गंध और रस ही ग्रहण करते हैं।
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