Parliament Special Session: संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र की शुरुआत 16 अप्रैल 2026 को एक अलग ही संदेश के साथ हुई। सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऋग्वेद का एक श्लोक साझा कर माहौल को आध्यात्मिक और विचारशील बना दिया। यह सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि आधुनिक भारत में नारी शक्ति को केंद्र में रखने का संकेत भी माना जा रहा है।
पीएम मोदी ने साझा ये श्लोक
पीएम मोदी अपने एक्स (ट्विटर) हैंडल पर लिखते हैं:
आज से शुरू हो रही संसद की विशेष बैठक में हमारा देश नारी सशक्तिकरण के लिए ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। हमारी माताओं-बहनों का सम्मान राष्ट्र का सम्मान है और यही भावना लेकर हम इस दिशा में दृढ़ता से आगे बढ़ रहे हैं।
“व्युच्छन्ती हि रश्मिभिर्विश्वमाभासि रोचनम्।
ता त्वामुषर्वसूयवो गीर्भिः कण्वा अहूषत॥”
पीएम मोदी का वैदिक संदेश
प्रधानमंत्री ने जो श्लोक साझा किया, वह ऋग्वेद के प्रथम मंडल से लिया गया है। इसमें उषा, यानी सुबह की पहली रोशनी का वर्णन है। श्लोक में बताया गया है कि उषा अपनी किरणों से पूरे विश्व को प्रकाशमान करती है और अंधकार को दूर करती है। कण्व ऋषि इस दिव्य शक्ति की स्तुति करते हैं।
यह भी पढ़ें: Hindu Calendar: खरमास, मलमास, चातुर्मास और क्षयमास क्या हैं? जानें हिन्दू कैलेंडर के इन महीनों की खासियत
श्लोक का अर्थ
इस वैदिक पंक्ति का भाव साफ है। उषा सिर्फ प्रकृति का दृश्य नहीं, बल्कि जागरूकता और नई शुरुआत का प्रतीक है। जब रोशनी फैलती है, तब अज्ञान हटता है और विकास का रास्ता खुलता है। यही विचार आज के सामाजिक बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
नारी और ‘उषा’ का संबंध
प्रधानमंत्री ने इस श्लोक के जरिए महिलाओं को ‘उषा’ की तरह बताया है। जैसे सुबह की पहली किरण अंधेरे को खत्म करती है, वैसे ही महिलाओं की भागीदारी समाज में नई दिशा ला सकती है। यह तुलना प्रतीकात्मक होते हुए भी गहरा संदेश देती है कि नारी बदलाव की असली वाहक है।
परंपरा और आधुनिकता का मेल
वैदिक श्लोक का चयन केवल सांस्कृतिक नहीं, रणनीतिक भी है। यह दिखाता है कि भारत अपनी जड़ों से जुड़कर भविष्य की राजनीति गढ़ रहा है। हजारों साल पहले लिखे गए मंत्र आज भी प्रासंगिक हैं, खासकर जब बात समाज में बराबरी और सम्मान की हो।
एक व्यापक सामाजिक संकेत
इस संदेश का असर सिर्फ संसद तक सीमित नहीं है। यह समाज के हर वर्ग तक पहुंचता है। यह बताता है कि महिलाओं का सम्मान केवल एक विचार नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की शर्त है। शिक्षा, नेतृत्व और नीति निर्माण में उनकी भूमिका अब और मजबूत होने की ओर इशारा कर रही है।
यह भी पढ़ें: Human as God’s Vehicle: वो हिंदू देवता जिनकी सवारी है ‘इंसान’, मेहरबान हो गए तो पैसों से भर देते हैं झोली
संबंधित खबरें
नवरात्रि में कैसे करनी चाहिए पूजा? पंडित सुरेश पांडेय ने बताया सही तरीका
10 hrs agoनवरात्रि व्रत के दौरान इन नियमों का रखें ध्यान, वरना नहीं मिलेगा पूजा का फल
13 hrs agoकितने दिनों बाद उतारें कलावा? जानिए रक्षासूत्र से जुड़े हुए धार्मिक नियम
13 hrs agoनवरात्रि में नवार्ण मंत्र जाप से दूर होंगे दुख, पंडित सुरेश पांडेय से जानिए
14 hrs agoखाने से जुड़ी गलतियां ही नहीं, इन कारणों से भी टूट सकता है नवरात्रि का व्रत
15 hrs agoआज नवरात्रि के दूसरे दिन करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानिए विधि और मंत्र
19 hrs agoआज जरूर करें गणेश जी और नवग्रहों की स्थापना, यहां जानिए
1 day agoरसोई में मौजूद मसालों से जुड़े ज्योतिषीय उपाय, बन सकेंगे आपके काम
1 day agoसुख-समृद्धि के लिए धारण करें पीला पुखराज, दूर होगी पैसों की तंगी
1 day agoआज शारदीय नवरात्रि की शुरुआत, जानें जरूरी नियम, वरना अधूरी रह जाएगी पूजा
1 day agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines