Papankusha Ekadashi Kab Hai: विष्णु भगवान की पूजा-अर्चना के लिए एकादशी का दिन बेहद खास होता है. अब आश्विन माह की एकादशी का व्रत है. कल यानी बीते मंगलवार दशहरा मनाया गया था, ऐसे में आज एकादशी व्रत होना चाहिए था. हालांकि, तिथियों में फेरबदल के कारण इसको लेकर संशय बना हुआ है. एकादशी का व्रत आज या कल कब रखना उत्तम होगा. आइये इसके बारे में यहां जानते हैं.
कब है पापांकुशा एकादशी व्रत?
पापांकुशा एकादशी के लिए आश्विन माह शुक्ल पक्ष की एकादशी का आरंभ आज 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर हो रहा है. इस तिथि का समापन कल 22 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 47 मिनट पर होगा. ऐसे में आज दोपहर के बाद एकादशी तिथि लग रही है. जबकि, तिथि की मान्यता के लिए उदयातिथि को महत्व दिया जाता है. इस स्थिति में एकादशी व्रत कल यानी 22 अक्टूबर को करना उत्तम रहेगा.
पापांकुशा एकादशी व्रत का महत्व
पापांकुशा एकादशी व्रत करने से व्यक्ति के समस्त पापों का नाश होता है. यह व्रत करने और विष्णु भगवान की पूजा-अर्चना से जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है. इस एकादशी व्रत को पापों पर अंकुश लगाने वाला व्रत माना जाता है. इसी वजह से इसे पापांकुशा एकादशी कहते हैं. व्यक्ति को समस्त पापों को नष्ट कर मोक्ष की प्राप्ति के लिए पापांकुशा एकादशी व्रत करना चाहिए.
एकादशी व्रत से जुड़े नियम
एकादशी तिथि पर चावल खाने से परहेज करना चाहिए. इस दिन व्रत करने वाले व्यक्ति के साथ ही घर में सभी लोगों को सात्विक भोजन करना चाहिए. मास-मदिरा और नशे से दूर रहें. एकादशी तिथि पर तुलसी में जल चढ़ाने और तुलसी के पत्तों को स्पर्श करने से बचना चाहिए. ऐसा माना जाता है. कि एकादशी पर तुलसी का व्रत होता है. व्रत और पूजा के दौरान काले वस्त्र पहनने से बचना चाहिए. झूठ बोलने और विवाद करने से बचें. आप विधि विधान से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करें. एकादशी व्रत के अगले दिन सुबह व्रत का पारण करें. बता दें कि, पापांकुशा एकादशी व्रत का पारण 23 अक्टूबर को किया जाएगा. सुबह 5 बजकर 36 मिनट से लेकर 7 बजकर 54 मिनट के बीच व्रत का पारण कर सकते हैं.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.