महाभारत की कथा में द्रौपदी और पांचों पांडवों के संबंधों को लेकर कई लोक कथाएं सामने आती रही हैं. स्वयंवर के बाद मां कुंती के मुंह से निकले एक कथन को पूरा करने के कारण द्रौपदी को पांचों भाइयों की पत्नी बनना पड़ा, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार भी किया. यह माना जाता है कि द्रौपदी अपने पांचों पतियों में सबसे अधिक प्रेम और लगाव अर्जुन से रखती थीं. लेकिन अगर इस दृष्टिकोण को उलटकर देखा जाए कि किस पांडव ने द्रौपदी को सबसे निश्छल, असीम और समर्पित प्रेम दिया, तो इतिहास का रुख महान धनुर्धर अर्जुन की ओर नहीं, बल्कि गदाधारी भीम की तरफ मुड़ जाता है.
हमेशा द्रौपदी के लिए ढाल बने भीम
पूरी महाभारत में भीम ही एकमात्र ऐसे पांडव थे, जिन्होंने द्रौपदी के मान-सम्मान और उसकी खुशियों के लिए अपनी पूरी शक्ति झोंक दी. कुरुक्षेत्र के युद्ध की नींव वास्तव में उसी दिन पड़ गई थी जब जुए में युधिष्ठिर ने द्रौपदी को दांव पर लगा दिया था. जब भरी सभा में द्रौपदी का चीरहरण हो रहा था और अन्य पांडव धर्म और मर्यादा के बंधनों में बंधकर मूकदर्शक बने हुए थे, तब केवल भीम का क्रोध फूटा था. उन्होंने मर्यादा की सीमाएं लांघकर दुर्योधन और दुशासन के वध की प्रतिज्ञा ली, जिसे उन्होंने युद्धभूमि में पूरा भी किया.
यह भी पढ़ें: Numerology Forecast: 25 जून से इन 3 मूलांकों के लिए शुरू होगा इनकम बढ़ाने का दौर, केतु-बुध योग से तरक्की होगी तेज
अज्ञातवास के दौरान लिया द्रौपदी के अपमान का बदला
विराट नगर में अज्ञातवास के दौरान जब राजा विराट के साले कीचक ने द्रौपदी पर बुरी नजर डाली, तब द्रौपदी न्याय के लिए युधिष्ठिर और अर्जुन के पास गईं. लेकिन अज्ञातवास भंग होने के डर से युधिष्ठिर ने उन्हें धैर्य रखने और अपमान सहने की सलाह दी, जिससे द्रौपदी भीतर से टूट गईं. ऐसे संकट के समय में भी सिर्फ भीम ही उनके काम आए. उन्होंने द्रौपदी के आंसुओं का प्रतिशोध लेने के लिए रात के अंधेरे में कीचक को एकांत में बुलाकर उसका वध कर दिया.
द्रौपदी की इच्छा के लिए राक्षसों का किया सामना
भीम का प्रेम केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं था, बल्कि वो द्रौपदी की हर छोटी-बड़ी इच्छा को पूरा करने के लिए सदैव तत्पर रहते थे. वनवास के दौरान जब द्रौपदी ने दुर्लभ सौगंधिका पुष्प की इच्छा जाहिर की तो भीम ने गंधमादन पर्वत की अत्यंत दुर्गम और खतरनाक यात्रा तय की. इस मार्ग में उन्होंने यक्षों और राक्षसों का मुकाबला किया, फिर भी द्रौपदी की इच्छा को अधूरा नहीं रहने दिया.
यह भी पढ़ें: Trigrahi Yog: कर्क राशि के शक्तिशाली त्रिग्रही योग से ये 7 राशियां हो सकती हैं मालामाल
‘महाप्रस्थानिक पर्व’ है भीम के प्रेम का जिक्र
इस निस्वार्थ प्रेम की पराकाष्ठा महाभारत के अंतिम अध्याय ‘महाप्रस्थानिक पर्व’ में दिखाई देती है. जब पांचों पांडव द्रौपदी के साथ सशरीर स्वर्ग की ओर जा रहे थे, तब हिमालय की चढ़ाई के दौरान द्रौपदी सबसे पहले लड़खड़ाकर गिर पड़ीं. उस समय अर्जुन और बाकी भाई बिना रुके आगे बढ़ते रहे, लेकिन केवल भीम ही थे जो द्रौपदी के गिरने पर बुरी तरह विचलित और शोकाकुल हो गए. उन्होंने युधिष्ठिर से द्रौपदी के पतन का कारण पूछा, जो यह दर्शाता है कि जीवन के अंतिम क्षण तक द्रौपदी की चिंता केवल भीम को थी.
संबंधित खबरें
दिवाली पर ‘श्रीयंत्र’ की पूजा से मिलेगा मां लक्ष्मी का आशीर्वाद, यहां जानें
11 mins agoविदुर नीति के अनुसार, इन 4 जगहों पर पैसों की बर्बादी कर देगी कंगाल
1 hr agoधनतेरस पर सोना-चांदी खरीदने का पैसा नहीं, खरीदें ये 5 सस्ती चीजें
2 hrs agoओमान के तट पर जहाज हमले में भारतीय नाविक की मौत
19 hrs agoधनतेरस, दिवाली से लेकर भाई दूज तक की सही तारीख जानें, देखें लिस्ट
20 hrs ago5 नवंबर को है गोवत्स द्वादशी, जरूर करें गायों और बछड़ों की पूजा
22 hrs agoकष्टों से मुक्ति के लिए करें 'श्री सूक्त' का पाठ, मिलेगी सुख-समृद्धि
1 day agoछोटी दिवाली पर की जाती है हनुमान पूजा, जानिए क्या है धार्मिक कारण?
1 day agoकब है रमा एकादशी व्रत? जानिए सही तारीख और श्रीहरि विष्णु की पूजा विधि
1 day agoकहीं दीपोत्सव तो कहीं काली पूजा, जानिए इन 4 शहरों से जुड़ा दिवाली का इतिहास
1 day agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines