Magh Gupt Navratri 2026: माघ गुप्त नवरात्रि साल 2026 की 4 नवरात्रियों में से पहली नवरात्रि है. 19 जनवरी से आरंभ हुई इस नवरात्रि का आज तीसरा दिन है. आज के दिन दस महाविद्या के तीसरे रूप देवी त्रिपुर सुंदरी की अर्चना-उपासना की जाएगी. आइए जानते हैं, गुप्त नवरात्रि के तीसरे दिन का महत्व क्या है और आज पूजित होने वाली देवी मां त्रिपुर सुंदरी कौन हैं?
गुप्त नवरात्रि के तीसरे दिन का महत्व
गुप्त नवरात्रि के तीसरे दिन की पूजा करने से साधक को मन की शांति मिलती है. इससे भीतर से मजबूत बनने की शक्ति आती है और जीवन को समझने की समझ बढ़ती है. यह उपासना इंसान को यह सिखाती है कि भौतिक सुख-सुविधाओं का आनंद लेते हुए भी मन को शांत और संतुलित कैसे रखा जाए. सरल शब्दों में कहें तो, यह साधना जीवन को सहज, स्थिर और खुशहाल बनाने में सहायता करती है.
कौन हैं मां त्रिपुर सुंदरी?
मां त्रिपुर सुंदरी दस महाविद्याओं में तीसरी महाविद्या मानी जाती हैं. उन्हें मां षोडशी, ललिता और राजेश्वरी भी कहा जाता है. ऐसा माना जाता है कि वे तीनों लोकों में सबसे अधिक सुंदर और दिव्य हैं. वे सौंदर्य, दया और ऐश्वर्य की देवी हैं. उनकी पूजा करने से जीवन की परेशानियाँ धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं और सुख, शांति व समृद्धि प्राप्त होती है.
मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में मां त्रिपुर सुंदरी की गुप्त रूप से साधना करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम और मिठास बढ़ती है. साथ ही प्रेम संबंधों में सफलता मिलती है और व्यक्ति के व्यक्तित्व में आकर्षण आता है. इनकी उपासना जीवन को सुंदर, संतुलित और आनंदमय बनाने में मदद करती है.
महादेव शिव की नाभि कमल पर विराजमान हैं मां
तंत्र विद्या में मां त्रिपुर सुंदरी को सौंदर्य, शक्ति और सिद्धि की देवी माना गया हैं, जिनकी पूजा से भक्त को हर काम में सफलता मिलती है और मन को गहरा आनंद प्राप्त होता है. साधु-संत और तांत्रिक विशेष रूप से उनकी साधना करते हैं. आपको बता दें कि कई राजनेता भी उन्हें अपनी आराध्य देवी मानते हैं.
मां त्रिपुर सुंदरी शांत और सौम्य रूप में विराजमान रहती हैं. वे भगवान शिव की नाभि से निकले कमल पर बैठी हुई दिखाई देती हैं. उनके चार हाथ हैं, जिनमें वे पाश, अंकुश, धनुष और बाण धारण करती हैं. उनका यह स्वरूप शक्ति, संतुलन और दिव्यता का प्रतीक माना जाता है.
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इन मंत्रों से करें मां त्रिपुर सुंदरी की पूजा
बीज मंत्र
ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नमः.
यह मंत्र बुद्धि, शक्ति और समृद्धि का प्रतीक है, जो गृहस्थ लोगों के लिए बहुत लाभकारी माना गया है. इसके जाप करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और जीवन की रुकावटें दूर होती हैं.
षोडशी मंत्र सिद्ध मंत्र
ह्रीं क ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं स क ल ह्रीं.
यह मंत्र मां त्रिपुर सुंदरी के ललिता रूप को समर्पित है और यह अत्यंत शक्तिशाली और सिद्ध मंत्र माना गया है. इस मंत्र का जप करने से साधक को आत्मबल, आकर्षण और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है.’
मनोकामना पूर्ति मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं परापरे त्रिपुरे सर्वमीप्सितं साधय स्वाहा.
यह मंत्र मन की इच्छाओं को पूरा करने के लिए जपा जाता है. इससे प्रेम, सफलता, सुख और सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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