Magh Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्रि की साधना 'सात्विक' से अधिक 'तामसिक' और 'राजसिक' सिद्धियों के लिए जानी जाती है. माघ गुप्त नवरात्रि का सातवां दिन आध्यात्मिक साधकों के लिए अत्यंत रहस्यमयी और शक्तिशाली माना जाता है. इस दिन साधक अपने भीतर के भय, दरिद्रता और शत्रुओं का नाश करने के लिए माता धूमावती की शरण में जाता है. यह दिन उन लोगों के लिए विशेष है जो जीवन के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं और जिन्हें कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है. आइए जानते हैं, आज किस महाविद्या की साधना से धन और सफलता के द्वार खुलते हैं, उनकी साधना का मंत्र क्या है और उनका सिद्ध शक्तिपीठ कहां है?
आज होती है इनकी साधना
गुप्त नवरात्रि का सातवें दिन दसों महाविद्याओं में से सातवीं महाविद्या माता धूमावती की साधना की जाती है. जहां अन्य देवियां सौंदर्य और सृजन का प्रतीक हैं, वहीं माता धूमावती अभाव, वैराग्य और संकटों के नाश की अधिष्ठात्री देवी हैं. माता धूमावती को 'अलक्ष्मी' भी कहा जाता है, लेकिन वे दरिद्रता का नाश करने वाली देवी हैं. उनका स्वरूप एक वृद्ध महिला का है, जो कौवे पर सवार हैं और हाथ में सूप (छलनी) धारण किए हुए हैं. आइए जानते हैं, गुप्त नवरात्रि के इस विशेष दिन का महत्व, माता धूमावती की साधना और उनसे मिलने वाले लाभ.
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माता धूमावती की साधना से लाभ
धन द्वार खुलना: माता धूमावती जीवन से 'दरिद्रता' (अभाव) को सूप से फटक कर बाहर कर देती हैं, जिससे लक्ष्मी के आगमन का मार्ग प्रशस्त होता है.
सफलता की बाधाएं समाप्त: यदि आपके कार्यों में बार-बार रुकावटें आ रही हैं, तो उनकी साधना से राहु-केतु जैसे ग्रहों के अशुभ प्रभाव समाप्त होते हैं.
रोग और शोक का नाश: पुरानी बीमारियों और मानसिक अवसाद से मुक्ति के लिए धूमावती साधना अमोघ है.
माता धूमावती साधना के मंत्र
सफलता और धन के लिए विशेष मंत्र साधना गुप्त नवरात्रि के सातवें दिन माता की पूजा एकांत में करनी चाहिए. धन और सफलता की प्राप्ति के लिए यहां दिए गए मंत्रों का जप अत्यंत लाभकारी माना जाता है.
बीज मंत्र: 'धूं धूं धूमावती फट्'
विशेष सफलता मंत्र: 'ॐ धूं धूं धूमावत्यै ठ: ठ:'
साधना विधि: इस दिन सफेद वस्त्र धारण करें. माता को सफेद फूल और धुले हुए काले तिल अर्पित करें. यदि संभव हो तो इस दिन घर में लोबान या गूगल की धूनी दें, इससे नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है.
यहां है मां धूमावती का शक्तिपीठ
माता धूमावती का सबसे प्रमुख और जागृत शक्तिपीठ मध्य प्रदेश के दतिया में स्थित पीतांबरा पीठ परिसर में है. पूरे विश्व में माता धूमावती का यह एकमात्र प्रमुख मंदिर है जहाँ उनकी सार्वजनिक पूजा होती है. सत्ता और विजय: राजनीतिज्ञ और बड़े पदों पर आसीन लोग अपनी सत्ता की रक्षा और विरोधियों पर विजय पाने के लिए यहाँ गुप्त अनुष्ठान करवाते हैं. आपको बता दें कि आमतौर पर सुहागिन स्त्रियां माता धूमावती की मूर्ति का स्पर्श नहीं करतीं, वे दूर से ही दर्शन करती हैं. उन्हें 'विधवा स्वरूप' में पूजा जाता है, जो संसार के नश्वर होने का प्रतीक है.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.