Lalita Jayanti 2026: हर साल माघ महीने की पूर्णिमा के दिन ललिता जयंती मनाई जाती है. ऐसा माना जाता है कि इसी दिन मां ललिता का जन्म हुआ था. मां ललिता को त्रिपुर सुंदरी भी कहा जाता है. इसलिए यह दिन मां त्रिपुर सुंदरी के प्रकट होने यानी धरती पर आने की खुशी में मनाया जाता है. इस दिन भक्त मां ललिता की पूजा करते हैं और उनका आशीर्वाद मांगते हैं. आइए जानते हैं, 1 या 2 फरवरी, ललिता जयंती कब है, मां ललित कौन हैं, इनकी पूजा से क्या फल प्राप्त होते हैं?
कौन हैं मां ललिता?
हिन्दू धर्म में महाविद्याएं देवी के दस विशेष रूप होते हैं. मां ललिता को दस महाविद्याओं में तीसरा महाविद्या हैं. जो बहुत शुभ और कल्याण करने वाली देवी माना जाता है. मां ललिता को अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है. उन्हें त्रिपुरा सुंदरी, राजराजेश्वरी, षोडशी, ललिताम्बिका, कामक्षी और महादेवी भी कहा गया है. ये सभी नाम उनके अलग-अलग स्वरूप और गुणों को बताते हैं. लेकिन त्रिपुर सुंदरी नाम उनका सबसे प्रसिद्ध रूप और नाम है. इस नाम का मतलब है- तीनों लोकों, यानी स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल, में सबसे सुंदर और श्रेष्ठ देवी. इसलिए मां को पूरे संसार की सुंदरता और शक्ति का प्रतीक माना जाता है.
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1 या 2 फरवरी, ललिता जयंती कब है?
माघ पूर्णिमा की तिथि 1 फ़रवरी 2026 को सुबह 5:52 बजे शुरू होगी और 2 फ़रवरी 2026 को सुबह 3:38 बजे समाप्त होगी. उदयातिथि के नियम के अनुसार जिस दिन सूर्योदय के समय तिथि होती है, उसी दिन त्योहार मनाया जाता है. इसलिए ललिता जयंती रविवार, 1 फ़रवरी 2026 को मनाई जाएगी. इसी दिन माघ पूर्णिमा का पवित्र स्नान भी किया जाएगा और साथ ही गुरु रविदास जयंती भी मनाई जाएगी. यानी यह दिन धार्मिक दृष्टि से बहुत खास रहेगा.
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मां ललिता की पूजा का फल
ललिता सहस्रनाम में बताया गया है कि मां ललिता ने असुर भांडासुर का नाश करने और सृष्टि को फिर से व्यवस्थित करने के लिए अवतार लिया था. मां ललिता त्रिपुरा सुंदरी की कृपा पाने के लिए इस दिन विशेष पूजा-अनुष्ठान, श्री यंत्र की पूजा और ललिता सहस्रनाम का पाठ करना बहुत शुभ माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि मां ललिता अपने भक्तों की भक्ति और साधना से प्रसन्न होकर उन्हें सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं और उनके जीवन को सही मार्ग पर ले जाती हैं.
सुख-समृद्धि के लिए करें ये उपाय
कल सुबह स्नान के बाद माता ललिता को लाल फूल और कुंकुम अर्पित करें. माता के सामने घी का दीपक जलाकर 'श्री सूक्त' का पाठ करें या सुनें. इसके बाद "ॐ श्री ललिताम्बिकायै नमः" मंत्र का 108 बार जाप करें. माता ललिता सौभाग्य की देवी हैं. पूजा के बाद जो कुंकुम चढ़ाया है, उसका थोड़ा-सा तिलक रोज अपने माथे पर लगाएं. ऐसा माना जाता है कि इससे व्यक्ति के व्यक्तित्व में आकर्षण बढ़ता है और कामकाज में आने वाली रुकावटें धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.