'सूर्य, चंद्रमा, गुरु, बुध, मंगल, शुक्र, शनि, राहु और केतु' ये 9 ग्रह हैं, जिन्हें नवग्रह कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि जन्म कुंडली में ग्रहों की स्थिति को देखकर ही भविष्यवाणी की जाती है। यदि कुंडली में ग्रह सही स्थान पर विराजमान नहीं होते हैं तो उसका नकारात्मक प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर पड़ता है। हालांकि कुछ उपायों को करके नवग्रहों को प्रसन्न किया जा सकता है। आज के कालचक्र में पंडित सुरेश पांडेय आपको नवग्रहों के महत्व और उन्हें प्रसन्न करने के अचूक उपायों के बारे में विस्तार से बताएंगे।
सूर्य ग्रह
सूर्य ग्रह के आराध्य देव भगवान विष्णु हैं।
ये एक ऐसा ग्रह है जो रोग के प्रभाव को कम करता है और अच्छी सेहत देता है।
सूर्य के कारण ही दवाएं शरीर पर सकारात्मक प्रभाव डालती हैं।
सूर्य जन्म का कारक है। इसलिए इसे परिवार की वृद्धि करने वाला देवता भी माना जाता है।
जिन लोगों को किसी भी कारण से संतान सुख नहीं मिल रहा है, उन्हें सूर्य की उपासना जरूर करनी चाहिए।
सूर्य के वैदिक मंत्र का 10 बार जाप करने से आत्मविश्वास बढ़ता है। साथ ही नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है।
सूर्य गायत्री मंत्र का नियमित जाप करना भी फायदेमंद माना जाता है।
आदित्य हृदय स्तोत्र का नियमित 40 दिनों तक पाठ करने से लाभ होता है।
सूर्य को बल देने के लिए पांचमुखी रुद्राक्ष धारण करना शुभ माना जाता है।
जो लोग 12 मुखी रुद्राक्ष धारण करते हैं, उन्हें धन, ज्ञान और भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है।
सेहत ठीक नहीं रहती है तो ऐसे में तीनमुखी या छहमुखी रुद्राक्ष धारण कर सकते हैं।
सूर्य को बल देने के लिए शिव जी की उपासना कर सकते हैं। साथ ही 11 या 21 रविवार गणेश जी को लाल फूल अर्पित करें।
रोजाना 12 ज्योतिर्लिंग के नाम का उच्चारण करने से भी सूर्य को बल मिलता है।