Kaalchakra: नवरात्रि में सच्चे मन से करें मां दुर्गा की आरती, पंडित सुरेश पांडेय से जानें नियम
Kaalchakra Today: आज के कालचक्र में नवरात्रि पर्व के दौरान मां दुर्गा की आरती करने के महत्व और सही विधि के बारे में जानेंगे. आइये इसके बारे में प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ पंडित सुरेश पांडेय से जानते हैं.
मां दुर्गा को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए नवरात्रि में रोजाना आरती करें. (Photo Credit - AI)
Kaalchakra Today 17 October 2026: आज 17 अक्टूबर 2026 को आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि है. आज सप्तमी तिथि का व्रत रखा जाएगा. आज नवरात्रि का सातवां दिन है. नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा का विधान है. इसके साथ ही आज सरस्वती पूजा और तुला संक्रांति है. आज सूर्य तुला राशि में गोचर करेंगे. आज आडल योग और विडाल योग बन रहा है. अतिगण्ड योग और सुकर्मा योग रहेगा.
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आज के कालचक्र में शारदीय नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की पूजा के साथ ही आरती करने के महत्व के बारे में जानेंगे. शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा की आरती विधि-विधान से करने से भक्तों को आशीर्वाद मिलेगा. आज तैतिल, गर और वणिज करण रहने वाला है. आज कालचक्र में प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ पंडित सुरेश पांडेय से आरती करने के नियमों के बारे में जान सकते हैं. नियमों के साथ पूजा-आरती करने से जीवन में चल रही मुश्किलों का अंत होगा.
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मां दुर्गा की आरती के नियम
मां दुर्गा की आरती करने से पहले देवी मां दुर्गा के मंत्रों से 3 बार पुष्पांजलि दें. घी या कपूर से विषम संख्या में बत्तियां जलाकर आरती करें. आप दीपक में रुई या कलावे की बाती बनारक डाल सकते हैं. कलावा इस्तेमाल करना शुभ माना जाता है. आरती के लिए गाय के शुद्ध देसी घी का इस्तेमाल करें. आपको पूजा आरती के दौरान लौंग और घी के साथ प्रज्वलित करना चाहिए. परिवार के हर सदस्य के मन पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है.
मां दुर्गा की आरती
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥ ॐ जय अम्बे गौरी..॥ मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को। उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥ ॐ जय अम्बे गौरी..॥ कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै। रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥ ॐ जय अम्बे गौरी..॥ केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी। सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥ ॐ जय अम्बे गौरी..॥
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कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती। कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती॥ ॐ जय अम्बे गौरी..॥ शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती। धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥ ॐ जय अम्बे गौरी..॥ चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे। मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥ ॐ जय अम्बे गौरी..॥ ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी। आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥ ॐ जय अम्बे गौरी..॥
चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों। बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू॥ ॐ जय अम्बे गौरी..॥ तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता, भक्तन की दुख हरता। सुख संपति करता॥ ॐ जय अम्बे गौरी..॥ भुजा चार अति शोभित, खडग खप्पर धारी। मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥ ॐ जय अम्बे गौरी..॥ कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती। श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती॥ ॐ जय अम्बे गौरी..॥ श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे। कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे॥ ॐ जय अम्बे गौरी..॥
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जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
आज के कालचक्र में आप मां दुर्गा की आरती और इससे जुड़े नियमों के बारे में यहां जान सकते हैं. इसके बारे में विस्तार से जानने के लिए आप ऊपर दिए गए कालचक्र के वीडियो को देखें.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.