हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन और नासिक के कुंभ मेले के बारे में तो पूरी दुनिया जानती है लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि दक्षिण भारत के केरल में भी कुंभ जैसा ही एक भव्य और प्राचीन धार्मिक आयोजन होता है. इसे ‘महामघ महोत्सवम’ कहा जाता है जिसे स्थानीय लोग और श्रद्धालु ‘केरल कुंभ’ के नाम से भी पहचानते हैं. साल 2026 में यह ऐतिहासिक आयोजन एक बार फिर पूरी भव्यता के साथ शुरू हो गया है जिसने केरल की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है. यह महोत्सव न केवल केरल का एक बड़ा धार्मिक आयोजन है बल्कि यह दक्षिण भारत की उस महान परंपरा को भी सामने लाता है जो कुंभ मेले की तरह ही अटूट आस्था और सनातन संस्कृति से गहराई से जुड़ी हुई है.
राज्यपाल ने किया ‘केरल कुंभ’ का उद्घाटन
केरल के मलप्पुरम जिले के तिरुनावाया में पवित्र भरतपुझा नदी के तट पर महामघ महोत्सवम 2026 का औपचारिक उद्घाटन 19 जनवरी 2026 को किया गया. इस ऐतिहासिक अवसर पर केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे जिन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की. उद्घाटन समारोह की शुरुआत पारंपरिक धर्म ध्वजरोहण के साथ हुई जिसे सभी धार्मिक अनुष्ठानों की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. इस शुभ अवसर पर महामघ सभा के सभापति महामंडलेश्वर स्वामी आनंदवनम भारती महाराज, मोहनजी फाउंडेशन के चेयरमैन ब्रह्मर्षि मोहनजी और जमोरिन परिवार के सदस्यों सहित कई प्रमुख संत और विद्वान मौजूद रहे. इन महानुभावों की उपस्थिति ने इस पूरे आयोजन को और भी दिव्य और गरिमामय बना दिया.
यह भी पढ़ें: Neem Karoli Baba: नीम करौली बाबा के 4 अनमोल संदेश, इनसे दूर होगी जिंदगी की उलझन और अंधकार के बादल
पवित्र स्नान से हुई शुरुआत
महोत्सव की मुख्य शुरुआत सुबह करीब 9 बजे नवमुकुंद मंदिर के स्नान घाट पर पहले पवित्र स्नान के साथ हुई. इस शाही स्नान का नेतृत्व महामंडलेश्वर स्वामी आनंदवनम भारती महाराज ने किया जिसके बाद हजारों श्रद्धालुओं ने नदी में डुबकी लगाई. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि महामघ काल के दौरान भरतपुझा नदी में स्नान करने से मनुष्य को आत्मिक शुद्धि मिलती है और महान पुण्य की प्राप्ति होती है. यही कारण है कि इस पावन अवसर का हिस्सा बनने के लिए देश के कोने-कोने से बड़ी संख्या में श्रद्धालु तिरुनावाया पहुंच रहे हैं. नदी के तट पर मंत्रोच्चार और भजनों की गूंज ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया है और प्रशासन ने भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं.
आयोजन का सांस्कृतिक महत्व
इस भव्य आयोजन के बीच एक विवादित खबर भी सामने आई जब तमिलनाडु सरकार द्वारा तिरुमूर्थिमलाई से शुरू हुई एक रथ यात्रा को बीच में ही रोक दिया गया. इस मुद्दे को लेकर महामंडलेश्वर स्वामी आनंदवनम भारती महाराज ने तिरुनावाया स्थित कार्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई ताकि स्थिति को स्पष्ट किया जा सके. तमाम चुनौतियों के बावजूद लोगों में इस केरल कुंभ को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है. महामघ महोत्सवम केवल एक मेला नहीं है बल्कि यह केरल की उस प्राचीन पहचान को जीवित रखने का जरिया है जो सदियों से चली आ रही है. यही वजह है कि अब सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से केरल कुंभ को लेकर लोगों की जिज्ञासा और दिलचस्पी लगातार बढ़ती जा रही है.
संबंधित खबरें
Video: पितृदोष से सावधान! परेशानियों से घिर जाएगा आपका खुशहाल जीवन, पंडित सुरेश पांडेय से जानिए
1 hr agoKaalchakra: पिंडदान करना क्यों माना जाता है महादान? पंडित सुरेश पांडेय से जानिए इसका महत्व
2 hrs agoPitru Paksha 2026: पितृ पक्ष के दौरान क्या सच में पृथ्वी पर आते हैं पूर्वज? जानिए दानवीर कर्ण से जुड़ी पौराणिक कथा
3 hrs agoSarva Pitru Amavasya 2026: कब है सर्वपितृ अमावस्या? जानिए सही तारीख और श्राद्ध कर्म के लिए शुभ मुहूर्त
4 hrs agoDurga Puja 2026: कब है दुर्गा पूजा 2026? नोट कर लें शुरुआत से लेकर विसर्जन तक की तारीख
6 hrs agoChanakya Niti: खुशहाल जीवन को मुश्किलों से भर सकते हैं 4 तरह के लोग, आचार्य चाणक्य के श्लोक से जानें
19 hrs agoSwapna Shastra: कैसा होता है सपने में पितरों का दिखना? जानिए उनके हंसने-रोने और खाना मांगने का मतलब
1 day agoVideo: पितृ पक्ष में जरूर करें तिल और कुशा का उपाय, पितरों के प्रसन्न होने से घर आएगी खुशहाली
1 day agoOctober Vrat Tyohar 2026: पितृ पक्ष, नवरात्रि, दशहरा और करवा चौथ समेत अक्टूबर में पड़ेंगे कई व्रत-त्योहार, देखें लिस्ट
2 days agoKaalchakra: पितृ पक्ष में क्यों जरूरी है पंचबलि? पंडित सुरेश पांडेय से जानिए श्राद्ध से जुड़ा नियम
2 days agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines