Clapping Hands Benefits: शादी, सगाई, जन्मदिन, पार्टी या किसी भी खुशी के मौके पर ताली बजाना आम बात है. ये खुशी प्रकट करने का एक सामाजिक तरीका है. वहीं, मंदिरों में ईश्वर के प्रति समर्पण दिखाने के लिए भजन-कीर्तन के दौरान ताली बजाई जाती है. कभी न कभी आपने ये तो जरूर सुना होगा कि ताली बजाने से सेहत पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, लेकिन क्या कभी आपने इसके धार्मिक महत्व के बारे में जानने का प्रयास किया है? जी हां, सही पढ़ा आपने.
ताली बजाने से सेहत ही नहीं भाग्य में भी सुधार होता है. आइए विस्तार से जानते हैं ताली बजाने के धार्मिक महत्व और लाभ के बारे में.
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हथेली में होता है देवी-देवताओं का वास
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति की हथेली के अग्र भाग (आगे वाले हिस्से) में धन की देवी मां लक्ष्मी, मध्य भाग (बीचों बीच) में मां सरस्वती और मूल भाग (कलाई के पास) में भगवान विष्णु और ब्रह्म देव का वास होता है, जबकि चारों उंगलियों के पोरु (सबसे ऊपर वाले हिस्से) में देवतीर्थ का वास होता है. इसके अलावा अनामिका उंगली यानी रिंग फिंगर में सूर्य देव का वास होता है. वहीं, तर्जनी उंगली (Index finger) और अंगूठे के बीच वाले स्थान को पितृतीर्थ कहा जाता है.
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धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब व्यक्ति ताली बजाता है तो उसे मां लक्ष्मी, मां सरस्वती, विष्णु जी, ब्रह्म देव और सूर्य देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है. साथ ही देवतीर्थ के दर्शन का फल मिलता है और पितृ दोष दूर होता है.
ताली बजाने के अन्य लाभ
- दिमाग तेज होता है.
- मानसिक शांति मिलती है.
- घबराहट और बेचैनी की समस्या नहीं होती.
- नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है.
- मन की एकाग्रता शक्ति बढ़ती है.
- शरीर के 7 चक्र जागृत होते हैं.
लगातार कितनी देर तक ताली बजानी चाहिए?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रातः काल में खड़े होकर रोजाना 10 से 15 मिनट तक ताली बजानी चाहिए. इस दौरान सकारात्मक चीजों के बारे में सोचें और खुलकर हंसने का प्रयास करें.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.