Guru Gobind Singh Quotes: आज है गुरु गोबिन्द सिंह जी की जयंती, जानें दशम गुरु के 10 अनमोल विचार!

Guru Gobind Singh Quotes: सिख धर्म के दसवें और अंतिम गुरु श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी की जयंती 6 जनवरी 2025 को मनाई जा रही है। वे भारत के इतिहास में शौर्य, साहस, ज्ञान, गरिमा और भक्ति के प्रतीक माने जाते हैं। आइए जानते हैं उनके 10 अनमोल विचार, जो किसी की भी जिंदगी बदल सकते हैं।

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Guru Gobind Singh Quotes: दशम सिख गुरु, गुरु गोबिन्द सिंह जी, भारत के इतिहास में शौर्य, साहस, ज्ञान, गरिमा और भक्ति के प्रतीक माने जाते हैं। नानकशाही कैलेंडर के अनुसार उनकी जयंती हर साल पौष माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर मनाई जाती है। इस बार ये तिथि 6 जनवरी 2025 को पड़ रही है। इस पावन दिन सिख धर्म के अनुयायी गुरुद्वारों में एकत्र होते हैं और गुरु जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी शिक्षाओं को याद करते हैं। प्रभातफेरियां निकाली जाती हैं, शबद-कीर्तन गए जाते हैं। लोग प्रार्थना करते हैं और गुरु के आशीर्वाद से जीवन में सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा लेते हैं।

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गुरु गोबिन्द सिंह जी ने अपना संपूर्ण जीवन मानवता की सेवा और सच्चाई के मार्ग पर चलते हुए व्यतीत किया। वे एक सफल नेतृत्वकर्ता थे। उन्होंने सिख समुदाय में एकता लाकर एक पंथ का रूप दिया। उनकी शिक्षाएं आज भी लाखों लोगों को प्रेरित करती हैं और हमें जीवन में साहस, सच्चाई और भक्ति का महत्व समझाती हैं। आइए जानते हैं, उनके 10 अनमोल विचार।

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गुरु गोबिन्द सिंह के 10 अनमोल विचार

1. अगर आप केवल भविष्य के बारे में सोचते रहेंगे, तो वर्तमान भी खो देंगे। जब आप अपने अंदर से अहंकार मिटा देंगे, तभी आपको वास्तविक शांति प्राप्त होगी।

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2. ईश्वर ने हमें जन्म दिया है ताकि हम संसार में अच्छे काम करें और बुराई को दूर करें। मैं उन लोगों को पसंद करता हूं, जो सच्चाई के मार्ग पर चलते हैं।

3. अच्छे कर्मों से ही आप ईश्वर को पा सकते हैं। ईश्वर अच्छे कर्म करने वालों की ही मदद करता है। इंसान से प्रेम ही ईश्वर की सच्ची भक्ति है।

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4. अपनी कमाई का दसवां हिस्सा दान करें। जितना संभव हो सके, जरूरतमंद लोगों की मदद करनी चाहिए।

5. जगत-जूठ तंबाकू बिखिया दी तियाग – गुरु गोबिन्द सिंह जी के इस वचन का मतलब है, हमेशा नशे और तंबाकू के सेवन से दूर रहें।

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6. किसी दि निंदा, अतै इर्खा नै करना – इस वचन का अर्थ है कि व्यक्ति को कभी भी किसी दूसरे की चुगली या निंदा नहीं करना चाहिए। किसी से भी ईर्ष्या करने के बजाए परिश्रम करना ज्यादा फायदेमंद होता है।

7. बचन करकै पालना – यदि आपने किसी को कोई वचन दिया है तो हर कीमत पर उस वचन को निभाना चाहिए। वादा कर के उसे तोड़ना नहीं चाहिए।

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8. सत्कर्म कर्म के द्वारा सच्चा गुरु प्राप्त होता है और गुरु के मार्गदर्शन से भगवान मिलते हैं। मनुष्य अनंत जीवन का एक भाग है इस जीवन का कोई अंत नहीं है। इसे अपने कर्मों से सुंदर बनाएं।

9. व्यक्ति को अपने काम में खूब मेहनत करनी चाहिए। काम को लेकर कभी भी कोताही नहीं बरतनी चाहिए।

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10. एक सुंदर जीवन के लिए आहार और व्यायाम ही काफी नहीं है, बल्कि गरीब और बेसहारा लोगों की सेवा भी जरूरी है।

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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लेखक के बारे में

Shyamnandan

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श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
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