Gupt Navratri 2026 5th Day: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में तृतीया और चतुर्थी तिथि एक होने से आज नवरात्रि का पांचवां दिन है. आज आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है. ऐसे में गुप्त नवरात्रि के पांचवें दिन देवी छिन्नमस्ता माता की पूजा की जाएगी. गुप्त नवरात्रि का पांचवां दिन मां छिन्नमस्ता की पूजा के लिए समर्पित होता है. बता दें कि, मां छिन्नमस्ता महाविद्या को भगवती त्रिपुर सुंदरी का रौद्र रूप माना जाता है. आइये मां छिन्नमस्ता की पूजा विधि और आरती के बारे में जानते हैं.
गुप्त नवरात्रि पंचमी तिथि शुभ मुहूर्त (Maa Chinnamasta Puja Muhurat)
ब्रह्म मुहूर्त – 04:13 ए एम से 04:54 ए एम
प्रातः सन्ध्या – 04:33 ए एम से 05:35 ए एम
अभिजित मुहूर्त – 12:00 पी एम से 12:55 पी एम
विजय मुहूर्त – 02:45 पी एम से 03:40 पी एम
सायाह्न सन्ध्या – 07:20 पी एम से 08:21 पी एम
निशिता मुहूर्त – 12:07 ए एम से 12:48 ए एम, 19 जुलाई
देवी छिन्नमस्ता माता पूजा विधि (Maa Chinnamasta Puja Vidhi)
गुप्त नवरात्रि का पांचवां दिन मां छिन्नमस्ता की पूजा के लिए समर्पित होता है. इन्हें छिन्नमस्तिका और प्रचण्ड चण्डिका के नाम से भी जानते हैं. यह मां त्रिपुर सुंदरी का रौद्र रुप मानी जाती है. मां छिन्नमस्ता दस महाविद्यायों में से पांचवीं देवी हैं. आप देवी छिन्नमस्ता की पूजा के लिए सुुबह उठने के बाद स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें. इसके बाद पूजा स्थान की सफाई कर मां छिन्नमस्ता की प्रतिमा स्थापित करें. इसके बाद देवी के समक्ष दीपक और धूप जलाएं. फूल, अक्षत, हल्दी, चंदन आदि अर्पित करें. देवी छिन्नमस्ता के मंत्रों का जाप करें और आरती कर भोग लगाकर पूजा संपन्न करें. माता को फल और मिठाई का भोग लगाएं.
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देवी छिन्नमस्ता पूजा मंत्र (Maa Chinnamasta Puja Mantra)
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं छिन्नमस्तायै नमः
ॐ वैरोचन्ये विद्महे छिन्नमस्तायै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात्
ॐ सिद्धिप्रदे वर्णनीये सर्वसिद्धिप्रदे डाकिनीये छिन्नमस्ते देवि
एहि एहि इमं बलिं ग्रह ग्रह मम सिद्धिं कुरु कुरु हूं हूं फट स्वाहा
मां छिन्नमस्ता की आरती (Maa Chinnamasta Aarti)
भैरवी भी भक्ति से दिनरात चरण पखारती
संग है विजया जया का रक्त धारा बह रही
लोक मंगल के लिए मां कष्ट भारी सह रही
सिर हथेली पर रख सदा रख भक्तगण को तारती
आइए हम छिन्नमस्ता की उतारें आरती
रक्त वसना सिर विखंडित हस्त दो तन श्याम है
छिन्नमस्ता नाम जिसका राजरप्पा धाम है
जो भवानी दुष्ट दैत्यों का सदा संहारती
आइए हम छिन्नमस्ता की उतारें आरती
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जो सती दुर्गा प्रचण्डा चण्डिका भुवनेश्वरी
सत्व रजतम रूपिणी जय अम्बिका अखिलेश्वरी
जो कराली कालिका हैं और कमला भारती
आइए हम छिन्नमस्ता की उतारें आरती
आइए मां की शरण में और माथा टेकिए
दीनता दारिद्र दुख को दूर वन में फेंकिए
भक्त के कल्याण में जननी कहां कब हारती
आइए हम छिन्नमस्ता की उतारें आरती
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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