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Dhundiraj Chaturthi Vrat Katha: ढुण्ढिराज चतुर्थी व्रत पर जरूर पढ़ें ये कथा, विघ्नहर्ता गणेश हर लेंगे सारे संकट

Dhundiraj Chaturthi 2026 Vrat Katha: प्रत्येक वर्ष फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को ढुण्ढिराज चतुर्थी का व्रत रखा जाता है, जो कि विघ्नहर्ता भगवान गणेश के ढुण्ढिराज रूप को समर्पित है. इस पावन दिन व्रत रखने के साथ-साथ ढुण्ढिराज गणेश की कथा सुनना व पढ़ना भी शुभ होता है, जिसके बारे में आप यहां जान सकते हैं.

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Credit- Social Media

Dhundiraj Chaturthi 2026 Vrat Katha (Raja Divodasa & Ganesh Ji Ki Kahani): भगवान गणेश को विघ्नहर्ता माना जाता है, जिनकी पूजा विभिन्न स्वरूपों में की जाती है. ढुण्ढिराज भी भगवान गणेश का एक रूप है, जिनकी पूजा फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि यानी ढुण्ढिराज चतुर्थी पर करनी शुभ होती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, ढुण्ढिराज चतुर्थी पर गणेश जी की पूजा और व्रत रखने से जीवन में आ रहे संकट कम होते हैं और खुशहाली का आशीर्वाद मिलता है. इसके अलावा सेहत, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जीवन खुशहाल रहता है.

इस बार 21 फरवरी 2026, वार शनिवार को ढुण्ढिराज चतुर्थी का व्रत रखा जा रहा है. चलिए अब जानते हैं ढुण्ढिराज चतुर्थी के व्रत की कथा और पूजा के शुभ मुहूर्त के बारे में.

ढुण्ढिराज चतुर्थी व्रत की कथा (Ganesh Ji Dhundiraj Chaturthi Vrat Katha in Hindi)

पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन काल में एक दिन भगवान शिव के मन में काशी को अपना निवास स्थान बनाने का ख्याल आया, जहां राजा दिवोदास के धर्मात्मा शासन का राज था. राजा दिवोदास बहुत दयालु और धर्मप्रिय थे, जिनके शासन में उनके राज्य में कोई कमी नहीं थी.

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ब्रह्मा जी से राजा दिवोदास को वरदान प्राप्त था कि जब तक उनके राज्य में सब कुछ सही रहेगा और किसी भी चीज की कमी नहीं होगी, तब तक कोई भी देवता वहां प्रवेश नहीं कर पाएगा. लेकिन शिव जी को वो जगह बहुत अच्छी लगी, इसलिए उन्होंने अपने पुत्र भगवान गणेश को काशी भेजा ताकि वो उस जगह के बारे में अच्छे से जान सकें.

काशी जाने से पहले गणेश जी ने एक ज्योतिषी का रूप धारण किया और अपना नाम ‘ढुण्ढि’ रखने का निश्चय किया. कुछ ही समय में उन्होंने काशीवासियों को अपनी बुद्धिमत्ता से प्रभावित कर दिया. इससे गणेशी जी की काशी में चर्चा होने लगी और राजा दिवोदास के शासन में कमी आने लगी. ऐसे में भगवान शिव को काशी में प्रवेश मिल गया और उन्होंने गणेश जी को ‘ढुंढिराज’ नाम से पुकारा. साथ ही कहा कि जो भी भक्त काशी आएगा, उसकी यात्रा ढुंढिराज गणेश की पूजा करने के बाद ही पूरी होगी.

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कहा जाता है कि जिस दिन शिव जी ने गणेश जी को ढुंढिराज का नाम दिया था, उस समय फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि थी. ऐसे में इस तिथि से ढुंढिराज चतुर्थी मनाने की परंपरा शुरू हो गई.

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ढुण्ढिराज चतुर्थी की पूजा का शुभ मुहूर्त

  • चतुर्थी मध्याह्न मुहूर्त- सुबह 11:27 से दोपहर 01 बजे
  • वर्जित चन्द्रदर्शन का समय- सुबह 08:56 से रात 10:16
  • ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 05:13 से सुबह 06:04
  • अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12:12 से दोपहर 12:58
  • सायाह्न सन्ध्या- शाम 06:15 से शाम 07:31

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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