हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: CJP ProtestGyanesh KumarSIRBigg Boss 20

रुके हुए काम कालभैरव की कृपा से होंगे पूरे, कल कालाष्टमी पर करें ये उपाय

Bhagwan Kalbhairav ​​Jayanti: हिन्दू धर्म में भगवान कालभैरव को महादेव का शिव का उग्र रूप माना गया है। हर महीने की कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को उनकी जयंती कालाष्टमी के रूप में मनाई जाती है। आषाढ़ माह 2024 का कालाष्टमी व्रत 28 जून रखा जाएगा। कहते हैं, इस दिन को विशेष उपाय करने से रुके और अटके हुए काम पूरे होते हैं।

विज्ञापन

Bhagwan Kalbhairav ​​Jayanti: हिन्दू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह की कृष्णपक्ष की अष्टमी को दो व्रत होते है, मासिक कृष्णाष्टमी और कालाष्टमी। जहां कृष्णाष्टमी भगवान वासुदेव कृष्ण की मासिक जयंती होती है, वहीं कालाष्टमी भी भगवान कालभैरव की जयंती और उनकी उपासना का विशेष दिन होता है। साल 2024 में आषाढ़ माह की कालाष्टमी 28 जून को पड़ रही है। आइए जानते हैं, भगवान कालभैरव और कालाष्टमी व्रत का क्या महत्व है, किन उपायों के करने से आपके रुके हुए काम बन सकते हैं और जीवन में सौभाग्य और समृद्धि में वृद्धि हो सकती है?

भगवान कालभैरव कौन हैं?

भगवान कालभैरव को हिन्दू धर्म में महादेव का शिव का उग्र रूप माना जाता है। कालचक्र के अनुसार वे सृष्टि विनाश और संहार करने के कारण कालभैरव कहलाते वहीं, सामान्य और कल्याणकारी रूप में वे भगवान भैरव के रूप में पूजित हैं। वे भक्तों की रक्षा और मोक्ष के दाता भी हैं। पौराणिक कथाओं में इनका चित्रण नगर स्वामी कोतवाल के रूप में हुआ है। कहते हैं, प्राचीन भारत में भारत के हर नगर में इनका मंदिर था। कहीं बाहर से नगर में आने के बाद प्रत्येक यात्री और व्यापारी सबसे पहले इनका आशीर्वाद लेकर ही अपना कोई काम शुरू करते थे। आज भी यह परंपरा काशी और उज्जैन में कायम है, जहां तीर्थयात्री सबसे पहले भगवान भैरव की पूजा के बाद भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग का दर्शन करते हैं, अन्यथा उनकी पूजा अधूरी मानी जाती है।

कालाष्टमी व्रत करने के लाभ

काशी में भगवान कालभैरव का एक रूप

विज्ञापन

कालाष्टमी व्रत के दिन भगवान कालभैरव की विशेष पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से मनुष्य के पापों का नाश होता है। कालभैरव की कृपा से मनोकामनाएं पूरी होती हैं, क्योंकि कालभैरव को इच्छा पूर्ति करने वाला देवता हैं। इनकी विधिवत पूजा करने से व्यक्ति को हर प्रकार के भय और शत्रुओं से मुक्ति मिलती है। अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और स्वास्थ्य लाभ होता है और रोगों से मुक्ति मिलती है। भगवान काल भैरव की कृपा से रुक हुए काम पूरे होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

कालाष्टमी पर करें ये उपाय

कुत्ते को तेल में चुपड़ी रोटी खिलाएं: कुत्ते को भगवान कालभैरव का वाहन माना गया है। कालाष्टमी व्रत के दिन कुत्ते को सरसों तेल से चुपड़ी हुई रोटी खिलाने से भगवान भैरव प्रसन्न होते हैं। आप उसे अन्य पकवान जैसे पकौड़े, पूरी आदि भी खिला सकते हैं। लेकिन याद रखें कि खाने की किसी भी वस्तु में लेशमात्र भी घी का उपयोग नहीं होना चाहिए।

विज्ञापन

भगवान कालभैरव को मदिरा चढ़ाएं: भगवान कालभैरव को मदिरा चढ़ाने की परंपरा काफी प्राचीन और बहुत प्रचलित है। इस व्रत के दिन भगवान कालभैरव के मंदिर में जाकर उनको मदिरा अर्पित करें। इससे आपके रुके हुए और अटके हुए काम बनने लगेंगे और शीघ्र ही शुभ समाचार प्राप्त होगा।

नींबू अर्पित करें: आषाढ़ माह का कालाष्टमी व्रत शुक्रवार को पड़ रहा है। इस दिन किसी भी भैरव मं‍दिर में भगवान कालभैरव को प्रसन्न करने के लिए चंदन की सुगंध वाली की 33 अगरबत्ती जलाएं और उन्हें 7 नींबू अर्पित करें। कहते हैं, इस उपाय से जीवन के सभी रोग और शोक समाप्त हो जाते हैं।

विज्ञापन

ये भी पढ़ें: हर सपना कुछ कहता है: सपने में ‘दौड़ते हुए घोड़े’ दिखें तो मिलते हैं ये 5 शुभ संकेत

ये भी पढ़ें: Shakun Shastra: कौआ देता है किस्मत चमकने ये 7 संकेत, जानें कैसे होते हैं ये और क्या हैं इनके अर्थ?

विज्ञापन

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है।News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी उपाय को करने से पहले संबंधित विषय के एक्सपर्ट से सलाह अवश्य लें।

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Shyamnandan

श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
... और पढ़ें

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola