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Basant Panchami 2026: ब्रह्मा जी से ज्यादा उनकी पत्नी मां सरस्वती की क्यों होती है पूजा? बसंत पंचमी पर जानें सृष्टि के रचयिता और ज्ञान की देवी से रोचक तथ्य

Basant Panchami 2026: मां सरस्वती की पूजा व मंदिर के बारे में तो आपने सुना ही होगा, लेकिन क्या आपने कभी उनके पति ब्रह्मा जी के मंदिरों व पूजन के बारे में सुना है? यदि नहीं, तो क्या आपने कभी इसके पीछे के कारण के बारे में जानने का प्रयास किया? चलिए जानते हैं इन सभी सवालों के जवाब.

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Credit- Meta AI

Basant Panchami 2026: देशभर में आज 23 जनवरी 2026 को माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को विद्या, वाणी और ज्ञान की देवी मां सरस्वती को समर्पित बसंत पंचमी का पर्व मनाया जा रहा है, जिसे ऋतुओं के परिवर्तन का प्रतीक भी माना जाता है. इस दिन से वसंत ऋतु की शुरुआत भी होती है. मां सरस्वती को सृष्टि के रचयिता ब्रह्मदेव की पत्नी भी माना जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ब्रह्मा जी से ज्यादा उनकी पत्नी मां सरस्वती की क्यों पूजा होती है? क्यों ब्रह्मा जी की पूजा के लिए कोई विशेष पर्व नहीं है? चलिए जानते हैं इन्हीं सभी रोचक सवालों के जवाब.

क्यों ब्रह्मा जी की नहीं होती है पूजा?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन काल में एक दिन ब्रह्मा जी राजस्थान के पुष्कर में यज्ञ कर रहे थे, जिसमें उनके साथ उनकी पत्नी का शामिल होना जरूरी था. लेकिन किसी कारण से ब्रह्मा जी की पत्नी देवी सावित्री सही समय पर यज्ञ में नहीं पहुंच पाई. ऐसे में ब्रह्मा जी ने एक ग्वालन से विवाह कर लिया और अपनी पत्नी के स्थान पर उसे बैठा दिया. देवी सावित्री को जब ये बात पता चली तो उन्हें बहुत गुस्सा आया और उन्होंने ब्रह्मा जी को श्राप दिया कि इस स्थान को छोड़कर पृथ्वी पर आपकी एक जगह पर भी पूजा नहीं होगी. इसी वजह से देशभर में भगवान ब्रह्मा का पुष्कर को छोड़कर कहीं पर भी कोई प्राचीन मंदिर नहीं है.

मां सरस्वती की उत्पत्ति कैसे हुई थी?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां सरस्वती की उत्पत्ति को लेकर अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं. एक कथा के मुताबिक, ब्रह्मांड की रचना के बाद ब्रह्मा जी को लगा कि सृष्टि में सब कुछ शांत व नीरस है, जिसके लिए उन्होंने ज्ञान, वाणी और संगीत की देवी मां सरस्वती को अपने कमंडल के जल से उत्पन्न किया. अन्य कथा कहती है कि मां सरस्वती की उत्पत्ति ब्रह्मा जी के मुख से हुई थी.

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मां सरस्वती का स्वरूप

मां सरस्वती की मुख्य रूप से चार भुजाएं हैं. उनके एक हाथ में वीणा, पुस्तक, अक्षमाला (मोतियों की माला) और कमंडल (पानी का पात्र) है. हालांकि, कुछ ग्रंथों में मां सरस्वती को 8 व 10 भुजाओं वाली देवी के रूप में भी दर्शाया गया है.

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मां सरस्वती की सवारी हंस का रहस्य

देवी सरस्वती की सवारी हंस है, जिसे पवित्रता, ज्ञान, प्रेम, विवेक, आध्यात्मिक उत्थान और सुंदरता का प्रतीक माना जाता है. हंस में सच और झूठ की सच्ची परख का गुण होता है, जो देवी सरस्वती के गुणों से मेल खाता है. ये भी एक कारण है कि देवी सरस्वती ने हंस को अपनी सवारी चुनी.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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