हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: CJP ProtestGyanesh KumarSIRBigg Boss 20

Amalaki Ekadashi 2026: आमलकी एकादशी पर क्यों करते हैं आंवले की पूजा, जानें महत्व और प्राप्त होने वाले लाभ

Amalaki Ekadashi 2026: आमलकी एकादशी फाल्गुन शुक्ल एकादशी तिथि को मनाते हैं और इस दिन भगवान विष्णु के साथ आंवले के वृक्ष और फल की पूजा करते हैं. आइए जानते हैं कि आमलकी एकादशी पर आंवले की पूजा क्यों की जाती है, इसका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व क्या है और इस व्रत से भक्तों को कौन से पुण्य फल प्राप्त होते हैं?

विज्ञापन

Amalaki Ekadashi 2026: फाल्गुन मास की शुक्ल एकादशी का दिन भक्तों के लिए खास महत्व रखता है. इस तिथि को आमलकी एकादशी के रूप में मनाया जाता है, जब भगवान विष्णु की उपासना के साथ आंवले के वृक्ष की भी विधि विधान से पूजा की जाती है. धार्मिक आस्था, पौराणिक मान्यताओं और आयुर्वेदिक गुणों का यह अनोखा संगम इस पर्व को और भी विशेष बना देता है. आइए जानते हैं, आंवले की पूजा क्यों की जाती है, इसका आध्यात्मिक महत्व क्या है और इस दिन व्रत रखने से कौन से पुण्य फल प्राप्त होते हैं?

आमलकी एकादशी 2026 कब है?

वर्ष 2026 में यह व्रत 27 फरवरी, शुक्रवार को रखा जाएगा. पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 26 फरवरी 2026 को रात 12:33 बजे से शुरू होगी. तिथि का समापन 27 फरवरी 2026 को रात 10:32 बजे होगा. व्रत का पारण 28 फरवरी को सुबह 06:47 से 09:06 बजे के बीच किया जाएगा.

आंवला क्यों है खास

धार्मिक मान्यता है कि आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु का वास होता है. Padma Purana में भी इसका उल्लेख मिलता है. मान्यता के अनुसार जड़ में विष्णु, तने में शिव और ऊपरी भाग में ब्रह्मा का निवास माना गया है. शास्त्रों में इसे आदि वृक्ष कहा गया है. कहा जाता है कि सृष्टि की रचना के समय इसकी उत्पत्ति हुई. इसी कारण यह वृक्ष सृजन और जीवन शक्ति का प्रतीक माना जाता है.

विज्ञापन

यह भी पढ़ें: Holika Dahan 2026: होलिका की अग्नि में गेहूं की हरी बालियां और चने की फलियां क्यों डालते हैं, जानें होली के रिवाज

व्रत और पूजा का महत्व

आमलकी एकादशी पर व्रत रखने से पापों का क्षय होता है. मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है. मान्यता है कि इस दिन का पुण्य हजार गौदान के बराबर माना गया है. आंवले के वृक्ष का दर्शन करने से एक गौदान का फल मिलता है. स्पर्श करने से दोगुना फल मिलता है. इसका फल खाने से तीन गुना पुण्य प्राप्त होता है. आंवले के जल से स्नान और दान करना भी अत्यंत शुभ माना गया है.

विज्ञापन

सेहत और श्रद्धा का संगम

आंवला आयुर्वेद में अमृत समान माना गया है. यह विटामिन सी से भरपूर होता है. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है. बदलते मौसम में इसका सेवन शरीर को मजबूती देता है. धार्मिक दृष्टि से यह पवित्रता का प्रतीक है. कई लोग इस दिन आंवले का वृक्ष लगाते भी हैं. इससे पर्यावरण संरक्षण का संदेश मिलता है.

ऐसे करें सरल पूजा

सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें. भगवान विष्णु की पूजा करें. आंवले के वृक्ष पर जल चढ़ाएं. दीपक जलाएं. परिक्रमा करें. फल और प्रसाद बांटें. यह पर्व भक्ति, प्रकृति और स्वास्थ्य का अनोखा मेल है. हर वर्ष श्रद्धालु इस दिन पूजा कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं.

विज्ञापन

यह भी पढ़ें: Shiani Rashi Parivartan: मीन से मेष में गोचर कर नीच के हो जाएंगे शनि, ढाई साल तक इन राशियों का हाल रहेगा बेहाल

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

विज्ञापन

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Shyamnandan

श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
... और पढ़ें

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola