Akshaya Tritiya 2026 Today: हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया और परशुराम जयंती का पर्व मनाया जाता है. आज 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया और परशुराम जयंती मनाई जा रही है. बता दें कि, अक्षय तृतीया के लिए तृतीया तिथि का आरंभ 19 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 49 मिनट पर होगा. जिसका समापन अगले दिन सुबह 7 बजकर 27 पर होगा. यह दिन गोल्ड खरीने, मां लक्ष्मी की पूजा और भगवान परशुराम की पूजा के लिए बहुत ही खास है. आज अक्षय तृतीया के दिन शुभ मुहूर्त क्या रहेगा चलिए इसके बारे में जानते हैं.
अक्षय तृतीया शुभ मुहूर्त
सूर्योदय – सुबह 05 बजकर 52 मिनट
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह में 04:23 से 05:08
प्रातः सन्ध्या- सुबह में 04:45 से 05:52
अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:55 से दोपहर 12:46
विजय मुहूर्त- दोपहर में 02:30 से 03:22
गोधूलि मुहूर्त- शाम में 06:48 से 07:10
सायाह्न सन्ध्या- शाम में 06:49 से 07:55
अमृत काल – रात में 02:26 से 03:52, 20 अप्रैल
निशिता मुहूर्त- रात 11:58 से 12:42, 20 अप्रैल
अक्षय तृतीया पूजा विधि (Akshaya Tritiya Puja Vidhi)
अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर सुबह उठकर स्नान कर साफ कपड़े पहन लें. संभव हो तो लाल या पीले वस्त्र पहनें. घर के मंदिर की सफाई कर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें. रोली, चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और फल-फूल अर्पित करें. अक्षय तृतीया पर पूजा मंत्रों का जाप करें और भोग लगाएं. पूजा संपन्न करने के बाद प्रसाद ग्रहण करें.
परशुराम जयंती पूजा विधि (Parshuram Jayanti Puja Vidhi)
परशुराम जयंती पर भगवान परशुराम की पूजा का महत्व होता है. आप सुबह स्नान आदि कर साफ वस्त्र पहन लें. व्रत का संकल्प लें. पूजा स्थान की सफाई कर भगवान परशुराम की प्रतिमा स्थापित करें. तस्वीर पर फूल माला चढ़ाएं और तिलक करें. भगवान के समक्ष शुद्ध घी का दीपक जलाएं. भगवान को फल और फूल अर्पित करें. मिठाई का भोग लगाएं और आरती कर पूजा संपन्न करें.
भगवान परशुराम जी की आरती (Parshuram Ji Ki Aarti)
शौर्य तेज बल-बुद्धि धाम की॥
रेणुकासुत जमदग्नि के नंदन।
कौशलेश पूजित भृगु चंदन॥
अज अनंत प्रभु पूर्णकाम की।
आरती कीजे श्री परशुराम की॥
नारायण अवतार सुहावन।
प्रगट भए महि भार उतारन॥
क्रोध कुंज भव भय विराम की।
आरती कीजे श्री परशुराम की॥
परशु चाप शर कर में राजे।
ब्रह्मसूत्र गल माल विराजे॥
मंगलमय शुभ छबि ललाम की।
आरती कीजे श्री परशुराम की॥
जननी प्रिय पितृ आज्ञाकारी।
दुष्ट दलन संतन हितकारी॥
ज्ञान पुंज जग कृत प्रणाम की।
आरती कीजे श्री परशुराम की॥
परशुराम वल्लभ यश गावे।
श्रद्घायुत प्रभु पद शिर नावे॥
छहहिं चरण रति अष्ट याम की।
आरती कीजे श्री परशुराम की॥
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.