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Dattatreya Bhagwan Ki Aarti: दत्तात्रेय भगवान की आरती से त्रिदेवों ब्रह्मा, विष्णु और महेश की पूजा का मिलेगा फल । Dattatreya Bhagwan Aarti Lyrics in Hindi

Dattatreya Bhagwan Aarti Lyrics: भगवान दत्तात्रेय त्रिदेवों यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश का एक स्वरूप है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दत्तात्रेय भगवान की पूजा से भक्तों को तीनों देवों की पूजा का फल मिलता है. आपको भगवान दत्तात्रेय को प्रसन्न करने के लिए पूजा-अर्चना और आरती करनी चाहिए.

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Dattatreya Bhagwan Aarti Lyrics in Hindi: भगवान दत्तात्रेय को ऋषि अत्रि और अनुसूया का पुत्र माना जाता है. ब्रह्मा, विष्णु और शिव के एकीकृत स्वरूप के रूप में पूजा जाता है. भगवान दत्तात्रेय की पूजा से तीनों देवों की पूजा का शुभ फल प्राप्त होता है. आपको भगवान दत्तात्रेय की पूजा के साथ ही आरती अवश्य करनी चाहिए. इससे भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. आइये आपको भगवान दत्तात्रेय के स्वरूप, पूजा विधि और मंत्र के बारे बताते हैं.

दत्तात्रेय भगवान का स्वरूप (Dattatreya Bhagwan Swaroop)

भगवान दत्तात्रेय का स्वरूप 3 मुख और 6 मुख वाला है. भगवान दत्तात्रेय के तीन सिर ब्रह्मा, विष्णु और महेश प्रतीक हैं. भगवान के चारों तरफ चार कुत्ते हैं जो चारों वेदों का प्रतीक हैं. भगवान के पीछे गाय और कल्पवृक्ष है. भगवान दत्तात्रेय के हाथों में माला, शंख, चक्र, त्रिशूल, डमरू और एक कलश है.

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दत्तात्रेय भगवान की पूजा विधि (Dattatreya Bhagwan Puja Vidhi)

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दत्तात्रेय भगवान की पूजा के लिए सुबह उठकर स्नान आदि कर लें और साफ वस्त्र पहनें. इसके बाद घर और पूजा स्थल की सफाई करें. मंदिर में भगवान दत्तात्रेय की प्रतीमा स्थापित करें. भगवान को गंगाजल से स्नान कराएं, चंदन, फूल और माला अर्पित करें. भगवान के समक्ष दीप और धूप जलाएं. इसके बाद आरती और मंत्रों का जाप करें. भगवान को भोग लगाकर प्रसाद वितरित करें.

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दत्तात्रेय भगवान पूजा मंत्र (Dattatreya Bhagwan Puja Mantra)

ॐ नमो भगवते दत्तात्रेयाय
ॐ द्रां दत्तात्रेयाय नमः
ॐ द्रां ह्रीं क्रों दत्तात्रेयाय नमः

दत्तात्रेय भगवान की आरती (Dattatreya Bhagwan Aarti Lyrics)

त्रिगुणात्मक त्रैमूर्ती दत्त हा जाणा ।
त्रिगुणी अवतार त्रैलोक्य राणा ।

नेती नेती शब्द न ये अनुमाना ॥
सुरवर मुनिजन योगी समाधी न ये ध्याना ॥

जय देव जय देव जय श्री गुरुद्त्ता ।
आरती ओवाळिता हरली भवचिंता ॥

सबाह्य अभ्यंतरी तू एक द्त्त ।
अभाग्यासी कैची कळेल हि मात ॥

पराही परतली तेथे कैचा हेत ।
जन्ममरणाचाही पुरलासे अंत ॥

दत्त येऊनिया ऊभा ठाकला ।
भावे साष्टांगेसी प्रणिपात केला ॥

प्रसन्न होऊनि आशीर्वाद दिधला ।
जन्ममरणाचा फेरा चुकवीला ॥

दत्त दत्त ऐसें लागले ध्यान ।
हरपले मन झाले उन्मन ॥

मी तू पणाची झाली बोळवण ।
एका जनार्दनी श्रीदत्तध्यान ॥

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.


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