Narmada Devi Chalisa Lyrics In Hindi: रोजाना ब्रह्म मुहूर्त में पढ़ें श्री नर्मदा चालीसा, मिलेगी पापों से मुक्ति और दूर होगा हर संकट

Narmada Devi Chalisa Lyrics In Hindi: देवी नर्मदा को देवों के देव महादेव की पुत्री माना जाता है, जिनकी पूजा करने से पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में खुशहाली का वास होता है. यदि आप भी नर्मदा देवी की विशेष कृपा पाना चाहते हैं तो उसके लिए रोजाना श्री नर्मदा चालीसा पढ़ व सुन सकते हैं. चलिए जानते हैं श्री नर्मदा चालीसा के सही लिरिक्स और लाभ के बारे में.

Narmada Devi Chalisa Lyrics In Hindi

Credit- Social Media

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Narmada Devi Chalisa Lyrics In Hindi: हिंदू धर्म में मां नर्मदा को एक अत्यंत पवित्र और पूजनीय देवी माना गया है, जिनकी पूजा देवी और नदी दोनों के रूप में की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, देवी नर्मदा को देवों के देव महादेव की पुत्री यानी बेटी माना जाता है. दरअसल, प्राचीन काल में जब शिव जी मैकल पर्वत पर कड़ी तपस्या कर रहे थे तो धूप के कारण उन्हें बहुत पसीना आ रहा था. उसी समय पर उनके पसीने से मां नर्मदा की उत्पत्ति हुई. देश के कई राज्यों में देवी नर्मदा को मां रेवा और मां शंकरी के नाम से भी जाना जाता है.

वैसे तो कभी भी ब्रह्म मुहूर्त में देवी नर्मदा की पूजा की जा सकती है, लेकिन नर्मदा जयंती पर माता रानी की पूजा और नर्मदा नदी में स्नान करने से विशेष लाभ होता है. देवी नर्मदा की पूजा के दौरान श्री नर्मदा चालीसा पढ़ना व सुनना शुभ होता है. इससे न सिर्फ जीवन में खुशियों का आगमन होता है, बल्कि मोक्ष मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है. यहां पर आप श्री नर्मदा चालीसा के सही लिरिक्स पढ़ सकते हैं.

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श्री नर्मदा चालीसा (Narmada Devi Chalisa Lyrics In Hindi)

॥ दोहा॥

देवी पूजित, नर्मदा, महिमा बड़ी अपार।
चालीसा वर्णन करत, कवि अरु भक्त उदार॥
इनकी सेवा से सदा, मिटते पाप महान।
तट पर कर जप दान नर, पाते हैं नित ज्ञान॥

॥ चौपाई ॥

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जय-जय-जय नर्मदा भवानी, तुम्हरी महिमा सब जग जानी।
अमरकण्ठ से निकली माता, सर्व सिद्धि नव निधि की दाता।
कन्या रूप सकल गुण खानी, जब प्रकटीं नर्मदा भवानी।
सप्तमी सूर्य मकर रविवारा, अश्वनि माघ मास अवतारा।
वाहन मकर आपको साजैं, कमल पुष्प पर आप विराजैं।
ब्रह्मा हरि हर तुमको ध्यावैं, तब ही मनवांछित फल पावैं।
दर्शन करत पाप कटि जाते, कोटि भक्त गण नित्य नहाते।
जो नर तुमको नित ही ध्यावै, वह नर रुद्र लोक को जावैं।
मगरमच्छ तुम में सुख पावें, अंतिम समय परमपद पावें।
मस्तक मुकुट सदा ही साजैं, पांव पैंजनी नित ही राजैं।
कल-कल ध्वनि करती हो माता, पाप ताप हरती हो माता।
पूरब से पश्चिम की ओरा, बहतीं माता नाचत मोरा।
शौनक ऋषि तुम्हरौ गुण गावैं, सूत आदि तुम्हरौं यश गावैं।
शिव गणेश भी तेरे गुण गवैं, सकल देव गण तुमको ध्यावैं।
कोटि तीर्थ नर्मदा किनारे, ये सब कहलाते दु:ख हारे।
मनोकमना पूरण करती, सर्व दु:ख माँ नित ही हरतीं।
कनखल में गंगा की महिमा, कुरुक्षेत्र में सरस्वती महिमा।
पर नर्मदा ग्राम जंगल में, नित रहती माता मंगल में।
एक बार कर के स्नाना, तरत पिढ़ी है नर नारा।
मेकल कन्या तुम ही रेवा, तुम्हरी भजन करें नित देवा।
जटा शंकरी नाम तुम्हारा, तुमने कोटि जनों को है तारा।
समोद्भवा नर्मदा तुम हो, पाप मोचनी रेवा तुम हो।
तुम्हरी महिमा कहि नहीं जाई, करत न बनती मातु बड़ाई।
जल प्रताप तुममें अति माता, जो रमणीय तथा सुख दाता।
चाल सर्पिणी सम है तुम्हारी, महिमा अति अपार है तुम्हारी।
तुम में पड़ी अस्थि भी भारी, छुवत पाषाण होत वर वारि।
यमुना में जो मनुज नहाता, सात दिनों में वह फल पाता।
सरस्वती तीन दिनों में देती, गंगा तुरत बाद हीं देती।
पर रेवा का दर्शन करके, मानव फल पाता मन भर के।
तुम्हरी महिमा है अति भारी, जिसको गाते हैं नर-नारी।
जो नर तुम में नित्य नहाता, रुद्र लोक मे पूजा जाता।
जड़ी बूटियां तट पर राजें, मोहक दृश्य सदा हीं साजें।
वायु सुगंधित चलती तीरा, जो हरती नर तन की पीरा।
घाट-घाट की महिमा भारी, कवि भी गा नहिं सकते सारी।
नहिं जानूँ मैं तुम्हरी पूजा, और सहारा नहीं मम दूजा।
हो प्रसन्न ऊपर मम माता, तुम ही मातु मोक्ष की दाता।
जो मानव यह नित है पढ़ता, उसका मान सदा ही बढ़ता।
जो शत बार इसे है गाता, वह विद्या धन दौलत पाता।
अगणित बार पढ़े जो कोई, पूरण मनोकामना होई।
सबके उर में बसत नर्मदा, यहां वहां सर्वत्र नर्मदा।

॥ दोहा ॥

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भक्ति भाव उर आनि के, जो करता है जाप।
माता जी की कृपा से, दूर होत संताप॥
॥ इति नर्मदा चालीसा सम्पूर्ण॥

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श्री नर्मदा चालीसा के पाठ के लाभ

  • पुण्य मिलता है.
  • ज्ञान में वृद्धि होती है.
  • पापों से मुक्ति मिलती है.
  • मानसिक शांति मिलती है.
  • शारीरिक रोगों से मुक्ति मिलती है.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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