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Aparajita Puja 2026: दशहरा पर करें अपराजिता स्तोत्र का पाठ, इस एक उपाय से हर कार्य में मिलेगी सफलता

Aparajita Puja 2026: दशहरा के पर्व पर अपराजिता पूजा करने का महत्व है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम ने लंका विजय से पहले अपराजिता पूजा की थी. आप दशहरे पर अपराजिता स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं.

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दशहरा पर अपराजित स्तोत्र के पाठ से सफलता के योग बनेंगे. (Photo Credit - AI)

Aparajita Stotram Full Lyrics in Hindi: आश्विन माह शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा और विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है. आप 20 अक्टूबर 2026 दिन मंगलवार को आपको दशहरा पर अपराजिता पूजा करनी चाहिए. देवी अपराजिता की पूजा करना बेहद फलदायी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम ने देवी अपराजिता की पूजा की थी. देवी अपराजिता मां दुर्गा का ही एक रूप है. आपको दशहरा पर देवी अपराजिता की पूजा करने के साथ ही अपराजिता स्तोत्र का पाठ करना चाहिए.

अपराजिता स्तोत्र का पाठ (Aparajita Stotram Lyrics in Hindi)

ॐ अस्या वैष्णव्याः पराया अजिताया महाविद्यायाः।
वामदेव-बृहस्पति-मार्कण्डेया ऋषयः।
गायत्र्युष्णिगनुष्टुब्बृहती छन्दांसि।, लक्ष्मीनृसिंहो देवता।
ॐ क्लीं श्रीं ह्रीं बीजम्। हुं शक्तिः। सकलकामनासिद्ध्यर्थं अपराजिता- विद्यामन्त्रपाठे विनियोगः।

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अपराजिता देवी ध्यान

ॐ नीलोत्पलदलश्यामां भुजङ्गाभरणान्विताम्।
शुद्धस्फटिकसङ्काशां चन्द्रकोटिनिभाननाम्।
शङ्खचक्रधरां देवी वैष्ण्वीमपराजिताम्।
बालेन्दुशेखरां देवीं वरदाभयदायिनीम्।
नमस्कृत्य पपाठैनां मार्कण्डेयो महातपाः।

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मार्कंडेय उवाच

शृणुष्वं मुनयः सर्वे सर्कामासिद्धिदाम । असिद्धसाधनीं देवीं वैष्णवीं अपराजिताम् ॥
विष्णोरियमानुपप्रोकता सर्वकामफलप्रदा । सर्वसौभाग्यजननी सर्वभितिविनाशनी ।
सवैश्च पठितां सिद्धेविष्णोः परम्वाल्लभा ॥ नानया सदृशं किन्चिदुष्टानां नाशनं परं ।
विद्या रहस्या, कथिता वैष्ण्व्येशापराजिता । पठनीया प्रशस्ता वा साक्शात्स्त्वगुणाश्रया ॥
ॐ शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजं । प्रसन्नवदनं ध्यायेत्सर्वविघ्नोपशान्तये ॥
अथातः संप्रवक्ष्यामी हाभ्यामपराजितम् । यथाशक्तिमार्मकी वत्स रजोगुणमयी मता ॥

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सर्वसत्वमयी साक्शात्सर्वमन्त्रमयी च या । या स्मृता पूजिता जप्ता न्यस्ता कर्मणि योजिता ॥
सर्वकामदुधा वत्स शृणुश्चैतां ब्रवीमिते । यस्याः प्रणश्यते पुष्पं गर्मी वा पतते यदि ॥
भ्रियते बालको यस्याः काक्बन्ध्या च या भवेत् । धारयेघा इमां विधामेतैदोषैन लिप्यते ॥
गर्भिणी जीवव्त्सा स्यात्पुत्रिणी स्यान्न संशयः । भूर्जपत्रे त्विमां विद्धां लिखित्वा गंध्चंदनैः ॥
एतैदोषैन लिप्यते सुभगा पुत्रिणी भवेत् । रणे राजकुले दुते नित्यं तस्य जयो भवेत् ॥
शस्त्रं वारयते होषा समरे काडंदारुणे । गुल्मशुलाक्शिरोगाणां न नाशिनी सर्वदेहिनाम् ॥
इत्येषा कथिता विद्या अभयाख्या अपराजिता । एतस्याः स्प्रितिमात्रेण भयं क्चापि न जायते ॥

नोपसर्गा न रोगाश्च न योधा नापि तस्कराः । न राजानो न सर्पाश्च न द्वेष्टारो न शत्रवः ।
यक्षराक्षसवेताला न शाकिन्यो न च ग्रहाः ॥
अग्नेत्र्यं न वाताच्च न स्मुद्रान्न वै विषात् । कामणं वा शत्रुकृतं वशीकरणमेव च ॥
उच्चाटनं स्तम्भनं च विद्वेषणमथापि वा । न किन्चितप्रभवेत्त्र यत्रैषा वर्ततेऽभया ॥
पठेद वा यदि वा चित्रे पुस्तके वा मुखेऽथवा । हृदि वा द्वार्देशे व वर्तते हाभयः पुमान् ॥
हृदय विन्यसेदेतां ध्यायदेवीं चतुर्भुजां । रक्त्माल्याम्बरधरां पद्दरागसम्प्रभां ॥
पाशाकुशाभयवरैरलंकृतसुविग्रहां । साध्केभ्यः प्रयछन्तीं मंत्रवर्णामृतान्यापि ॥

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नातः परतरं किन्च्चिद्वाशिकरणमनुतम् । रक्षणं पावनं चापि नात्र कार्या विचारणा ॥
प्रातः कुमारिकाः पूज्याः खादैराभरणैरपि । तदिदं वाचनीयं स्यातत्प्रिया प्रियते तू मां ॥
ॐ अथातः सम्प्रक्ष्यामी विद्दामपी महाबलां । सर्दुष्टप्रश्मनी सर्वशत्रुक्षयङ्करीं ॥
दारिद्र्य्दुखशमनीं दुभार्ग्यव्याधिनाशिनिं । भूतप्रेतपिशाचानां यक्श्गंध्वार्क्षसां ॥
डाकिनी शाकिनी स्कन्द कुष्मांडनां च नाशिनिं । महारौदिं महाशक्तिं सघः प्रत्ययकारिणीं ॥
गोपनीयं प्रयत्नेन सर्वस्वंपार्वतीपतेः । तामहं ते प्रवक्ष्यामि सावधानमनाः श्रृणु ॥
एकाहिकं द्वहिकं च चातुर्थिकर्मासिकं । द्वैमासिकं त्रैमासिकं तथा चातुर्मासिकं ॥

पाँचमासिक षाड्‌मासिकं वातिक पैत्तिक्चरं । श्रेष्मिकं सानिपातिकं तथैव सततज्वरं ॥
मौहूर्तिकं पैत्तिकं शीतज्वरं विषमज्वरं । द्वहिंकं त्रयहिन्कं चैव ज्वर्मेकाहिकं तथा ॥
क्षिप्रं नाशयेते नित्यं स्मरणापराजिता । यत एवागतं पापं तत्रैव प्रतिगच्छतु, स्वाहेत्योंम ॥
अमोधैषा महाविद्दा वैष्णवी चापराजिता । स्वयं विश्श्रुप्रणीता च सिद्धेयं पाठतः सदा ॥
एषा महाबला नाम कथिता तेऽपराजित । नानया सदृशी रक्षा त्रिषु लोकेषु विद्दते ॥
तमोगुणमयी साक्षद्रोद्री शक्तिरियं मता । कृतान्तोऽपि यतोभीतः पाद्युले व्यवस्थितः ॥
मूलाधारे न्यसेदेतां रात्रावेन च संस्मरेत । नीलजीतमूतसंङ्काशां तडित्कपिलकेशिकाम् ॥

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उद्ददादित्यसंकाशां नेत्रत्रयविराजिताम् । शक्तिं त्रिशूलं शङ्खं चपानपात्रं च बिभ्रतीं ।
व्याघ्चापरिधानां कि‌ङ्किणीजालमंडितं ॥
धावंतीं गगंस्यांतः पादुकाहितपादकां । दंष्टाकरालवदनां व्यालकुण्डलभूषितां ॥
व्यात्वक्त्रां ललजिहां भुकुटिकुटिलालकां । स्वभक्तद्वेषिणां रक्तं पिबन्तीं पान्पात्रतः ॥
सप्तधातून शोषयन्तीं क्रूरदृष्टया विलोकनात् । त्रिशुलेन च तज्जिहां कीलयंतीं मुहुमुहुः ॥
पाशेन बद्धा तं साधमानवंतीं तन्दिके । अर्द्धरात्रस्य समये देवीं ध्यायेंमहबलां ॥
यस्य यस्य वदेन्नाम जपेन्मंत्रं निशांतके । तस्य तस्य तथावस्थां कुरुते सापियोगिनी ॥

आप देवी अपराजिता की पूजा के दौरान इस अपराजिता स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं. ऐसा करने से जीवन के कष्ट दूर होंगे और आपको हर क्षेत्र में सफलता मिलेगी.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Aman Maheshwari

अमन माहेश्वरी न्यूज 24 में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वह खबरों को समझकर पाठकों तक आसान शब्दों में पहुंचाने का काम बखूबी करते हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के डॉ भीमराव अंबेडकर कॉलेज से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन (BJMC) किया है. इसके बाद उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन (MJMC) किया. पढ़ाई पूरी करने के बाद डिजिटल मीडिया में अपने करियर की शुरुआत की. सबसे पहले जी मीडिया डीएनए हिंदी के साथ जुड़े. पिछले 5 साल से अमन डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं. डीएनए हिंदी में बतौर ट्रेनी जर्नलिस्ट ज्वाइन किया. इसके बाद सब एडिटर के पद पर काम किया. वर्तमान में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अमन ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण और प्रयागराज में महाकुंभ मेले के दौरान धार्मिक खबरों को बखूबी कवर किया. धर्म और ज्योतिष - अमन धर्म-ज्योतिष सेक्शन के लिए लिखने के दौरान अंक ज्योतिष, वास्तु, ग्रह गोचर, व्रत-त्योहार से जुड़े विषयों पर लेख तैयार करते हैं. देवी-देवता और उनसे जुड़ी पौराणिक कथाओं, मंदिर, तीर्थ, धार्मिक स्थल और धार्मिक परंपराएं से जुड़े लेख लिखते हैं. इसके साथ ही धार्मिक यात्राओं से जुड़े उपयोगी लेख अमन तैयार करते हैं. Email - aman@bagconvergence.in X Account - MrAman0501
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