धीरे-धीरे डूब रही हैं ये सिटी, बैंकॉक-शंघाई समेत कई शहरों पर मंडरा रहा खतरा
दुनिया के कई बड़े शहर धीरे-धीरे जमीन में धंस रहे हैं. समुद्र स्तर बढ़ने, ग्राउंड वॉटर के ज्यादा इस्तेमाल और अर्बेनाइजेशन की वजह से ये शहर आने वाले समय में बड़े खतरे का सामना कर सकते हैं.

डूबते शहरों का बढ़ता खतरा
2 / 8दुनिया के कई बड़े शहर आज एक गंभीर और धीरे-धीरे बढ़ते खतरे का सामना कर रहे हैं. जमीन का धंसना, जिसे वैज्ञानिक भाषा में लैंड सब्सिडेंस कहा जाता है. ये प्रक्रिया अचानक नहीं होती, बल्कि सालों में धीरे-धीरे जमीन नीचे बैठती जाती है. खासकर वो शहर जो समुद्र किनारे, नदी डेल्टा या निचले इलाकों में बसे हैं, इस खतरे की चपेट में तेजी से आ रहे हैं. शहरीकरण, बढ़ती जनसंख्या और संसाधनों के ज्यादा इस्तेमाल ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है. अगर समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले दशकों में ये शहर बड़े खतरे का शिकार बन सकते हैं.
बैंकॉक-हर साल धंस रहा है शहर
3 / 8थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक दुनिया के सबसे तेजी से धंसने वाले शहरों में गिनी जाती है. यह शहर समुद्र तल से बहुत कम ऊंचाई पर मौजूद है, जिससे बाढ़ का खतरा पहले से ही है. विशेषज्ञों के मुताबिक, बैंकॉक हर साल लगभग 1 से 2 सेंटीमीटर तक नीचे जा रहा है. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है ग्राउंड वॉटर का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल. शहर की बढ़ती आबादी और उद्योगों की जरूरतों ने जमीन के नीचे के पानी को तेजी से खत्म किया है, जिससे जमीन की परतें कमजोर हो गई हैं. अगर यही स्थिति जारी रही, तो आने वाले 50 से 100 वर्षों में बैंकॉक का बड़ा हिस्सा समुद्र के पानी में डूब सकता है.
शंघाई-100 साल में कई मीटर नीचे
4 / 8चीन का आर्थिक केंद्र शंघाई भी इस संकट से जूझ रहा है. पिछले 100 सालों में यह शहर लगभग 2 से 3 मीटर तक धंस चुका है, जो बेहद चिंताजनक है. शंघाई में तेजी से बढ़ती हाई राइज बिल्डिंग और भारी कंस्ट्रक्शन जमीन पर ज्यादा दबाव डाल रहे हैं. इसके साथ ही ग्राउंड वॉटर का ज्यादा इस्तेमाल भी इस समस्या को बढ़ा रहा है. हालांकि, चीन सरकार ने इस समस्या को कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं, जैसे ग्राउंड वॉटर यूज पर कंट्रोल और निगरानी सिस्टम, लेकिन खतरा अभी भी पूरी तरह टला नहीं है.
बीजिंग और चीन के बाकी शहर
5 / 8सिर्फ शंघाई ही नहीं, बल्कि चीन के कई और बड़े शहर भी जमीन धंसने की समस्या का सामना कर रहे हैं. बीजिंग, तियानजिन और ग्वांगझू जैसे शहरों में भी लैंड सब्सिडेंस तेजी से बढ़ रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन के लगभग 40-45% शहरी इलाके इस खतरे की चपेट में हैं. इसका सीधा असर वहां रहने वाले करोड़ों लोगों पर पड़ सकता है. इस समस्या के कारण बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है, इमारतों में दरारें आ सकती हैं और बुनियादी ढांचा कमजोर हो सकता है.
भारत के शहर भी खतरे में
6 / 8भारत भी इस ग्लोबल प्रॉब्लम से अछूता नहीं है. देश के कई बड़े शहर जैसे दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता में जमीन धंसने के संकेत मिल रहे हैं. दिल्ली में ग्राउंड वॉटर के इस्तेमाल और तेजी से बढ़ते कंस्ट्रक्शन की वजह से कई इलाकों में जमीन कमजोर हो रही है. वहीं मुंबई और चेन्नई जैसे तटीय शहर समुद्र स्तर बढ़ने के कारण दोहरे खतरे का सामना कर रहे हैं. एक तरफ जमीन धंसना और दूसरी तरफ समुद्री पानी का बढ़ता स्तर. अगर इस पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में इन शहरों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए खतरा बढ़ सकता है.
मेक्सिको
7 / 8मेक्सिको सिटी पर भी धंसने का खतरा मंडरा रहा है. दरअसल, ये शहर एक पुराने झील इलाके पर बसा हुआ है. यहां की नरम मिट्टी और लगातार बढ़ते कंस्ट्रक्शन की वजह से जमीन खिसक रही है.
वेनिस, इटली
8 / 8इटली के सबसे खूबसूरत टूरिस्ट शहरों में से एक वेनिस भी डूबने की कगार पर है. लगातार समुद्र जल स्तर बढ़ने और धंसती जमीन ने यहां के लोगों की चिंता बढ़ा दी है. (All Photos Credit: AI)



















