इजरायल में 7 साल में छठी बार चुनाव, नेतन्याहू से लेकर गादी ईसेनकोट तक कौन-कौन हैं प्रधानमंत्री पद के दावेदार?
लंबे समय तक सत्ता में रहे पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के सामने इस बार प्रधानमंत्री पद के लिए कई और दावेदारों से चुनौती मिल रही है.

इजरायल की राजनीति एक बार फिर अहम मोड़ पर है. 1948 में देश की स्थापना के बाद से अब तक इजरायल में 14 प्रधानमंत्री रह चुके हैं और आपको जानकर हैरानी होगी कि पिछले 7 वर्षों में देश में छठी बार प्रधानमंत्री के चुनाव हो रहे हैं. लंबे समय तक सत्ता में रहे पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के सामने इस बार प्रधानमंत्री पद के लिए कई और दावेदारों से चुनौती मिल रही है.
बेंजामिन नेतन्याहू
2 / 5इजरायल के वर्तमान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू 2009 से 2021 तक इस पद पर रहे और 2022 में फिर सत्ता में लौटे. उनके कार्यकाल में बस्तियों का विस्तार और गाजा युद्ध प्रमुख मुद्दे रहे हैं. वह ICC के गिरफ्तारी वारंट, भ्रष्टाचार के मुकदमों और 7 अक्टूबर के हमले से जुड़ी संभावित जांच का सामना कर रहे हैं. बेंजामिन नेतन्याहू फिलिस्तीनी राज्य के गठन के विरोधी भी माने जाते हैं.
गादी ईसेनकोट
3 / 5इजरायल की याशार पार्टी के प्रमुख नेता गादी ईसेनकोट 2015 से 2019 तक इजरायली सेना के प्रमुख रहे और 2023 में नेतन्याहू की युद्ध कैबिनेट में शामिल हुए. उन्होंने जून 2024 में इस्तीफा दिया और 2025 में याशार पार्टी बनाई. वह सरकारी सुधार, सभी के लिए सैन्य सेवा और 7 अक्टूबर के हमले की जांच की मांग करते हैं. वह अमेरिका पर इजरायल की अधिक निर्भरता की आलोचना करते हैं.
नफताली बेनेट और यायर लापिद
4 / 5अप्रैल 2026 में बने बयाखद गठबंधन में दक्षिणपंथी नेता नफताली बेनेट और मध्यमार्गी यायर लापिद शामिल हैं. दोनों घरेलू सुधारों को चुनावी मुद्दा बना रहे हैं, लेकिन फिलिस्तीनी राज्य के गठन का समर्थन नहीं करते. बेनेट इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों के समर्थक हैं, जबकि लापिद युद्ध के कारण देश की अंतरराष्ट्रीय छवि पर पड़ने वाले असर की आलोचना करते हैं.
यायर गोलान
5 / 5डेमोक्रेट्स पार्टी के प्रमुख नेताओं में से एक गोलान सेवानिवृत्त मेजर जनरल हैं और 2024 में लेबर तथा मेरेत्ज पार्टियों के विलय से बनी पार्टी के प्रमुख भी हैं. वह नेतन्याहू सरकार की युद्ध नीति की आलोचना करते हैं और फिलिस्तीनी बच्चों की हत्या तथा भूखमरी का विरोध करते हैं. वह अति-रूढ़िवादी यहूदी समुदायों को सैन्य सेवा से मिलने वाली छूट के खिलाफ हैं और फिलिस्तीनी दलों के साथ सहयोग के पक्षधर हैं.