'छोटे लोगों का गांव'! दुनिया में यहां है परी कथा जैसी जगह, 1 मीटर से ज्यादा नहीं होती लंबाई

ब्रिटिश युवक हडसन लॉरेंस ने वियतनाम की चार हफ्ते लंबी यात्रा के दौरान दा लाट के पास एक ऐसे गांव की सैर की, जो किसी परी कथा से कम नहीं लगता. लगभग 20 किलोमीटर दूर लाम डोंग प्रांत के ता नुंग दर्रे की तलहटी में बसा यह 'छोटे लोगों का गांव' सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है.

Da Lat small people village
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ब्रिटिश युवक हडसन लॉरेंस ने वियतनाम की चार हफ्ते लंबी यात्रा के दौरान दा लाट के पास एक ऐसे गांव की सैर की, जो किसी परी कथा से कम नहीं लगता. लगभग 20 किलोमीटर दूर लाम डोंग प्रांत के ता नुंग दर्रे की तलहटी में बसा यह 'छोटे लोगों का गांव' सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है.

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हडसन की यात्रा का सफर

हडसन की यात्रा का सफर2 / 8

हडसन ने फु क्वोक से शुरू कर हो ची मिन्ह सिटी, मुई ने, दा लाट, होई एन, दा नांग, ह्यू, फोंग न्हा, निन्ह बिन्ह और हनोई तक का भ्रमण किया. दा लाट से 20 किमी दूर कैम ली वार्ड के इस गांव तक पहुंचते ही उन्हें लगा जैसे काल्पनिक दुनिया में कदम रख दिया. सोशल मीडिया वीडियो ने उन्हें यहां खींचा, जहां छोटे कद के लोग हरे-भरे बगीचों के बीच रहते हैं.

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मशरूम जैसे घरों में नन्हे दरवाजे

मशरूम जैसे घरों में नन्हे दरवाजे3 / 8

हरे बगीचों के बीच बने छोटे-छोटे मशरूम जैसे घरों में नन्हे दरवाजे, मेजें और कुर्सियां हैं. पर्यटक 'लोहार', 'किसान लड़कियां' और 'कलाकारों' को देखकर आश्चर्य से भर जाते हैं, जो मुस्कुराते हुए मिलते हैं. यह छह हेक्टेयर में फैला पर्यटन क्षेत्र काल्पनिक दुनिया से प्रेरित है, जहां 10 से ज्यादा छोटे कद के लोग विभिन्न प्रांतों से आकर रहते हैं.

निवासियों का मिलनसार स्वभाव

निवासियों का मिलनसार स्वभाव4 / 8

गांव के छोटे लोग बेहद मेहमाननवाज हैं, हमेशा हंसते-मुस्कुराते रहते हैं. हडसन ने सरल अंग्रेजी या इशारों से उनसे बात की, उनकी खुशी और हास्य महसूस किया. एक छोटी मकान मालकिन से उनकी बातचीत खास तौर पर यादगार रही, जिन्होंने कॉफी पिलाई और गांव घुमाया.

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जीवन की सकारात्मक कहानी

जीवन की सकारात्मक कहानी5 / 8

कई निवासी पहले कठिनाइयों से जूझते थे, हीन भावना का शिकार रहते थे. यहां उन्हें स्वास्थ्य अनुकूल काम मिले, स्थिर आय हुई और सभी का प्यार व सम्मान मिला. वे पर्यटकों से बातें करते हैं, फोटो खिंचवाते हैं और पालतू जानवरों की देखभाल करते हैं. टिकटॉक पर उनका चैनल दैनिक जीवन की मजेदार झलकियां दिखाता है.

और क्या है वहां का आकर्षण?

और क्या है वहां का आकर्षण?6 / 8

यह पर्यटन क्षेत्र विशाल 3डी मॉडलों के लिए मशहूर है, जैसे कछुआ देवता और वन देवता जो सिर हिलाते और पलक झपकाते हैं. चीड़ के जंगलों में ये प्राचीन जीव जैसे सांस लेते नजर आते हैं. दा लाट का ठंडा मौसम और ताजी हवा इसे और मोहक बनाती है.

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फोंग न्हा का अनोखा अनुभव

फोंग न्हा का अनोखा अनुभव7 / 8

दा लाट के बाद फोंग न्हा ने हडसन को बांध लिया, जहां उन्होंने पहली बार 'बत्तख चराने' का काम किया. 100 से ज्यादा बत्तखों को दाना खिलाया, उनके बच्चों की देखभाल की. बत्तखों वाली 'मसाज' का मजा लिया, जब वे दाना चुगते हुए शरीर पर चोंच मारती रहीं.

डार्क केव की रहस्यमयी सैर

डार्क केव की रहस्यमयी सैर8 / 8

क्वांग बिन्ह के फोंग न्हा में डार्क केव का टूर लिया, जो 1990 में खोजी गई 6 किमी लंबी गुफा है. हेडलैंप लगाकर भूमिगत नदी पार की, स्टैलेक्टाइट्स की चमक देखी. अंदर प्राकृतिक मिट्टी स्नान का लुत्फ उठाया, जो खनिजों से भरपूर होता है.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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