तंबाकू के पौधे में कहां से आता है निकोटीन? वैज्ञानिकों ने सुलझाई 200 पुरानी ये रहस्यमय प्रक्रिया

वैज्ञानिकों ने आखिरकार तंबाकू पौधे में निकोटीन बनने की उस जटिल प्रक्रिया को पूरी तरह समझ लिया है, जिसकी खोज 1828 से चल रही थी. यॉर्क विश्वविद्यालय के डॉ. बेंजामिन लिचमैन के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय टीम ने इस 200 वर्ष पुरानी जैव-रासायनिक पहेली को सुलझा लिया है.

tobacco plant
1 / 6

वैज्ञानिकों ने आखिरकार तंबाकू पौधे में निकोटीन बनने की उस जटिल प्रक्रिया को पूरी तरह समझ लिया है, जिसकी खोज 1828 से चल रही थी. यॉर्क विश्वविद्यालय के डॉ. बेंजामिन लिचमैन के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय टीम ने इस 200 वर्ष पुरानी जैव-रासायनिक पहेली को सुलझा लिया है. इस खोज से न सिर्फ पौधे विज्ञान को नई दिशा मिलेगी, बल्कि दवा उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले तंबाकू पौधों से निकोटीन को पूरी तरह हटाना भी संभव हो सकेगा.

विज्ञापन

200 साल से पहेली सुलझाने की कोशिश

200 साल से पहेली सुलझाने की कोशिश2 / 6

1828 में जर्मन रसायनज्ञों ने पहली बार शुद्ध निकोटीन निकाला था, लेकिन कोई नहीं जान पा रहा था कि पौधा इसे कैसे तैयार करता है. दशकों तक कई शोधकर्ता इस प्रक्रिया को समझने की कोशिश करते रहे लेकिन एक फैक्ट हमेशा छिपा रहा. अब यॉर्क विश्वविद्यालय और कोपेनहेगन विश्वविद्यालय की टीम ने इस पूरी प्रक्रिया को पहली बार पूरी तरह से समझ लिया है.

विज्ञापन

ग्लूकोज की महत्वपूर्ण भूमिका

ग्लूकोज की महत्वपूर्ण भूमिका3 / 6

निकोटीन निर्माण के दौरान पौधा एक चालाक तरीका अपनाता है. वह एक महत्वपूर्ण रासायनिक ब्लॉक से ग्लूकोज (चीनी) जोड़ देता है, जो प्रतिक्रिया को एक्टिव करने में मदद करता है. आखिरी चरण में यह ग्लूकोज अपने आप हट जाता है और तैयार निकोटीन में उसका कोई निशान नहीं बचता. यही छिपी हुई प्रक्रिया पिछले 200 साल से वैज्ञानिकों को भ्रमित कर रही थी.

चार एंजाइम्स की खोज

चार एंजाइम्स की खोज4 / 6

शोधकर्ताओं ने पौधे की जड़ों में काम करने वाले चार प्रमुख एंजाइम्स की पहचान की है. इनमें से एक एंजाइम निकोटिनिक एसिड से ग्लूकोज जोड़ता है, दूसरा रिंग बनाने की तैयारी करता है. NicGS नाम का तीसरा एंजाइम दोनों रिंग्स को जोड़कर असली निकोटीन का निर्माण करता है. चौथा एंजाइम अंत में ग्लूकोज को अलग कर देता है.

विज्ञापन

दवा उत्पादन में आएगी क्रांति

दवा उत्पादन में आएगी क्रांति5 / 6

तंबाकू के पौधों को लंबे समय से वैक्सीन और एंटीबॉडी बनाने के लिए प्रयोगशाला में उगाया जाता रहा है. लेकिन हर बैच में निकोटीन भी बन जाता है, जिसे निकालना महंगा और जटिल होता है. अब इन चार जीनों को बंद करके निकोटीन-मुक्त तंबाकू पौधे तैयार किए जा सकेंगे, जिससे दवा उत्पादन सस्ता और सुरक्षित हो जाएगा.

प्राकृतिक कीटनाशक है निकोटीन

प्राकृतिक कीटनाशक है निकोटीन6 / 6

निकोटीन पौधे के लिए प्राकृतिक कीटनाशक का काम करता है. यह पत्तियों को कैटरपिलर और अन्य कीटों के लिए जहरीला बनाता है. शोधकर्ताओं ने निकोटियाना बेंथमियाना (Nicotiana Benthamiana) पौधे में इन एंजाइम्स को जोड़कर प्रयोग किया और देखा कि वे बिल्कुल असली तंबाकू जैसा निकोटीन बना रहे हैं. इससे प्रक्रिया की पुष्टि हुई है.

विज्ञापन

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
... और पढ़ें
विज्ञापन