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8th pay commission latest update: केंद्र सरकार के 49 लाख कर्मचारी और 69 लाख पेंशनर्स 8वें वेतन आयोग के लागू होने का इंतजार कर रहे हैं, इसी बीच जम्मू के केंद्रीय सरकारी पेंशनभोगी कल्याण संघ (CGPWA) ने PM, वित्त मंत्री, पेंशन राज्य मंत्री और अध्यक्ष को पत्र लिखकर आठवें वेतन आयोग के नियमों और शर्तों (टर्म्स ऑफ रेफरेंस) पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है.

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आठवें वेतन आयोग को लेकर नियमों और शर्तों (टर्म्स ऑफ रेफरेंस) पर विवाद गहराता जा रहा है. 1 जनवरी 2026 से लागू हो चुके आठवें वेतन आयोग के बीच पेंशनभोगी इस बात से चिंतित है कि कहीं उन्हें नए वेतन आयोग के दायरे से बाहर न कर दिया जाए. आयोग के TOR को लेकर उठे विवाद ने चिंताएं बढ़ा दी हैं. सातवें वेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर को समाप्त हो चुका है और आठवें वेतन आयोग का प्रभाव 1 जनवरी 2026 से लागू माना जा रहा है.

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यह विवाद आठवें वेतन आयोग के कार्यक्षेत्र में इस्तेमाल की गई शब्दावली को लेकर शुरू हुआ है. पेंशनभोगी संगठनों का कहना है कि टीओआर में ऐसा प्रतीत होता है कि आयोग का दायरा केवल मौजूदा केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों तक सीमित रखा गया है. इसी आशंका के चलते CGPWA ने प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री, पेंशन राज्य मंत्री और आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है. संगठन का कहना है कि टीओआर में पेंशनभोगियों का स्पष्ट उल्लेख नहीं होना चिंता का विषय है.

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दस्तावेज में दिखाई नहीं देता भरोसा : एसोसिएशन का यह भी कहना है कि टीओआर जारी होने के बाद वित्त मंत्री और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से भरोसा दिलाया था कि पेंशनभोगियों के हितों की अनदेखी नहीं होगी, लेकिन यह आश्वासन दस्तावेज में साफ तौर पर दिखाई नहीं देता. विवाद की एक बड़ी वजह टीओआर में इस्तेमाल किया गया वह वाक्यांश भी है, जिसमें 'गैर-योगदान आधारित पेंशन योजनाओं की अप्रतिबंधित लागत' का जिक्र है.

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पेंशनभोगियों का मानना है कि इससे पेंशन को संवैधानिक अधिकार के बजाय वित्तीय बोझ के रूप में दिखाया जा रहा है. केवल पेंशनभोगी ही नहीं, बल्कि मौजूदा सरकारी कर्मचारी भी कई बातों को लेकर चिंतित हैं. संविदा आदेश में पेंशन संशोधन, महंगाई भत्ते (डीए) के समेकन और 1 जनवरी 2026 से स्पष्ट रूप से लागू होने को लेकर कोई साफ जानकारी नहीं दी गई है. संविदा कर्मचारियों और ट्रेड यूनियनों के अधिकारों पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है, जिससे असमंजस और बढ़ गया है.

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खत्म होता नहीं दिख रहा यह विवाद: हालांकि सरकार ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि पेंशनभोगियों को आठवें वेतन आयोग के दायरे से बाहर नहीं किया गया है. वित्त मंत्रालय ने संसद में यह भी कहा है कि आयोग राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) और गैर-एनपीएस, दोनों तरह के कर्मचारियों की पेंशन और ग्रेच्युटी से जुड़े मुद्दों की समीक्षा करेगा. इसके बावजूद, जब तक टीओआर में स्पष्ट शब्दों में पेंशनभोगियों को शामिल नहीं किया जाता, तब तक विवाद खत्म होता नहीं दिख रहा है.