क्या स्मार्टफोन के कारण कम बच्चे ले रहे हैं जन्म? जानिए बर्थ रेट और मोबाइल पर क्या कहती है स्टडी

Birth Rates Falling: हालिया स्टडी में रिसर्चर्स ने इस बात का जिक्र किया है कि बर्थ रेट यानी जन्म दर गिरने के पीछे मोबाइल फोन वजह हो सकते हैं. जानिए क्या कहती है स्टडी.

Smartphones And Birth Rate
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Smartphones And Birth Rate

Smartphones And Birth Rate: वर्तमान में जन्म दर गिरती हुई देखी जा रही है. दुनिया के ऐसे कई देश हैं जो गिरती जन्म दर से परेशान भी हैं. भारत भी इन्हीं देशों की गिनती में आता है. ऐसे में फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार, यूनिवर्सिटी ऑफ सिनसिनाटी के नीथन हडसन एंड हर्नान मोस्कोसो-बोडो के रिसर्चर्स की स्टडी के अनुसार यूएस और यूके में 4जी मोबाइल इंटरनेट जन्म दर कम होने के पीछे की अहम वजह हो सकता है. रिसर्चर्स का मानना है कि स्मार्टफोन लोगों के आपस में इंटरैक्ट करने के तरीके को बदलता है और लोगों के बीच कम होता इन-पर्सन इंटरैक्शन भी फर्टिलिटी रेट कम होने की वजह हो सकता है.

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स्मार्टफोन यूजर्स में कम हुआ फर्टिलिटी रेट

स्मार्टफोन यूजर्स में कम हुआ फर्टिलिटी रेट 2 / 7

सोशल मीडिया यूज करने वालों में ज्यादातर यंग अडल्ट्स आते हैं और इन्हीं में सबसे ज्यादा फर्टिलिटी रेट में गिरावटदेखी जा रही है.

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रिश्तों को प्रभावित करता सोशल मीडिया

रिश्तों को प्रभावित करता सोशल मीडिया 3 / 7

एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सोशल मीडिया के कारण लोगों के बीच लॉन्ग-टर्म रिलेशनशिप बिल्ड करना और मेंटेन करना मुश्किल होता जा रहा है. लगातार ऑनलाइन लोगों के लाइफस्टाइल को देखकर यूजर्स के अंदर इनसेक्योरिटी और इंस्टेबिलिटी की भावना भी जन्म लेने लगती है.

आर्थिक तुलना भी है कारण

आर्थिक तुलना भी है कारण 4 / 7

कुछ रिसर्चर्स का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म लोगों की पहले से चली आ रही आर्थिक, करियर और घर से जुड़ी दिक्कतें और ज्यादा बड़ी दिखाने लगता है जिससे युवाओं को माता-पिता बनने से डर लगने लगता है.

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कितनी सही है स्टडी

कितनी सही है स्टडी 5 / 7

मोबाइल फोन के बर्थ रेट को प्रभावित करने को लेकर कई तरह के मत दिए जाते हैं जिनमें यह मत भी है कि जन्म दर के कम होने की एक बड़ी वजह मृत्यु दर का कम होना भी है. लोगों के अब कम बच्चे हैं क्योंकि उनमें यह डर नहीं है कि बच्चों की जान चली जाएगी क्योंकि अब इलाज के लिए सुविधाएं ज्यादा हैं.

करियर भी हो सकता है वजह

करियर भी हो सकता है वजह 6 / 7

महिलाओं के पास भी अब अपना करियर है. ऐसे में एक मत यह भी है कि महिलाएं अब आर्थिक रूप से सशक्त हैं और अगर वह शादी ना करना चाहें या बच्चे को अपना समय ना दे पाएं तो यह उनका चुनाव है. वहीं, देर से शादी होना या देरी से बच्चे होना भी जन्म दर कम होने का कारण हो सकता है.

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टीन प्रेग्नेंसी कम होना

टीन प्रेग्नेंसी कम होना 7 / 7

4जी स्टडी के अनुसार, यूएस में बर्थ रेट कम होना सीधेतौर पर टीन प्रेग्नेंसी से जुड़ा है. ऐसे में टीन प्रेग्नेंसी का कम होना खुशी की बात होनी चाहिए. यह भी पढ़ें -

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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