जमीन में कितनी गहरी है बुर्ज खलीफा की नींव, 7.0 तीव्रता वाला भूकंप भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता इसका

दुनिया की सबसे ऊंची इमारत का जब भी नाम आता है तो उसमें बुर्ज खलीफा टॉप पर आता है. करीब 828 मीटर ऊंची ये इमारत जितनी गगनचुंबी है, उतनी ही गहराई में इसकी नींव भी दबी हुई है. इंजीनियरिंग का नायाब नमूना बुर्ज खलीफा कई मायनों में दुनिया की सबसे मजबूत इमारत भी है.

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दुनिया की सबसे ऊंची इमारत का जब भी नाम आता है तो उसमें बुर्ज खलीफा टॉप पर आता है. करीब 828 मीटर ऊंची ये इमारत जितनी गगनचुंबी है, उतनी ही गहराई में इसकी नींव भी दबी हुई है. इंजीनियरिंग का नायाब नमूना बुर्ज खलीफा कई मायनों में दुनिया की सबसे मजबूत इमारत भी है.

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बुर्ज खलीफा की ऊंचाई

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जैसा कि हमने पहले बताया कि बुर्ज खलीफा की कुल ऊंचाई 828 मीटर है, जो लगभग 2716.5 फीट के बराबर होती है. आपको जानकर हैरानी होगी कि बुर्ज खलीफा के बगल में अगर आइफिल टॉवर को खड़ा किया जाए तो एक के ऊपर एक तीन आइफिल टॉवर खड़े किए जा सकते हैं. बुर्ज खलीफा को दुनिया की सबसे ऊंची फ्रीस्टैंडिंग स्ट्रक्चर भी माना जाता है.

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बादलों को छूती इमारत

बादलों को छूती इमारत3 / 9

दुबई में बने बुर्ज खलीफा में 163 मंजिल हैं, जिसपर चढ़ने के लिए दुनिया की सबसे फास्ट लिफ्ट भी लगाई गई है. इसके अलावा इमारत में दुनिया की सबसे ज्यादा आउटडोर ऑब्जर्वेशन डेक भी हैं.

कितना भारी है बुर्ज खलीफा?

कितना भारी है बुर्ज खलीफा?4 / 9

बुर्ज खलीफा जितना ऊंचा है, उतना ही उसे बनाने में कंक्रीट का भी इस्तेमाल किया गया है. इस इमारत का कुल वजन लगभग एक लाख हाथियों के बराबर बताया जाता है. इसके निर्माण में लगभग 12,500 क्यूबिक मीटर कंक्रीट का उपयोग किया गया है, जो इस इमारत को मजबूती और भूकंप रोधी भी बनाता है.

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कहां से मिलती है इमारत को मजबूती?

कहां से मिलती है इमारत को मजबूती?5 / 9

इमारत में इस्तेमाल हुई कंक्रीट को स्टील रिइंफोर्समेंट के साथ जोड़ा गया है, जो इसे मजबूत प्रदान करता है. इमारत के वजन को संभालने के लिए इसके नींव को भी काफी मजबूत और गहराई तक बनाया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक बुर्ज खलीफा 7.0 तीव्रता वाला भूकंप भी झेल सकता है.

कितनी गहरी है बुर्ज खलीफा की नींव

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आपको जानकर हैरानी होगी कि बुर्ज खलीफा की नींव लगभग 50 मीटर गहरी है. इसे मजबूत बनाने के लिए करीब 194 पाइल्स (स्तंभ) को जमीन में 164 फीट की गहराई तक गाड़ा गया है. ये पाइल्स ऊपरी ढीली मिट्टी को पार करते हुए नीचे चट्टानी जमीन तक पहुंचते हैं, जहां से इमारत को स्थिर आधार मिलता है. इस तरह की गहरी फाउंडेशन इमारत को झुकने या हिलने से बचाती है.  

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आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल

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नींव में दबी इन पाइल्स को आधुनिक और स्पेशल टेक्नोलॉजी से जमीन में घुसाया गया है, ताकि वे समुद्र तटीय इलाके की हल्की और नमी वाली मिट्टी पर भी भरोसेमंद रहें. पाइल्स को इस तरह से बिछाया गया है, जिससे हर स्तंभ पर बिल्डिंग का बराबर भार पड़े.

नमी और जंग से बचाने की तकनीक

नमी और जंग से बचाने की तकनीक8 / 9

बुर्ज खलीफा की नींव में लगे पाइल्स को नमी और जंग से नुकसान ना हो इसलिए उसकी सतह पर एक विशेष प्रकार की पॉलीथीन‑आधारित कोटिंग की गई है, जो इसे जंग से सुरक्षित रखती है. इस कोटिंग के कारण पाइल्स में जंग लगना या नष्ट होना काफी हद तक कम हो जाता है. जमीन के अंदर नम वातावरण में लंबे समय तक स्टील की मजबूती बनाए रखना इसी तकनीक से संभव होता है.

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भूकंप, हवा और दबाव को झेलने में सक्षम

भूकंप, हवा और दबाव को झेलने में सक्षम9 / 9

बुर्ज खलीफा की नींव को ऐसे डिजाइन किया गया है, जिससे 7.0 तीव्रता वाले भूकंप के झटके भी इमारत आसानी से झेल पाए. इसके अलावा इमारत से टकराने वाले तेज हवा और ऊपरी मंजिलों के भारी भार को संभालने के लिए नींव को डिजाइन किया गया है. इमारत की आंतरिक संरचना में भी विशेष डैम्पर और इंसुलेशन सिस्टम लगाए गए हैं, जो झटकों को कम करते हैं.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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