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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में भारत ने अपने 8 करोड़ डेयरी किसानों और अन्नदाताओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है. सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, दूध, घी, पनीर जैसे पारंपरिक उत्पादों के साथ-साथ जेनेटिकली मॉडिफाइड मक्का और सोयाबीन के आयात पर सख्त पाबंदी बनाए रखने का फैसला किया गया है.

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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में भारत ने अपने 8 करोड़ डेयरी किसानों और अन्नदाताओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है. सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, दूध, घी, पनीर जैसे पारंपरिक उत्पादों के साथ-साथ जेनेटिकली मॉडिफाइड मक्का और सोयाबीन के आयात पर सख्त पाबंदी बनाए रखने का फैसला किया गया है.

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ताजा दूध: ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले तरल दूध के बाजार को भारत ने पूरी तरह सुरक्षित रखा है. विदेशी दूध को अनुमति देने से स्थानीय कलेक्शन नेटवर्क और छोटे डेयरी किसानों को भारी नुकसान हो सकता है, इसलिए इस पर कोई रियायत नहीं दी गई है.

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देसी घी: भारत के घरों में देसी घी को सांस्कृतिक पहचान के रूप में भी देखा जाता है. इसलिए भारत सरकार ने इससे भी कोई समझौता नहीं किया है. अमेरिकी बटर ऑयल को भारतीय घी के बाजार में आने की अनुमति भी नहीं दी गई है, क्योंकि इससे स्थानीय कीमतों में भी गिरावट आने का खतरा था.

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पनीर और खोया: देश में शादियों और त्योहारों के सीजन में हर घर में पनीर और खोये का इस्तेमाल किया जाता है, इसलिए इसे भी आयात सूची से बाहर ही रखा गया है. सरकार का ऐसा मानना है कि स्थानीय हलवाइयों और छोटे डेयरी फार्मों का व्यापार सुरक्षित रहे और उन्हें किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े.

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मांसाहारी पशु आहार: भारत ने ऐसे किसी भी पशु आहार के आयात पर प्रतिबंध जारी रखा है जिसमें जानवरों के अंगों का अंश (जैसे ब्लड मील) शामिल हो. यह प्रतिबंध न सिर्फ धार्मिक कारणों से लगाया गया है बल्कि सुरक्षित डेयरी उत्पादों को भी सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है.

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जेनेटिकली मॉडिफाइड मक्का: भारत जीएम कॉर्न के आयात के सख्त खिलाफ है क्योंकि इससे स्थानीय जैव-विविधता और देसी बीज प्रणालियों को खतरा पहुंच सकता है.

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स्किम्ड मिल्क पाउडर: सरकार दूध की कीमतों में स्थिरता बनाए रखने और आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए SMP का उपयोग करती है. इसे व्यापारिक छूट से बाहर रखकर घरेलू कीमतों पर सरकारी नियंत्रण को और अधिक मजबूत बनाए रखा गया है.

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बेबी फूड और मिल्क फॉर्मूला: सरकार ने बच्चों के फूड और मिल्क फॉर्मूला को आयात रियायतों के दायरे से बाहर रखा है. भारत अपने सख्त गुणवत्ता मानकों और FSSAI के नियमों के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहता है.