68 साल पुरानी हॉलीवुड फिल्म, जिसमें दिखा दूसरे विश्व युद्ध का कड़वा सच, रूह कंपा देगी यहूदी सैनिकों की वो दास्तां

The Young Lions Classic War Movie: सिनेमा जगत में कई ऐसी फिल्में बनीं हैं, जो युद्ध पर आधारित थी. ऐसी ही एक फिल्म 1958 में बनी थी, जिसमें दूसरे विश्व युद्ध की क्रूरता के बारे में दिखाया गया. यहूदी सैनिकों की मानवीय पीड़ा देखकर हर किसी का दिल पसीज जाएगा.

the young lions war action movie
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the young lions war action movie

The Young Lions Classic War Movie: सिनेमा जगत में कई ऐसी फिल्में बनीं हैं, जो युद्ध पर आधारित थी. ऐसी ही एक फिल्म 1958 में बनी थी, जिसमें दूसरे विश्व युद्ध की क्रूरता के बारे में दिखाया गया. यहूदी सैनिकों की मानवीय पीड़ा देखकर हर किसी का दिल पसीज जाएगा.  

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दूसरे विश्व युद्ध से जुड़ी कहानियां

दूसरे विश्व युद्ध से जुड़ी कहानियां2 / 9

आज भी दूसरे विश्व युद्ध से जुड़ी कई कहानियां लोगों को डरा देती हैं. इन पर कई फिल्में बन चुकी हैं. जैसे कि 1958 में बनी ये 2 घंटे 47 मिनट की फिल्म, जिसे देखकर हर किसी का दिल पसीज जाएगा.

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कौन सी है फिल्म?

कौन सी है फिल्म?3 / 9

इस फिल्म का नाम है ‘द यंग लायंस’ (The Young Lions), जो 68 साल पहले आई थी. इसे हॉलीवुड का कल्ट क्लासिक स्टोरी कहा जाता है. इसका असर आज भी लोगों पर उतना ही पड़ता है. यह फिल्म युद्ध के कड़वे सच को दिखाती है.

फिल्म के 3 जरूरी किरदार

फिल्म के 3 जरूरी किरदार4 / 9

फिल्म इरविन शॉ के उपन्यास पर आधारित है. इसमें तीन मुख्य किरदार हैं. पहला है जर्मन स्की इंस्ट्रक्टर क्रिश्चियन डीस्टल (मार्लन ब्रैंडो), दूसरे हैं अमेरिकी यहूदी सैनिक नोआ अकरमैन (मॉंटगोमरी क्लिफ्ट, तीसरे हैं माइकल व्हाइटएकर (डीन मार्टिन).

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यहूदी सैनिकों की दास्तां

यहूदी सैनिकों की दास्तां5 / 9

फिल्म में मोंटगोमरी क्लिफ्ट ने 'नूह एकरमैन' (Noah Ackerman) नाम के एक यहूदी-अमेरिकी सैनिक की भूमिका निभाई है. वह न केवल युद्ध के मोर्चे पर दुश्मनों से लड़ता है, बल्कि अपनी ही यूनिट के भीतर यहूदी-विरोधी भेदभाव (Anti-semitism) और नफरत का सामना भी करता है.

आत्म सम्मान की लड़ाई

आत्म सम्मान की लड़ाई6 / 9

फिल्म में युद्ध सिर्फ जमीन पर नहीं हो रहा, बल्कि दिमागी तौर पर आत्म सम्मान से भी हो रहा है. यह फिल्म दिखाती है कि कैसे एक आदर्शवादी युवा शुरू में नाजी विचारधारा से प्रभावित होता है, लेकिन युद्ध की क्रूरता और अत्याचारों को करीब से देखकर उसका मोहभंग हो जाता है.

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कंसंट्रेशन कैंप का कड़वा सच

कंसंट्रेशन कैंप का कड़वा सच7 / 9

फिल्म के अंत में जब अमेरिकी सेना एक नाजी कंसंट्रेशन कैंप को मुक्त कराती है, तो वहां के दृश्य युद्ध की सबसे भयानक सच्चाई को बयां करते हैं. यह हिस्सा दर्शकों को झकझोर कर रख देता है.

ग्लैमर से हटकर युद्ध की सच्चाई

ग्लैमर से हटकर युद्ध की सच्चाई8 / 9

फिल्म युद्ध को ग्लैमर नहीं, बल्कि उसकी क्रूरता और मानवीय पक्ष दोनों दिखाती है. निर्देशक एडवर्ड ड्मिट्रीक ने इसे 167 मिनट में बखूबी पेश किया है. इसे 7.1 IMDb रेटिंग मिली है.

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कहां देखें यह फिल्म?

कहां देखें यह फिल्म?9 / 9

इस फिल्म को आप Amazon Prime Video पर देख सकते हैं. इसमें आपको कई क्रूरता से भरे सीन्स देखने को मिल सकते हैं. लेकिन यह एक अच्छी वॉर एक्शन फिल्म कहलाती है.

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