Property Rules: पिता ने बेटे के नाम कर दी पूरी प्रॉपर्टी? जानें क्या शादीशुदा बेटी का भी है कानूनी हक

Daughter Property Rights: क्या माता-पिता अपनी पूरी संपत्ति सिर्फ बेटे के नाम कर सकते हैं? जानें पैतृक और खुद की कमाई से बनी संपत्ति पर बेटियों के कानूनी अधिकार पर क्या कहता है कानून.

Property Rules
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प‍िता की संपत्‍त‍ि पर क‍िसका हक होता है. (फोटो क्रेड‍िट- एआई )

लड़की की शादी कर दी, अब उसका पिता की संपत्ति से क्या लेना-देना? या पिता ने पूरी जायदाद बेटे के नाम कर दी, तो अब बेटी क्या करेगी?  हमारे समाज में यह सोच बहुत आम है, लेकिन क्या कानूनी रूप से भी ऐसा ही है? अगर माता-पिता अपनी पूरी जायदाद सिर्फ बेटे के नाम ट्रांसफर कर दें, तो क्या बेटी खाली हाथ रह जाएगी? या फिर एक शादीशुदा बेटी के पास भी अदालत का दरवाजा खटखटाने का अधिकार है?

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क्‍या कहते हैं एक्‍सपर्ट?

क्‍या कहते हैं एक्‍सपर्ट? 2 / 6

गाज‍ियाबाद कोर्ट की सीन‍ियर एडवोकेट अैर संपत्‍त‍ि मामलों की जानकार रेणु अग्रवाल के अनुसार, किसी भी संपत्ति पर बेटी का कितना हक है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि संपत्ति खुद कमाई हुई (Self-Acquired) है या पैतृक (Ancestral).

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खुद की कमाई से खरीदी गई संपत्ति

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गाज‍ियाबाद कोर्ट की सीन‍ियर एडवोकेट रेणु अग्रवाल के अनुसार अगर माता-पिता ने अपनी मेहनत की कमाई से घर, जमीन या खेत खरीदा है, तो वे उस संपत्ति के पूर्ण मालिक होते हैं. माता-पिता जीवित रहते हुए अपनी संपत्ति बेटे को गिफ्ट डीड के जरिए दे सकते हैं या वसीयत बनाकर लिख सकते हैं कि उनकी मौत के बाद सब कुछ बेटे को मिले. तो क्या बेटी दावा कर सकती है? इस मामले में बेटी सिर्फ इसलिए कानूनी हक नहीं मांग सकती क्योंकि वह उनकी औलाद है. बेटी केवल तभी वसीयत या गिफ्ट डीड को कोर्ट में चुनौती दे सकती है, जब उसके पास यह साबित करने के सबूत हों कि माता-पिता से धोखे, दबाव, जबरदस्ती या धोखाधड़ी से दस्तखत कराए गए हैं.

पैतृक संपत्ति (Ancestral Property) में बेटियों का अधिकार

पैतृक संपत्ति (Ancestral Property) में बेटियों का अधिकार4 / 6

जब बात पीढ़ियों से चली आ रही पैतृक संपत्ति की आती है, तो नियम पूरी तरह बदल जाते हैं. हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005 के तहत बेटियों को पैतृक संपत्ति में बेटों के बराबर जन्मसिद्ध अधिकार (Coparcenary Right) मिला हुआ है. समाज में यह गलतफहमी है कि शादी के बाद बेटी का पैतृक संपत्ति से हक खत्म हो जाता है. कानूनन बेटी शादीशुदा हो या अविवाहित, उसका हक बेटों के बराबर ही रहेगा. अगर पिता पूरी पैतृक संपत्ति बेटे को दे दें? अगर पिता पूरी पैतृक संपत्ति सिर्फ बेटे के नाम रजिस्टर कर देते हैं, तो बेटी इसके खिलाफ कोर्ट जा सकती है और अपना कानूनी हिस्सा (Share) मांग सकती है.

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बिना वसीयत (Will) के माता-पिता की मौत हो जाए तो?

बिना वसीयत (Will) के माता-पिता की मौत हो जाए तो?5 / 6

रेणु अग्रवाल बताती हैं क‍ि अगर माता-पिता अपनी खुद की कमाई से बनाई गई संपत्ति की कोई वसीयत बनाए बिना गुजर जाते हैं (Intestate Death), तो पूरी संपत्ति सीधे बेटे की नहीं हो जाती. हिंदू उत्तराधिकार कानून के तहत संपत्ति माता-पिता के सभी कानूनी वारिसों, पत्‍नी/पति, बेटे, बेटी और मां में बराबर बांटी जाएगी. यहां भी इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि बेटी शादीशुदा है या नहीं, उसे उसका पूरा हिस्सा मिलेगा.

बेटी कब जा सकती है अदालत?

बेटी कब जा सकती है अदालत?6 / 6

अगर कोई बेटी अपने हक की लड़ाई लड़ना चाहती है, तो कोर्ट जाने से पहले इन बातों की जांच होती है: संपत्ति खुद की कमाई से खरीदी गई है या दादा-परदादा की पैतृक है? क्या संपत्ति ट्रांसफर करते वक्त धोखाधड़ी या दबाव बनाया गया था? क्या वसीयत बनाते वक्त माता-पिता की दिमागी हालत ठीक थी? अगर पैतृक संपत्ति में हिस्सा देने से मना किया गया है या किसी फर्जी दस्तावेज से संपत्ति हड़पी गई है, तो बेटी निसंकोच कानून की मदद ले सकती है.

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लेखक के बारे में

Vandana Bharti

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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