Tyre Changing Rule: एक गलती पड़ ना जाए भारी, जानें कब बदलना चाहिए गाड़ी का टायर?

क्या आपकी कार या बाइक के टायर सिर्फ बाहर से सही दिख रहे हैं? एक्सपर्ट्स के मुताबिक पुराने टायर अंदर से कमजोर हो सकते हैं और हाईवे पर बड़ा हादसा करा सकते हैं. जानिए 5 ईयर रूल, DOT कोड और वो संकेत जिनसे पता चलता है कि अब टायर बदलने का समय आ गया है.

tyre change rule
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कार हो या बाइक, सड़क पर सबसे जरूरी चीज टायर ही होते हैं. लेकिन कई लोग टायर तब तक इस्तेमाल करते रहते हैं, जब तक वह पूरी तरह घिस न जाए या बार-बार पंचर न होने लगे. अब ऑटो एक्सपर्ट्स 5 ईयर रूल को काफी अहम मान रहे हैं.

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 5 साल बाद क्यों जरूरी हो जाती है जांच?

 5 साल बाद क्यों जरूरी हो जाती है जांच?2 / 8

बाइक-कार मैकेनिक के मुताबिक, अगर किसी टायर को इस्तेमाल करते हुए 5 साल पूरे हो जाएं तो उसकी नियमित जांच करानी चाहिए. कई बार टायर बाहर से ठीक लगता है, लेकिन अंदर से उसकी रबर कमजोर हो चुकी होती है. धूप, गर्मी, बारिश और सड़क की गर्म सतह धीरे-धीरे टायर की क्वालिटी खराब करती रहती है.

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पुराने टायर में क्या खतरा होता है?

पुराने टायर में क्या खतरा होता है?3 / 8

ऑटो एक्सपर्ट्स बताते हैं कि समय के साथ टायर की रबर सख्त होने लगती है. इससे उसमें छोटे-छोटे क्रैक बन सकते हैं, जो आसानी से दिखाई भी नहीं देते. ऐसे टायर हाईवे पर तेज रफ्तार में ज्यादा खतरनाक साबित हो सकते हैं और अचानक फटने का खतरा बढ़ जाता है.

सिर्फ ट्रेड देखकर न करें भरोसा

सिर्फ ट्रेड देखकर न करें भरोसा4 / 8

कई लोग सिर्फ टायर की ट्रेड डेप्थ देखकर खुश हो जाते हैं. अगर पकड़ ठीक लग रही है तो वे टायर को सुरक्षित मान लेते हैं. लेकिन एक्सपर्ट्स के अनुसार 5 साल बाद टायर की अंदरूनी परत कमजोर हो सकती है. ऐसे में ऊपर से सही दिखने वाला टायर भी जोखिम पैदा कर सकता है.

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ऐसे पता करें टायर की असली उम्र

ऐसे पता करें टायर की असली उम्र5 / 8

हर टायर के साइड में DOT कोड लिखा होता है. इसके आखिरी चार अंक बताते हैं कि टायर कब बना था. उदाहरण के लिए अगर कोड में 3922 लिखा है, तो इसका मतलब टायर साल 2022 के 39वें हफ्ते में तैयार हुआ था. इसी को देखकर टायर की उम्र का पता लगाया जा सकता है.

स्टेपनी को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

स्टेपनी को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी6 / 8

सिर्फ चलने वाले टायर ही नहीं, बल्कि गाड़ी की स्टेपनी भी समय के साथ खराब हो सकती है. कई लोग सालों तक स्पेयर टायर चेक नहीं करते, जबकि उसका रबर भी धीरे-धीरे कमजोर पड़ता रहता है. जरूरत पड़ने पर पुरानी स्टेपनी भी खतरा बन सकती है.

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सोशल मीडिया पर भी लोग शेयर कर रहे अनुभव

सोशल मीडिया पर भी लोग शेयर कर रहे अनुभव7 / 8

ऑटो फोरम्स और सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने बताया कि कम इस्तेमाल होने वाली गाड़ियों के टायरों में भी 5-6 साल बाद क्रैक आने लगते हैं. कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर टायर 6 से 10 साल पुराने हो जाएं, तो उन्हें बदल देना ज्यादा सुरक्षित रहता है.

सुरक्षित ड्राइविंग के लिए क्या करें?

सुरक्षित ड्राइविंग के लिए क्या करें?8 / 8

अगर आपकी गाड़ी के टायर पुराने हो चुके हैं, तो सिर्फ बाहर से देखकर भरोसा न करें. समय-समय पर प्रोफेशनल से जांच कराएं और जरूरत पड़ने पर टायर बदल दें. सुरक्षित ड्राइविंग के लिए सही हालत में टायर होना सबसे जरूरी माना जाता है. (All Photos-Freepik)

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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