Helmet Expiry: हेलमेट की भी होती है एक्सपायरी! जानिए कितने टाइम बाद इसे बदलना चाहिए

क्या आप भी सालों से एक ही हेलमेट इस्तेमाल कर रहे हैं? अगर हां, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. हेलमेट बाहर से नया दिखने के बावजूद अंदर से कमजोर हो सकता है और हादसे के वक्त सही सुरक्षा नहीं दे पाएगा. जानिए हेलमेट की सही उम्र, उसे कब बदलना चाहिए

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दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनना केवल ट्रैफिक नियमों का पालन करना नहीं है, बल्कि यह आपकी जान बचाने का सबसे अहम सुरक्षा उपकरण भी है. हालांकि, कई लोग हेलमेट तब तक इस्तेमाल करते रहते हैं, जब तक वह टूट न जाए. लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, हर हेलमेट की एक तय उम्र होती है और समय के साथ उसकी सुरक्षा क्षमता कम होने लगती है, भले ही वह बाहर से बिल्कुल नया दिखाई दे.

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आखिर हेलमेट हमेशा सुरक्षित क्यों नहीं रहता?

आखिर हेलमेट हमेशा सुरक्षित क्यों नहीं रहता?2 / 7

हेलमेट की मजबूती सिर्फ उसकी बाहरी प्लास्टिक शेल पर निर्भर नहीं होती. इसके अंदर एक खास सुरक्षा फोम लगा होता है, जिसे EPS (Expanded Polystyrene) लाइनर कहा जाता है. दुर्घटना के समय यही फोम सिर पर लगने वाले तेज झटके को कम करने का काम करता है और गंभीर चोट से बचाने में अहम भूमिका निभाता है.

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रोजाना इस्तेमाल से कैसे कमजोर हो जाता है हेलमेट?

रोजाना इस्तेमाल से कैसे कमजोर हो जाता है हेलमेट?3 / 7

हर दिन हेलमेट पहनने पर पसीना, धूल, तेज गर्मी और वातावरण की नमी उसके अंदर मौजूद EPS फोम पर असर डालती है. धीरे-धीरे इस फोम की लचक कम होने लगती है और समय के साथ यह पहले जितना प्रभावी नहीं रह जाता. ऐसे में दुर्घटना होने पर हेलमेट सिर को उतनी अच्छी सुरक्षा नहीं दे पाता.

कितने साल में बदलना चाहिए हेलमेट?

कितने साल में बदलना चाहिए हेलमेट?4 / 7

सुरक्षा विशेषज्ञों और कई हेलमेट निर्माता कंपनियों का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में इस्तेमाल होने वाला हेलमेट लगभग पांच साल बाद अपनी सुरक्षा क्षमता का बड़ा हिस्सा खो सकता है. इसी वजह से खरीदने के करीब पांच साल बाद हेलमेट बदलने की सलाह दी जाती है, चाहे वह देखने में ठीक ही क्यों न लगे.

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लंबे समय तक रखने पर भी घट सकती है सुरक्षा

लंबे समय तक रखने पर भी घट सकती है सुरक्षा5 / 7

अगर हेलमेट का इस्तेमाल नहीं किया गया है और वह कई सालों से अलमारी या बॉक्स में रखा हुआ है, तब भी उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है. समय बीतने के साथ अंदर मौजूद EPS फोम धीरे-धीरे अपनी क्षमता खोने लगता है. इसलिए केवल नया जैसा दिखना यह साबित नहीं करता कि हेलमेट पूरी तरह सुरक्षित है.

कैसे समझें कि हेलमेट बदलने का टाइम आ गया है?

कैसे समझें कि हेलमेट बदलने का टाइम आ गया है?6 / 7

अगर हेलमेट पहनने के बाद सिर पर ढीला महसूस होने लगे, आसानी से इधर-उधर हिलने लगे या उसकी स्ट्रैप पहले की तरह सही फिट न हो, तो यह संकेत हो सकता है कि उसकी अंदरूनी पकड़ कमजोर हो चुकी है. इसके अलावा, अगर हेलमेट किसी बड़े एक्सीडेंट में इस्तेमाल हो चुका है, तो उसे तुरंत बदल देना चाहिए, भले ही बाहर से उसमें कोई दरार या नुकसान दिखाई न दे.

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 नया हेलमेट खरीदने के क्या हैं फायदे?

 नया हेलमेट खरीदने के क्या हैं फायदे?7 / 7

आज बाजार में पहले की तुलना में ज्यादा सुरक्षित, हल्के और आरामदायक हेलमेट मिलते हैं. इनमें बेहतर सुरक्षा मानकों के साथ मॉर्डन डिजाइन और बेहतर फिटिंग मिलती है. ऐसे हेलमेट न केवल दुर्घटना के समय बेहतर सुरक्षा देते हैं, बल्कि लंबी दूरी की यात्रा के दौरान भी आरामदायक रहता है. (Images Credit- Pexels.Magnific)

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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