बारिश में कार में घुस जाए पानी तो सबसे पहले कौन-सा पार्ट होता है खराब? जानें तुरंत क्या करें

बारिश के दौरान कार में पानी घुस जाना बेहद नुकसानदायक हो सकता है. यहां जानते हैं कि कार में पानी घुसन के बाद सबसे पहले क्या करना चाहिए और और गाड़ी के किस पार्ट को सबसे ज्यादा नुकसान होता है.

car flooded what to do
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car flooded what to do

देश के कई हिस्सों में बारिश के कारण जलभराव की स्थिति बनी हुई है. ऐसे में कार में पानी घुसने का खतरा भी बढ़ जाता है. पानी कार के अंदर पहुंचने पर जल्दबाजी में किया गया कोई गलत कदम भारी नुकसान करा सकता है. इसलिए सबसे पहले शांत रहें और सही तरीके से आगे बढ़ें.

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सबसे पहले कार स्टार्ट करने की गलती न करें

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अगर कार में पानी चला गया है तो सबसे जरूरी बात है कि इग्निसन ऑन करके या पुश बटन दबाकर इंजन स्टार्ट करने की कोशिश न करें. इंजन में पानी पहुंचने पर कार स्टार्ट करने से पानी सिलेंडर और पिस्टन तक जा सकता है. इससे इंजन लॉक होने के साथ इंजन ब्लॉक को भी नुकसान पहुंच सकता है और रिपेयर का खर्च लाखों रुपये तक पहुंच सकता है.

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सबसे पहले क्या करें?

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कार का इंजन स्टार्ट करने के बजाय सबसे पहले बोनट खोलकर बैटरी के तार डिस्कनेक्ट कर दें. इससे शॉर्ट सर्किट का खतरा कम होगा. इसके बाद कार को खुद चलाने के बजाय धक्का देकर या टो-ट्रक की मदद से किसी सूखी जगह ले जाएं.

पानी से सबसे पहले इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स होते हैं खराब

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आज कर की कारों में कई इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, सेंसर, वायरिेंग हार्नेस और इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट होते हैं. पानी इन तक पहुंचते ही शॉर्ट सर्किट का खतरा बढ़ जाता है. खासकर फर्श के नीचे की वायरिंग और डैशबोर्ट के पीछे मौजूद सेंसर जल्दी प्रभावित हो सकते हैं.

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इन इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स को भी हो सकता है नुकसान

इन इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स को भी हो सकता है नुकसान5 / 7

पानी के संपर्क में आने से इंफोटेनमेंट सिस्टम, पावर विंडो मोटर, डिजिटल क्लस्टर, एयरबैग मॉड्यूल और अल्टरनेटर जैसे पार्ट्स भी खराब हो सकते हैं. अगर पानी को समय पर साफ और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को अच्छी तरह ड्राई न किया जाए, तो कई महंगे पार्ट्स बदलने की जरूरत पड़ सकती है.

कारपेट, सीट और ब्रेक में भी पहुंचता है पानी

कारपेट, सीट और ब्रेक में भी पहुंचता है पानी6 / 7

कार का कारपेट और सीटों का फोन पानी तेजी से सोख लेते हैं. इन्हें समय पर निकालकर सुखाया न जाए तो दो तीन दिन में बदबू और फंगस की समस्या शुरू हो सकती है. वहीं ब्रेक पैड्स, रोटर, सस्पेंशन बुश और साइलेंसर में पानी जमा रहने से जंग लग सकती है. इससे ब्रेक फेल होने और गाड़ी से आवाज आने का खतरा बढ़ता है.

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कार को खुद ठीक करने के बजाय सर्विस सेंटर ले जाएं

कार को खुद ठीक करने के बजाय सर्विस सेंटर ले जाएं7 / 7

कार को सुरक्षित जगह पहुंचाने के बाद सबसे पहले इंश्योरेंस कंपनी को सूचना देकर क्लेम फाइल करें और सर्वेयर को गाड़ी की स्थिति देखने दें. इसके बाद कार को अधिकृत सर्विस सेंटर पर टो कराकर ले जाना बेहतर है.

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

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मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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