Parenting: बच्चे जैसे-जैसे बड़े होते जाते हैं वैसे-वैसे ही पेरेंट्स के लिए पैरेंटिंग स्टाइल को समझना और फॉलो करना मुश्किल होता जाता है. बच्चे को कभी कुछ ना कहा जाए तो वह जिद्दी होने लगता है और अगर उसपर हर समय ही चिल्लाते रहा जाए तो वह गुस्से में बात मानना ही छोड़ देता है. ऐसे में माता-पिता के सामने यह दिक्कत आती है कि वे बच्चे को इस सिचुएशन में कैसे हैंडल करें. अगर आप भी पेरेंटिंग की इन्हीं मुश्किलों (Parenting Problems) से दो-चार होते हैं तो यहां जानिए बच्चों की इस बात ना सुनने वाली आदत को कैसे हैंडल किया जा सकता है.
बच्चे बात ना मानें तो क्या करें | What Do If Children Don’t Listen
भाषण ना दें बल्कि आराम से कहें
बच्चे अगर बात नहीं मानते हैं तो उन्हें भाषण देने वाले मोड में ना आएं, इससे बच्चे को और खीझ उठती है और आपको चिढ़ाने के लिए भी बच्चे बात नहीं मानते हैं. भाषण वगैरह से बचें और आराम से बात करने की कोशिश करें. आप बच्चा एक बार अगर नहीं सुनता है तो उसपर चिल्लाने के बजाय 1-2 बार आराम से ही अपनी बात को दोहराएं.
बच्चे को समझने की कोशिश करें
कई बार पेरेंट्स बच्चों की बात ना मानने की आदत से इतने परेशान हो जाते हैं कि उनका पॉइंट ऑफ व्यू समझना ही भूल जाते हैं या समझने की कोशिश ही नहीं करते हैं. ऐसा करने पर बच्चे को लगता है कि आप उसे समझते नहीं हैं और इसीलिए वह भी आपको समझना या आपकी बात को मानना जरूरी नहीं समझता है.
बच्चे से सवाल ना करें बल्कि उन्हें बताएं
पेरेंट्स कई बार बच्चे से कोई बात कहते हैं तो उससे सवाल करते हैं कि क्या वह कोई सामान ला देगा, काम कर देगा या फिर साथ चलेगा या नहीं, इससे बच्चे को लगता है कि उसके पास ना कहने का ऑप्शन है. इसीलिए बच्चे से सवाल ना करें बल्कि उसे काम बताएं और प्यार से कहने की कोशिश करें. ‘क्या तुम प्लीज यह तकिया उठाकर वहां रख दोगे’ या फिर ‘क्या तुम प्लीज टेबल सेट कर दोगे’ कहें जिससे कि बच्चा आपकी बात को माने और इनकार ना कर सके.
बच्चे को एकसाथ बहुत सारे काम बता देने से वह परेशान हो जाता है और फिर होता यह है कि वह आपके बताए किसी भी काम को नहीं करता है. ऐसे में बच्चे को इस तरह बहुत सारे काम करने का ऑर्डर ना दें बल्कि एक समय पर एक ही काम बताएं जिससे कि बच्चा उठकर उस काम को कर दे और आपकी बात मान ले. इससे बच्चे को यह नहीं लगता है कि उसके खेल या पढ़ाई पर असर पड़ता है.
छोटे बच्चे विकास की स्टेज पर होते हैं. उनकी भाषा और समझ का भी विकास हो रहा होता है जिससे कि कई बार उन्हें आपकी बात समझने में परेशानी होती है और वह आपकी बात को प्रोसेस नहीं कर पाता है. ऐसे में बच्चों से लंबी-चौड़ी या घुमा-फिराकर बातें कहने से बचें और उससे सटीक बात ही कहें.