Low Confidence Reasons: ऐसे बहुत से पुरुष हैं जो अंडरकोंफिडेंट फील करते हैं, उन्हें किसी से बात करने के लिए कहा जाता है तो घबरा जाते हैं, खुद के निर्णय लेने से डरते हैं, कुछ नया शुरू करने में झिझकते हैं और खुद को किसी रोल के लिए काबिल नहीं समझते. कोंफिडेंस कम होने पर ना सिर्फ निजी जिंदगी बल्कि प्रोफेशनल जिंदगी पर भी प्रभाव पड़ता है. इसी बारे में बताते हुए कैंसर स्पेशलिस्ट डॉ. सन्नी गर्ग ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल से एक वीडियो शेयर किया है और बताया है कि पुरुषों की वो कौन सी 10 आदतें हैं जो उनके कोंफिडेंस को कम (Low Confidence) करती हैं. यहां जानिए, कहीं आप भी तो नहीं करते यही गलतियां.
ये 10 आदतें पुरुषों के कोंफिडेंस को कम करती हैं
कंफ्रन्टेशन से दूर भागना
आप अगर किसी बात से डरते हैं और उसका सामना करने से बचते हैं तो यही बात आपको छोटा महसूस करवाती है.
अगर आप शारीरिक रूप से फिट नही हैं, आपका लाइफस्टाइल खराब है और आप उसे सुधारने की कोशिश नहीं करते हैं तो इससे आपका कोंफिडेंस भी कम होता है. फिजीकली वीक होने का असर दिमाग पर भी पड़ता है.
अश्लील वीडियो, रील्स और दिनभर फोन की स्क्रीन स्क्रॉल करते रहने से बहुत ज्यादा प्लेजर से डोपामिन ओवरलोड हो जाता है और कुछ और करने की इच्छा मर जाती है. कोंफिडेंस एफर्ट से बनता है और एफर्ट करने की इच्छा ही नहीं रहती तो कोंफिडेंस कम होने लगता है.
अगर आप फाइनेंशियली स्ट्रोंग नहीं होंगे, कोई सेविंग्स नहीं होंगी या कुछ प्लानिंग करके नहीं रखेंगे तो आपका कोंफिडेंस हमेशा कम रहेगा. पैसे पर कमांड नहीं रहेगी तो जिंदगी पर भी कमांड नहीं रहेगी.
कोई भी निर्णय लेने से पहले अगर आपको किसी और की हामी की जरूरत होती है या कहें अप्रूवल की जरूरत होती है तो इसका मतलब है कि आप कोंफिडेंट नहीं हैं. कुछ भी निर्णय लेने से पहले यह सोचना कि लोग क्या कहें, आपके कोंफिडेंस को कम करता है.
किसी और से अपनी तुलना करने पर आपका कोंफिडेंस बढ़ता नहीं है बल्कि कम होता है. इससे फोकस ग्रोथ से शिप्ट होता है.
खुद की कही बात पूरी ना करना
अगर आप खुद की कही बात को ही पूरा नहीं करेंगे तो इससे आपका ही कोंफिडेंस कम होगा. आप दुनिया से तो झूठ बोल सकते हैं लेकिन खुद से नहीं.
अगर आप ग्रूम्ड नहीं रहते हैं या अपनी ग्रूमिंग पर ध्यान नहीं देते हैं और आपका लुक बिखरा-बिखरा सा लगता है तो इससे आपका आत्मविश्वास कम होता है. इससे आपको खुद ऐसा लगता है जैसे आप खुद को ही वैल्यू नहीं करते हैं. दुनिया पर भी फिर यही रिफ्लेक्ट करता है.
हर चीज के लिए अपने माता-पिता को दोष देना, सिस्टम को दोष देना या फिर अपनी किस्मत को दोष देना अपनी असल पावर को खोने जैसा है. जबतक आप दूसरों को दोष देते रहेंगे तबतक अपनी पावर खोते रहेंगे.
कोई मिशन नहीं, कोई दिशा नहीं
अगर आपका कोई लक्ष्य नहीं है या किस दिशा में आगे बढ़ना है आपको यह नहीं पता है तो आपकी एनर्जी भी फ्लैट होगी. आगे बढ़ते रहना है कोंफिडेंस को बूस्ट करता है.
आखिर में डॉक्टर कहते हैं कि कोंफिडेंस मोटिवेशन से नहीं आता बल्कि सेल्फ रिस्पेक्ट से आता है और सेल्फ रिस्पेक्ट आपकी रोज की आदतों से बढ़ती है. ऐसे में अपनी रोजमर्रा की गलतियां और आदतें सुधारकर कोंफिडेंस बढ़ाया जा सकता है.