Ramzan Taraweeh Ki Namaz: तरावीह की नमाज कैसे पढ़नी चाहिए? यहां जानिए दुआ लेकर नियत करने का तरीका

Taraweeh Ki Namaz 2026: आज रामज़ान का चांद दिखने के बाद तरावीह की नमाज़ शुरू हो जाती है और महीने के आखिर तक चलती है. ऐसे में आज हम आपको बता रहे हैं कि रमज़ान में पढ़ी जाने वाली तरावीह करने की नियत या तरावीह पढ़ने का सही तरीका क्या है.   

taraweeh ki namaz kaise padhte hain

तरावीह की नमाज़ क्या है? Image Credit- Freepik

How To Perform Taraweeh Namaz: रमज़ान का पाक महीना शुरू हो रहा है और आज से लोग तरावीह की नमाज पढ़ना शुरु कर देंगे. रोज़े के साथ-साथ सदका, जकात और 5 वक्त की नमाज अदा की जाती है और कुरान पढ़ा जाता है. कुरान के मुताबिक जन्नत की कुंजी में से एक कुंजी नमाज है. ऐसे ही रमज़ान के रोज़े रखना वाजिब है. रमज़ान के महीने में अल्लाह की खूब रहमत बरसती है. बुराई पर अच्छाई हावी हो जाती है और लोग एक-दूसरे को सिर्फ दुआ ही देते हैं. हालांकि, लोग 5 वक्त की नमाज के साथ-साथ तरावीह की नमाज पढ़ते हैं. वहीं, महिलाएं घर पर 20 रकात तरावीह की नमाज पढ़ती हैं. ऐसे में अगर आप रमज़ान के महीने में तरावीह की नमाज पढ़ रही हैं और आपको सही तरीका नहीं पता तो यह लेख आपके लिए मददगार साबित हो सकता है.

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तरावीह की नमाज क्या है?

रमज़ान में ईशा की नमाज के बाद तरावीह की नमाज पढ़ी जाती है. इसमें 20 रकात होती हैं और हर 4 रकात के बाद तरावीह की दुआ पढ़ी जाती है. बता दें, तरावीह एक अरबी भाषा का शब्द है जिसका मतलब होता है आराम और तेहेरना. हालांकि, तरावीह की नमाज महिला और पुरुष दोनों पर फर्ज है, लेकिन महिला कुरान की 10 सुरतों वाली तरावीह पढ़े तो सही माना जाता है.

तरावीह की नियत

तरावीह की नमाज पढ़ने में लगभग 2 घंटे लगते हैं, जिसे पूरे रमज़ान पढ़ना लाज़िमी हैं. मगर इसका सवाब तभी मिलता है, जब यह बिना किसी गेप किए पढ़ी जाती हैं. हमें तरावीह रमज़ान के बीच में नहीं छोड़नी चाहिए. आइए अब जानते हैं कि तरावीह की नियत करने का सही तरीका क्या है.

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तरावीह की नमाज का तरीका

तरावीह की नमाज पढ़ने का तरीका महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग होता है, जैसे अगर आप किसी के पीछे यानी जमात के साथ तरावीह की नमाज पढ़ रहे हैं, तो इसमें कुरान की तिलावत की जाती है. वहीं, अगर आप घर पर तरावीह पढ़ रहे हैं तो दो-दो रकात में 30वें पारे की 10 सूरतें पढ़ी जाती हैं. सिर्फ महिलाएं घर पर तरावीह की नमाज अदा कर सकती हैं.

तरावीह की दुआ

जिस तरह रमज़ान में रोज़ा रखने की दुआ पढ़ना जरूरी है. उसी तरह तरावीह की दुआ पढ़ना भी लाज़िमी है. माह-ए-रमजान में तरावीह की दुआ के बहुत मायने हैं और अगर बिना दुआ के नमाज पढ़ी जाती है, तो तरावीह का सवाब कम मिलता है।

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हिंदी में तरावीह की दुआ

सुबहान ज़िल मुल्कि वल मलकूत, सुब्हान ज़िल इज्ज़ति वल अज़मति वल हय्बति वल कुदरति वल किबरियाई वल जबरूत, सुबहानल मलिकिल हैय्यिल लज़ी ला यनामु वला यमुतू सुब्बुहून कुददुसुन रब्बुना व रब्बुल मलाइकति वर रूह, अल्लाहुम्मा अजिरना मिनन नारि या मुजीरू या मुजीरू या मुजीर

तरावीह की दुआ इंग्लिश में

Subhana zil mulki wal malakut. Subhana zil izzati wal azmati wal haibati wal qudrati wal kibriya ay wal jabaroot. Subhanal malikil hayyil lazi la yanaamo wala yamato subbuhun quddusun rabbuna wa rabbul malaikati war ruh-allahumma ajirna minan naar ya mujiro ya mujiro ya mujeer.

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तरावीह की दुआ उर्दू में

سبحان ذي الملك و الملكوت سبحان ذي العزة و الجبروت سبحان الحي الذي لا يموت
سبحان الذي خضعت لعظمته الرقاب سبحان الذي ذلت لجبروته الصعاب سبحان رب الأرباب مسبب الأسباب
سبحان خالق الخلق من تراب سبحان الذي في السماء عرشه و في الأرض سلطانه
سبحان الذي لا تراه في الدنيا العيون و لا تخالطه الظنون

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लेखक के बारे में

Shadma Muskan

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शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
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