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सऊदी में पहले और भारत में एक दिन बाद क्यों शुरू होता है रमजान? जानिए चांद देखकर कैसे तय होती है रमजान की तारीख

Ramadan 2026: रमजान के करीब आते ही लोगों के मन में एक सवाल हमेशा उठ जाता है कि आखिर सऊदी अरब और दूसरे अरब देशों में भारत से एक दिन पहले रोजा रखने की परंपरा क्यों शरू हो जाती है? आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की असल वजह और भारत में कब है पहला रोजा.

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सऊदी अरब से एक दिन बाद भारत में रोजा क्यों रखा जाता है? (Image: AI)

Ramadan 2026 in India: हर साल रमजान का महीना शुरू होते ही एक सवाल हमेशा लोगों के मन में उठने लगता है कि, आखिर सऊदी अरब में रोजा पहले क्यों शुरू हो जाता है, जबकि भारत में एक दिन बाद? जैसे ही चांद देखने की खबरें आती हैं, सोशल मीडिया पर बहस तेज हो जाती है. कुछ लोग इसे समय का अंतर मानते हैं, तो कुछ इसे धार्मिक नियमों से जोड़ते हैं. कई घरों में भी यह चर्चा होती है कि आखिर ऐसा क्यों होता है और सही वजह क्या है. क्या यह सिर्फ लोकेशन का फर्क है, या इसके पीछे कोई खास खगोलीय नियम काम करता है? चांद देखकर तारीख तय करने की परंपरा कैसे काम करती है? आइए आसान और स्पष्ट शब्दों में समझते हैं इन सभी सवालों के जवाब.

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चांद देखकर ही क्यों तय होती है रमजान की तारीख?

इस्लामिक कैलेंडर चांद की गति पर आधारित है, जिसे हिजरी कैलेंडर कहा जाता है. इसमें हर महीना 29 या 30 दिनों का होता है. हालांकि, जब शाबान का महीने का चांद खत्म होता है और नया चांद दिखाई देता है, तो रमजान शुरू माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, चांद देखने की गवाही के बाद ही नए महीने की आधिकारिक घोषणा की जाती है. इसलिए सिर्फ तारीख देखकर नहीं, बल्कि चांद दिखना भी बहुत जरूरी होता है.

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क्यों अलग-अलग दिन शुरू होता है रमजान?

इस्लाम में रमजान की शुरुआत तभी मानी जाती है जब नए चांद को नंगी आंखों से देख लिया जाए. हर देश में चांद देखने के लिए एक आधिकारिक कमेटी होती है, जो नए चांद पुष्टि के बाद ही ऐलान करती है. चूंकि सऊदी अरब और भारत की भौगोलिक स्थिति अलग है और सऊदी भारत से पश्चिम दिशा में स्थित है, इसलिए कई बार वहां सूर्यास्त के बाद नया चांद पहले दिखाई दे जाता है. वहीं भारत में उसी समय चांद बहुत पतला होने, मौसम साफ न होने या उसकी स्थिति अलग होने के कारण नजर नहीं आ पाता. ऐसी स्थिति में भारत में चांद दिखने का इंतजार किया जाता है और अगले दिन पुष्टि होने पर रमजान की शुरुआत घोषित की जाती है. यही वजह है कि अक्सर भारत में रमजान सऊदी अरब और दूसरे अरब देशों से एक दिन बाद शुरू होता है.

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पहला रोजा कब रखा जाता है?

पहला रोजा उसी दिन रखा जाता है, जब आधिकारिक रूप से चांद दिखने की पुष्टि हो जाती है. इस बात को समझें कि इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, नया दिन सूरज डूबने के बाद शुरू होता है, यानी तारीख चांद दिखने के बाद बदलती है. जैसे ही रमजान का चांद दिख जाता है, उसी वक्त से नया महीना शुरू हो जाता है, तारीख बदल जाती है और सुबह सूरज निकलने से पहले रोजा रखा जाता है. भारत में अलग-अलग राज्यों में चांद देखने की कमेटियां होती हैं, जो पुष्टि के बाद घोषणा करती हैं. इसलिए लोगों को सलाह दी जाती है कि वे स्थानीय मस्जिद या आधिकारिक ऐलान पर ही भरोसा करें.

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भारत में कब है पहला रोजा?

सऊदी अरब में 17 फरवरी को चांद दिख गया है और आज से वहां रोजा शुरू हो गया है. उम्मीद लगाई जा रही है कि अगर आज यानी 18 फरवरी को चांद दिख जाता है, तो रमजान 19 फरवरी से शुरू हो जाएगा. रमजान का महीना इबादत, सब्र और आत्मशुद्धि का समय होता है, इसलिए अपने इस कीमती महीने को जाया न जाने दें. 11 महीनों में यह एक महीना बहुत खास है, अक्सर लोग पिछले 11 महीनों में अपने अंदर कई बुरी आदतें डाल लेते हैं, जिस कारण उनका रमजान जाया हो जाता है, इसलिए बेहतर रहेगा कि आप जिम्मेदारी समझें और सही तरीके से रोजा व इबादत कर इस पवित्र महीने का हिस्सा बनें.

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लेखक के बारे में

Azhar Naim

अज़हर नईम एक डिजिटल पत्रकार हैं. अज़हर नईम News24 Bag Convergence में सब-एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. यहां वह मुख्य रूप से लाइफस्टाइल, हेल्थ और वायरल सेक्शन से जुड़ी खबरें लिखते हैं. उन्होंने साल 2024 में श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (BJMC) की डिग्री हासिल की. पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान उन्होंने इंडिया न्यूज और खबरफास्ट जैसे मीडिया संस्थानों के साथ काम किया, जहां उन्हें डिजिटल न्यूज रिपोर्टिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव मिला. इसके बाद उन्होंने एक साल से ज्यादा समय तक (2024-2026) इंडिया डॉट कॉम (Zee Media) में ट्रेनी के तौर पर काम किया और हेल्थ, लाइफस्टाइल, वायरल, ट्रेंडिंग, न्यूज और टेक्नोलॉजी समेत कई बीट्स पर डिजिटल कंटेंट तैयार किया. अपने अब तक के अनुभव में अज़हर डिजिटल मीडिया के बदलते ट्रेंड्स को समझने, SEO-फ्रेंडली कंटेंट तैयार करने और पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए उपयोगी व आकर्षक स्टोरीज लिख रहे हैं. अज़हर नईम का पत्रकारिता में अनुभव कुल अनुभव: 2 साल से ज्यादा योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: उन्होंने श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (BJMC) की डिग्री हासिल की. पिछला अनुभव: अज़हर ने न्यूज 24 से पहले इंडिया न्यूज़, खबरफास्ट और इंडिया डॉट कॉम (Zee Media) में अपनी पत्रकारिता की समझ और अनुभव को और मजबूत किया. अपने प्रोफेशनल सफर में उन्होंने दिल्ली ब्लास्ट, जम्मू-कश्मीर ब्लास्ट, ईरान-अमेरिका युद्ध, रूस-यूक्रेन युद्ध और कई विधानसभा चुनावों के अलावा लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसे विविध विषयों पर कंटेंट तैयार किया है. विशेषज्ञता और फोकस अज़हर नईम को लाइफस्टाइल और हेल्थ का खासा अनुभव है, वह इन खबरों को आसान भाषा में समझाने में माहिर हैं और इन्हीं से जुड़ी स्टोरी पर लगातार काम कर रहे हैं. इसके अलावा उन्हें टिप्स और ट्रिक्स, स्किन केयर, हेयर केयर, किचन-गार्डनिंग और फैशन से जुड़ी खबरों में भी महारत हासिल है.
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