हिचकी एक ऐसी समस्या है, जो कभी भी किसी को भी परेशान कर देती है. आमतौर पर ये 1-2 मिनट में ठीक हो जाती है, लेकिन जब यह समस्या 15 मिनट या फिर उससे ज्यादा समय तक बनी रहे, तो दिल में डर बैठ जाता है कि हिचकी रुकेगी न? ये समस्या आमतौर पर खाना खाते वक्त अक्सर होती है, लेकिन लंबे समय तक बना रहना परेशानी का कारण बन जाती है. ऐसे में अगर आप भी काफी देर से हिचकी से परेशान है और जल्द से जल्द इस समस्या से राहत पाना चाहते हैं, तो आइए आपको बताते हैं आप कैसे हिचकियों से छुटकारा पा सकते हैं.
यह भी पढ़ें: तांबे के लोटे में पीते हैं पानी तो सावधान! ये 2 गलतियां फायदे की जगह शरीर में भर देंगी कॉपर टॉक्सिसिटी
हिचकी कैसे आती है?
Harvard Health Publishing के अनुसार, हिचकी एक रिफ्लेक्स है, जिसमें हमारी सांस लेने वाली मांसपेशी यानी डायफ्राम अचानक सिकुड़ जाती है. इसके साथ पसलियों के बीच की मांसपेशियों में भी झटका लगता है, जिससे हम अचानक सांस अंदर खींचते हैं. इसी दौरान गले में वोकल कॉर्ड्स के पास मौजूद जगह बंद हो जाती है और ‘हिक’ की आवाज निकलती है. यही आवाज हिचकी कहलाती है और मेडिकल भाषा में इसे ‘सिंगल्टस’ (Singultus) कहा जाता है, जो की काफी आम समस्या है.
किन कारणों से पैदा हो सकती है हिचकी की समस्या?
अब सवाल उठता है कि आखिर किन-किन कारणों से हिचकी की समस्या पैदा होती है, तो बता दें कि; ज्यादातर मामलों में हिचकी का कोई खास मकसद नहीं होता और ये अपने-आप ठीक हो जाती हैं, आमतौर पर 30 या उससे ज्यादा बार हिचकी आने के बाद सामान्य हो जाती है. हिचकी के पीछे कुछ छोट-मोटे कारण इस प्रकार हो सकते हैं;
- बहुत ज्यादा खाना खाने, बहुत ज्यादा शराब पीने या पेट में बहुत ज्यादा हवा भरने की वजह से ये समस्या हो सकती है.
- शरीर के बाहर या अंदर तापमान में अचानक बदलाव होने से
- सिगरेट पीना के कारण भी
- बहुत उत्साह, तनाव या दूसरी भावनाएं में भी ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है
कैसे मिलेगी हिचकी से जल्दी राहत?
- जीभ को हल्का खींचें: जीभ को धीरे से बाहर खींचने या पानी निगलने से हिचकी रोकने में मदद मिल सकती है.
- चीनी या पानी का इस्तेमाल करें: थोड़ी दानेदार चीनी निगलने, बर्फ जैसा ठंडा पानी छोटे-छोटे घूंट में पीने या पानी से गरारे करने से भी राहत मिल सकती है.
- नींबू चखें: नींबू का छोटा टुकड़ा चखने से मुंह और गले में अलग तरह की अलर्ट पैदा होती है, जो हिचकी रोकने में मदद कर सकती है.
- गर्दन के पीछे हल्की मालिश करें: गर्दन के पिछले हिस्से को धीरे-धीरे रगड़ने या हल्की थपकी देने से राहत मिल सकती है.
- सांस लेने के तरीके पर ध्यान दें: कुछ सेकंड के लिए आराम से सांस रोकने की कोशिश कर सकते हैं.
- घुटनों को छाती के पास लाएं: बैठकर अपने घुटनों को छाती के पास लाएं और थोड़ा आगे की ओर झुकें. इस तरीके से भी हिचकी में राहत मिल सकती है.
- ध्यान कहीं और लगाएं: हिचकी से ध्यान हटाने के लिए कोई हल्का काम करें, बातचीत करें या किसी दूसरी एक्टिविटी में व्यस्त हो जाएं.
इस बात पर ध्यान दें: हिचकी रोकने के लिए गले में कॉटन स्वैब या कोई दूसरी चीज डालने से बचें, क्योंकि इससे चोट लग सकती है. पेपर बैग में सांस लेने का तरीका भी न अपनाएं, क्योंकि इससे ऑक्सीजन की कमी हो सकती है. अगर हिचकी 48 घंटे से ज्यादा बनी रहे या बार-बार परेशानी पैदा करे, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें.
यह भी पढ़ें: प्याज के छिलकों में छिपा है ये ब्यूटी सीक्रेट, बालों को घना-मुलायम बनाने के लिए ऐसे करें इस्तेमाल
अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.
संबंधित खबरें
2 साल के बच्चे के लिए कितना होना चाहिए स्क्रीन टाइम? WHO ने बताया
1 hr agoभाग्यश्री ने बताया बच्चों को चुकंदर खिलाने का तरीका, शेयर की रेसिपी
10 hrs agoकरवा चौथ पर लाल ही नहीं, इन रंगों के कपड़ों में भी दिखेंगी बेहद खूबसूरत
10 hrs agoबाथरूम में कदम रखते ही आती है बदबू तो टॉयलेट सीट पर छिड़क दें यह चीज
11 hrs agoऑनलाइन शॉपिंग पड़ सकती है भारी, ठगी से बचने के लिए अपनाएं ये टिप्स
11 hrs agoरूसी से सिर में होती है खुजली तो मेथी का यह नुस्खा आएगा काम, यहां जानिए
13 hrs agoनहीं है आलता तो इन चीजों से कीजिए तैयार, यहां जानिए घर पर Alta कैसे बनाएं
13 hrs agoकरवा चौथ पर पत्नी के लिए खुद से बनाएं स्वादिष्ट गुलाब जामुन
1 day agoदिवाली पर चमक उठेगा घर का पुराना फर्नीचर, जैतून के तेल से करें ये काम
1 day agoइमर्शन रॉड पर जम गई है सफेद पपड़ी? इन तरीकों से करें साफ
1 day agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
SOURCE: Harvard Health Publishing
First published on:
Know More: Editorial Guidelines