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बदलती सोच, बदली सफलता की परिभाषा! जानिए क्यों Gen Z करियर की दौड़ से बना रहे हैं दूरी, हैरान कर देगी वजह

करियर को लेकर आपने लोगों को बहुत ज्यादा सीरियस देखा हो, जहां वह वक्त बीत जाने के बाद भी घंटों तक काम करते रहते हैं, ताकि उनका प्रमोशन हो और सैलरी बढ़ें. लेकिन Gen Z ने अब सफलता की इस दौड़ से ही दूरी बना ली है और एक नई परिभाषा बनाई है, जिसके बारे में हम आपको इस स्टोरी में बताएंगे.

Gen Z क्यों नहीं ले रहे करियर को सीरियस

भारत में Gen-Z युवाओं ने सफलता को देखने का नजरिया पूरी तरह बदल दिया है. एक समय था जब अच्छी सैलरी, ऊंचा पद और मेहनत के जरिए प्रमोशन ही कामयाबी मानी जाती थी. लेकिन अब युवा इस दौड़ पर सवाल उठा रहे हैं. ऐसा नहीं है कि वह काम नहीं करना चाहते या मेहनत से पीछे हट रहे हों, बल्कि उस काम को चुनना चाहते हैं जिसमें उन्हें सुकून, संतुलन और निजी खुशी मिले. हाल के सर्वे बताते हैं कि बड़ी संख्या में युवा अब खुद को ज्यादा एंबिशियस नहीं मानते. उनके लिए इन सबसे ज्यादा मायने कुछ और ही रखता है, आइए जानते हैं क्या सोचते हैं आज के Gen Z?

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Gen Z ने रखी सफलता की नई परिभाषा

आज की Gen Z सफलता को सिर्फ पैसा या पद से नहीं आंकती. उनके लिए काम का मतलब है ऐसा जीवन है, जिसमें तनाव कम हो और खुद के लिए अच्छा समय मिले. कई सर्वों के मुताबिक, कई युवा मानते हैं कि अगर नौकरी उन्हें मानसिक सुरक्षा और तय समय देती है, तो वे कम सैलरी पर भी काम करने को तैयार हैं. लेकिन लंबे वर्किंग ऑवर्स और लगातार दबाव को वे अब सफलता की निशानी नहीं मानते. उनके लिए बेहतर जिंदगी, अच्छा स्वास्थ्य और संतुलन ज्यादा मायने रखता है. वो वक्त पहले हुआ करता था, जब लोग ज्यादा सैलरी के लिए ज्यादा काम करते थे और उनके काम के बदौलत उन्हें बड़े पद पर प्रमोशन मिलता था. अब कहीं न कहीं ये दौड़ धीमी पड़ने लग रही है.

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क्यों Gen Z नौकरी छोड़ने या प्रमोशन ठुकराने का आसानी से ले लेते हैं फैसला?

हाल के सर्वों के मुताबिक, अचानक नौकरी छोड़ देना और करियार ज्यादा ध्यान न देने की कई वजह हैं, जो एक उनके लिए बहुत मायने रखती है, इनमें;

  • मेंटल हेल्थ की चिंता: लगातार दबाव, टारगेट और बर्नआउट से बचने के लिए युवा ऐसे रोल छोड़ रहे हैं जो मानसिक नुकसान पहुंचाते हैं और उनका थका देते हैं.
  • वर्क-लाइफ बैलेंस की चाह: प्रमोशन के साथ बढ़ता काम और कम निजी समय उन्हें बिल्कुल भी स्वीकार नहीं है. वे सीमाएं तय करना चाहते हैं कि एक व्यक्ति को उसके क्षमता से ज्यादा काम नहीं दिया जाए और घर जाने या टाइम पूरा होने के बाद काम के लिए नहीं बोला जाए.
  • भविष्य का डर: छंटनी और महंगाई के चलते युवाओं में नौकरी को लेकर डर भी है, वह अपनी जीवन में स्थिरता चाहते हैं, न कि सिर्फ बड़ी पोस्ट. कई लोगों का कहना है कि क्या फायदा ऐसी जगह नौकरी करने का जहां बड़ी पोस्ट वालों को भी कभी भी निकाल दिया जाता है. ऐसे में वह कहां जाएंगे और कैसे चीजें संभालेंगे.
  • स्वतंत्रता और लचीलापन: नौकरी को छोड़कर Gen-Z फ्रीलांस या छोटे रोल को ज्यादा तरजी दे रहे हैं, क्योंकि इससे उन्हें ज्यादा कंट्रोल और आजादी मिलती है. वे मानते हैं कि खुश रहकर काम करना, लगातार तनाव में जीने से बेहतर है.

कॉर्पोरेट कल्चर में दिख रहा सबसे ज्यादा बदलाव

यह ट्रेंड खासतौर पर आईटी, मीडिया, स्टार्टअप और कंसल्टिंग जैसे सेक्टर्स में साफ दिख रहा है. पहले जहां लंबे घंटे और तेज रफ्तार काम आम था, वहीं अब युवा साफ कहते हैं कि वे बिना लचीलापन और सही मेहनताना के लीडरशिप रोल नहीं चाहते. कई कर्मचारी प्रमोशन लेने से मना कर रहे हैं और सिर्फ उतना ही काम कर रहे हैं जितना जरूरी हो.

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