Bache Ko Kaise Padhaye: बच्चों को अक्सर ही पढ़ने के अलावा सबकुछ अच्छा लगता है. पढ़ाई तो बच्चों के लिए किसी बोझ से कम नहीं होती है. बच्चों को सोने, खाने या खेलने के लिए कभी नहीं कहना पड़ता लेकिन जब पढ़ने की बारी आती है तो बच्चों के पास दुनियाभर के बहाने तैयार होते हैं. ऐसे में माता-पिता के लिए हर दिन बच्चे को पढ़ने बिठाना सिर का दर्द बन जाता है. लेकिन, पैरेंट्स अगर कुछ सही ट्रिक्स आजमाएं तो बच्चे को बिना ज्यादा जद्दोजहद किए पढ़ने बिठाया जा सकता है. यहां जानिए कौन सी हैं वो ट्रिक्स जिन्हें आजमाने पर बच्चे खुद ही पढ़ने बैठ जाते हैं और उनका पढ़ाई में मन भी लगता है.
कैसे लगेगा बच्चे का पढ़ाई में मन | How To Make Kids Study
बच्चे की परेशानी समझें
आपको सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि बच्चे का पढ़ाई में मन क्यों नहीं लग रहा है या कौन सी दिक्कत है जिसकी वजह से बच्चा पढ़ नहीं पा रहा है. बच्चे की परेशानी को उसे सुलझा दिया जाए तो बच्चे का पढ़ने में मन लगता है. मान लीजिए बच्चे को किसी विषय में इंटरेस्ट नहीं है तो आप उसे उसी एक विषय पर ज्यादा अच्छे से पढ़ा सकते हैं या अगर वह मटीरियल समझ नहीं पा रहा है तो आप उसकी मदद कर सकते हैं. बच्चे की पढ़ाई के समय ही अगर टीवी का कोई शो आ रहा हो तो जायजतौर पर उसका मन नहीं लगेगा. ऐसे में बच्चे के पढ़ने का समय बदला जा सकता है.
बच्चा खेल रहा हो या कुछ और काम कर रहा हो तो जब-तब उसे पकड़कर पढ़ने के लिए ना बैठा दें. बच्चे का एक रूटीन फिक्स कर दें. इसी समय पर उसे पढ़ने के लिए कहें और पढ़ाई का टाइम भी फिक्स कर दें. इससे बच्चे को पता होता है कि उसे कब खुद को पढ़ने के लिए प्रिपेयर करना है.
बच्चे को लगातार एक-डेढ़ घंटे तक पढ़ने के लिए ना कहें. पढ़ाई के बीच-बीच में बच्चे को ब्रेक्स भी दें. हर 15 मिनट में 5 मिनट के लिए बच्चे को ब्रेक लेने दें.
बच्चे के लिए पढ़ाई को मजेदार और इंटरेस्टिंग बनाना जरूरी होता है. सिर्फ किताबों से ही नहीं बल्कि बच्चे को पजल्स, फोन की ऐप्स और गेम्स वगैरह से भी पढ़ाएं. इससे बच्चा सबजेक्ट्स को और बेहतर तरह से समझ पाता है.
बच्चे को एक ही दिन में बहुत सारा पढ़ने के लिए देने के बजाय छोटे-छोटे गोल्स सेट करें. एक दिन में उसे कोई एक चैप्टर पढ़ने का चैलेंज दें या फिर 3 से 4 गणित के सवाल सॉल्व करने के लिए दें. ऐसे चैलेंजेस मिलते हैं तो बच्चा और मन लगाकर पढ़ता है.
बच्चे की पढ़ाई में हिस्सा लें
बच्चे को अकेले कोने में पढ़ने के लिए ना बिठाएं बल्कि आप खुद भी बच्चे के साथ थोड़ा बहुत पढ़ सकते हैं, बीच-बीच में उसकी हेल्प कर सकते हैं या कोई चैप्टर वगैरह उससे डिस्कस कर सकते हैं. इससे बच्चे को पढ़ते हुए बोरियत नहीं होती और ना ही नींद आती है.
बच्चे अक्सर ही पढ़ाई से जी चुराते हैं क्योंकि अक्सर ही पढ़ाई से जुड़ी चीजों पर उन्हें डांट पड़ जाती है. ऐसे में बच्चे डरने लगते हैं और पढ़ने से बचते हैं. ऐसे में पैरेंट्स को यह ध्यान रखना जरूरी है कि वे बच्चों पर गुस्सा ना करते रहें और उनके पढ़ने के लिए पॉजीटिव एन्वायरमेंट बनाएं.