Nitin Gadkari Exclusive Interview: केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने न्यूज 24 के कंसल्टिंग एडिटर अशोक सिंघल के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में देश के हाईवे, प्रदूषण और ऑटोमोबाइल सेक्टर को लेकर कई बड़े ऐलान किए हैं. गडकरी ने बताया कि देश भर के टोल प्लाजा पर जाम खत्म करने के लिए जीपीएस आधारित प्रणाली लाई जा रही है. इसके तहत अब तक 100 टेंडर निकाले जा चुके हैं और अगले 6 महीनों में 400 और टेंडर निकालने की तैयारी है. सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले 6 महीनों के भीतर सभी टोल को पूरी तरह ट्रैफिक फ्री कर दिया जाए, जिससे वाहनों को बिना रुके निकलने की सुविधा मिलेगी.
गाड़ियों में खुद लगेगा ब्रेक, 22 लाख करोड़ का इंपोर्ट और 40% प्रदूषण
सड़क हादसों पर रोक लगाने के लिए सरकार अब गाड़ियों में ‘ऑटोमैटिक ब्रेकिंग सिस्टम’ लाने की योजना पर काम कर रही है. इस तकनीक के आने के बाद अगर गाड़ी के सामने अचानक कोई दूसरी गाड़ी या रुकावट आती है तो सिस्टम खुद ही ब्रेक लगा देगा. पर्यावरण और अर्थव्यवस्था पर बात करते हुए मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि देश में होने वाले कुल प्रदूषण का 40 फीसदी हिस्सा फॉसिल फ्यूल से होता है. इसके अलावा देश में हर साल करीब 22 लाख करोड़ रुपये का ईंधन आयात किया जाता है. सरकार का मुख्य मकसद इस भारी-भरकम इंपोर्ट को घटाना और देश का पैसा बचाना है.
इलेक्ट्रिक स्कूटर अभी सस्ते क्यों नहीं?
इलेक्ट्रिक वाहनों पर मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि शुरुआत में लीथियम बैटरी काफी महंगी थी, जो अब सस्ती हो रही है. हालांकि, भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की भारी मांग के चलते कंपनियां फिलहाल इनके दाम कम नहीं कर पाई हैं. ईंधन के मुद्दे पर गडकरी ने साफ किया कि E20 को लेकर सरकार की फिलहाल कोई नई योजना नहीं है.
पढ़ें, अशोक सिंघल के सवालों पर नितिन गडकरी के जवाब
सवाल: देश में आपको ‘हाईवे मैन ऑफ इंडिया’ कहा जाता है और मोदी सरकार के टॉप परफॉर्मिंग मंत्रियों में आपकी गिनती होती है. आपके इस विजन और काम के पीछे की मुख्य सोच क्या है?
जवाब: मैं जो कुछ भी काम करना चाहता हूं, वह समाज, देश और अंतिम पायदान पर खड़े गरीब व्यक्ति के लिए करना चाहता हूं. पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी का जो अंत्योदय का आर्थिक-सामाजिक चिंतन था, उसी के तहत समाज के आखिरी व्यक्ति की स्थिति सुधारना मेरी प्राथमिकता है. मेरा फोकस रूरल और एग्रीकल्चर बेस्ड टेक्नोलॉजी, ‘वेस्ट टू वेल्थ’ और ‘नॉलेज टू वेल्थ’ पर है. आज हमारा किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि ‘ऊर्जादाता’ और ‘ईंधनदाता’ भी बन रहा है. बायोमास-जैसे पराली, बगास और नेपियर ग्रास से कंप्रेस्ड बायो गैस (CBG) बनाई जा रही है. 300 प्रोजेक्ट शुरू हो चुके हैं और 3,000 से अधिक पाइपलाइन में हैं. हमारा लक्ष्य देश के 22 लाख करोड़ रुपये के फॉसिल फ्यूल के आयात को कम करना है.
सवाल: आपने देश में सड़कों का मजबूत जाल बिछाया है, लेकिन अब आप ‘उड़ने वाली बसों’ की बात करते हैं. यह मॉडल असल में क्या है और कैसे काम करेगा?
जवाब: यह हवा में चलने वाला हाई-कैपेसिटी मास रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम है. जिस तरह रोपवे काम करता है, उसी तकनीक को अपग्रेड करके डबल डेकर बस जैसी क्षमता वाले केबिन हवा में एक छोर से दूसरे छोर चलेंगे. इसके अलावा जहां पहाड़ी क्षेत्र हैं, वहां ‘फनिक्युलर रेलवे’ जैसी प्रणालियां इस्तेमाल की जा सकती हैं. इसका मकसद पब्लिक ट्रांसपोर्ट को सस्ता, सुगम और जाम-मुक्त बनाना है.
सवाल: ऑटोमोबाइल सेक्टर में क्या कंपनियां इस नई और वैकल्पिक ईंधन तकनीक को अपनाने के लिए तैयार हैं?
जवाब: बिल्कुल तैयार हैं. टू-व्हीलर कंपनियों जैसे बजाज, टीवीएस, हीरो और होंडा ने ऐसी मोटरसाइकिलें तैयार कर ली हैं जो 100% इथेनॉल पर चल सकती हैं-उनमें पेट्रोल डालने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी. इसे ‘फ्लेक्स-फ्यूल इंजन’ कहा जाता है. टोयोटा ने भी ऐसी हाइब्रिड-फ्लेक्स कार तैयार की है, जो 60% बिजली खुद जनरेट करती है और 40% इथेनॉल पर चलती है. इसका एवरेज निकालने पर खर्च लगभग 25 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल के बराबर आता है. हमारे देश में 40% वायु प्रदूषण फॉसिल फ्यूल से होता है. ग्रीन फ्यूल से प्रदूषण घटेगा, 22 लाख करोड़ का इंपोर्ट बिल बचेगा और पैसा सीधे हमारे किसानों की जेब में जाएगा.
सवाल: ऑटोमोबाइल सुरक्षा को लेकर सरकार का अगला कदम क्या है? एंटी-लॉक ब्रेकिंग और ऑटोमैटिक ब्रेक को लेकर क्या चल रहा है?
जवाब: हम वैश्विक मानकों के अनुरूप काम कर रहे हैं. हमने भारत NCAP क्रैश रेटिंग शुरू की है, जिससे अब गाड़ियां सुरक्षा में अंतरराष्ट्रीय स्तर की बन रही हैं. साथ ही, ऑटोमैटिक ब्रेकिंग सिस्टम (AEB) जैसी तकनीकों पर भी अध्ययन जारी है, जिससे सामने अचानक कोई रुकावट आने पर गाड़ी खुद ब्रेक लगा सके और हादसों में कमी आए.
सवाल: नेशनल हाईवे पर टोल प्लाजा को लेकर अक्सर लंबी कतारों और विवादों की शिकायतें आती हैं. इसे खत्म करने के लिए क्या तैयारी है?
जवाब: आने वाले 6 महीनों के भीतर हम देश से फिजिकल टोल बैरियर की व्यवस्था पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में काम कर रहे हैं. इसके लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है. नई व्यवस्था में ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों से गाड़ी की नंबर प्लेट स्कैन होगी और टोल अपने आप कट जाएगा; गाड़ी को बैरियर पर रुकना नहीं पड़ेगा. इसके साथ ही, शहरों और इंडस्ट्रियल एरिया के पास रहने वाले स्थानीय लोगों की सुविधा के लिए 20 किलोमीटर के दायरे में आने-जाने पर टोल राहत का प्रावधान भी किया गया है.
सवाल: इलेक्ट्रिक गाड़ियां (EVs) आ तो रही हैं, लेकिन अभी भी आम आदमी की पहुंच से थोड़ी महंगी हैं. इनकी कीमतें कब तक कम होंगी?
जवाब: यह पूरी तरह डिमांड और सप्लाई का नियम है. पहले बैटरी की लागत 150 डॉलर प्रति किलोवाट ऑवर थी, जो घटकर लगभग 50 डॉलर प्रति किलोवाट ऑवर तक आ चुकी है. जैसे-जैसे देश में उत्पादन का दायरा बढ़ेगा और सप्लाई मजबूत होगी, इनकी कीमतें स्वाभाविक रूप से आम उपभोक्ता की पहुंच में आ जाएंगी.
सवाल: ट्रकों और बसों के लिए ‘इलेक्ट्रिक हाईवे’ और फ्लैश चार्जिंग का क्या प्लान है? क्या यह वाकई व्यावहारिक है?
जवाब: हम फ्लैश चार्जिंग और केबल पर चलने वाली 120 से 150 सीटर इलेक्ट्रिक बसों के लिए इलेक्ट्रिक हाईवे का पायलट प्रोजेक्ट तैयार कर रहे हैं. यह एक सस्ता और वर्ल्ड-क्लास मास रैपिड ट्रांसपोर्ट साबित होगा, जिसमें यात्रियों को हवाई जहाज जैसी आरामदायक सुविधाएं बेहद कम किराए में मिलेंगी. मैंने आज तक जो भी प्रोजेक्ट कहा है, उसे जमीन पर उतारकर दिखाया है और यह भी निश्चित रूप से पूरा होगा.
सवाल: आप अक्सर दावा करते हैं कि पेट्रोल-डीजल को देश से पूरी तरह बाहर कर देंगे. क्या यह लक्ष्य हासिल करना संभव है?
जवाब: सौ फीसदी संभव है. भारत आज ऊर्जा का बड़ा आयातक है, लेकिन भविष्य में हम ग्रीन हाइड्रोजन के जरिए ऊर्जा निर्यातक देश बनेंगे. मेरे पास खुद हाइड्रोजन से चलने वाली टोयोटा मिराई कार है. हम पानी से, कचरे से और बायोमास से ग्रीन हाइड्रोजन बनाएंगे. ग्रीन हाइड्रोजन हमारा राष्ट्रीय मिशन है और भारत इसमें दुनिया में नंबर एक बनने की ओर अग्रसर है.
सवाल: विपक्ष द्वारा वोटर लिस्ट और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन किए जा रहे हैं, इसे आप किस तरह देखते हैं?
जवाब: जहां तक वोटर लिस्ट का विषय है, कई जगहों पर एक ही व्यक्ति के कई नाम दर्ज होने या पुरानी सूचियों में विसंगतियां थीं. उन सभी कमियों को कानून के दायरे में रहकर पूरी पारदर्शिता के साथ सुधारा गया है. विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं. लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर इस तरह के निराधार आरोप लगाना शोभा नहीं देता.
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